देश की शीर्ष युगल महिला टेनिस स्टार ज्वाला गुट्टा ने भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) की अनुशासन समिति के प्रस्ताव पर संघ द्वारा अपने ऊपर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। ज्वाला ने बुधवार को संघ के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और कहा कि अनुशासन समिति ने न्याय एवं निष्पक्षता के प्राकृतिक एवं निर्धारित सिद्धांत का उल्लंघन किया है और बिना उन्हें सुनवाई का मौका दिए उनके खिलाफ आजीवन प्रतिबंध का आदेश जारी कर दिया। न्यायाधीश वी. के. जैन ने इस मामले की सुनवाई के लिए गुरुवार, 10 अक्टूबर का दिन निर्धारित किया है।
ज्वाला ने न्यायालय को यह भी बताया कि बीएआई ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके हिस्सा लेने पर भी रोक लगा दी है। ज्वाला ने अपनी याचिका में कहा है कि बीएआई ने बिना किसी वाजिब कारण या स्पष्टीकरण के उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। ज्वाला द्वारा दायर याचिका के अनुसार, "बीएआई का रवैया पूर्वग्रहग्रस्त है, और उन पर निशाना साधने के लिए लिया गया है।"
याचिका में कहा गया है, "खेल मंत्रालय को इस मामले की स्वतंत्र रिपोर्ट मांगे जाने का निर्देश दिया जाए, तथा उचित प्रक्रिया के अभाव में बीएआई के अंदर निर्णय प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र नियामक प्रणाली स्थापित करने का निर्देश भी दिया जाए।"
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