लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज उठाने पर तालिबान के हमले का सामना कर चुकी पाकिस्तानी लड़की मलाला यूसुफजई का मानना है कि अगली पीढ़ी को शिक्षित करने से ही कट्टरपंथ को खत्म किया जा सकता है। मलाला इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार की दौड़ में भी शामिल हैं। बीबीसी वर्ल्ड न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में मलाला ने कहा कि खतरों के बावजूद वह स्वदेश लौटना चाहती है।
यूसुफजई ने कहा, "शांति स्थापित करने के लिए वार्ता ही एकमात्र जरिया है और अगली पीढ़ी को शिक्षित कर कट्टरपंथ को खत्म किया जा सकता है।" उन्होंने कहा, "मैं पाकिस्तान लौटना चाहती हूं, लेकिन इससे पहले मुझे पूरी तरह से समर्थ होना जरूरी है और खुद को शक्तिशाली बनाना होगा। मुझे केवल एक ही चीज चाहिए वह है शिक्षा, इसलिए मैं पढ़ रही हूं। इसके बाद मैं पाकिस्तान लौट जाऊंगी।"
पाकिस्तान की स्वात घाटी में बिताए अपने दिनों के बारे में मलाला ने कहा कि वह एक ऐसे समाज में पैदा हुई जहां बेटियों की कद्र नहीं होती। मलाला ने कहा, "जब मैं पैदा हुई तब मेरे कुछ रिश्तेदार मेरे घर आए और मेरी मां से कहे, चिंता मत करो अगली बार तुम्हें बेटा होगा। मेरे भाइयों के लिए अपने भविष्य के बारे में सोचना आसान है, लेकिन मेरे लिए यह मुश्किल। मैं शिक्षित होना चाहती हूं और ज्ञान से खुद को समर्थ बनाना चाहती हूं।"
मलाला ने कहा कि उसके अब्बा जियाउद्दीन उसके मार्गदर्शक और सबसे बड़ा सहारा हैं। मलाला ने कहा कि उसे स्वात में अपने घर और दोस्त बहुत याद आते हैं। नोबेल पुरस्कार पाने की उसकी उम्मीद के बारे में पूछने पर उसने कहा, "यदि मैं नोबेल शांति पुरस्कार पाती हूं तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी, लेकिन यदि यह नहीं मिलता है तो भी मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि मेरा लक्ष्य नोबेल शांति पुरस्कार नहीं है। मेरा लक्ष्य शांति हासिल करना है और मेरा लक्ष्य हर बच्चे को शिक्षित देखना है।"

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