सरकार का नाम सुशासन फलसफा हर तरफ, हर जगह कुशासन। जमीनी हकीकत यही, फंसाने हर दिन नए-नए। आतंकवादी यहीं सुरक्षित। लोग यहीं मर रहे बेमौत। बलात्कारी खिलखिला रहे हैं बिल्कुल निसंकोच, सेफ,बेखौफ। यहां, इस प्रदेश की पुलिस नहीं मिला पा रहीं आम-आवाम से नजरें। आलाधिकारी हो चुके हैं रिश्वतखोर। देखिए, कैसे भाग रहे हैं रात के अंधेरे में दस करोड़ की रंगदारी आम आदमी से मांगने वाले डीआइजी आलोक कुमार। या आम लोगों पर पुलिसिया रौब दिखाते बांका के दरोगा ज्योतिष कुमार की पिटाई करते लोग। शायद, इसी का नाम है बिहार। कटिहार में चोर के शक में शिक्षक पुत्र अनिल राम को पीटकर मार डाला जाता है। नक्सली यहीं खेल रहे जीभर होली। औरंगाबाद के सुदवां थाने के पथरा मोड़ पर बिछ जाती है बारूदी सुरंग। जिला पार्षद सुधा देवी के पति और रणवीर सेना के पूर्व कमांडर सुशील पांडेय समेत सात लोगों के वाहन समेत परखचे उड़ जाते हैं। नक्सलियों को प्रदेश में पूरी छूट, कतई कोई रोक, कानून-व्यवस्था का खौफ नहीं। नारायण साई की तलाश में पुलिस मधुबनी तो कभी दरभंगा के कमतौल में करती है छापेमारी। इस प्रदेश के छोटे-छोटे शहरों से आज पकड़ाता है कौन? अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के सरगना या उसका कोई दाहिना हाथ। इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी । ऐसे में बिहार का असली चेहरा बिल्कुल साफ सामने है जो बदलाव या बदलने के नाम पर विकृत हो रहा है। भले पाकिस्तान की सरकारी पत्रिका ने एक सप्ताह पूर्व ही नीतीश के विकास मॉडल की तारीफ की हो लेकिन हकीकत और बेहतरी के बीच फासले अब भी बहुत हैं।
हरियाणा, दिल्ली के बाद बिहार ही है जहां नाबालिग, किशोर व बच्चियां हर रोज बलात्कार, हवस की जख्म भोग, कलप रही हैं। शुरुआत रुपम पाठक से। विधायक केसरी के यौन शोषण से आजिज एक सुसंस्कृत, सुशिक्षित महिला उस रावण से जा भिड़ी जो उसी भाजपा के मंत्री को लक्ष्मणरेखा के बाहर खड़ा दिखाई पड़ता है। नतीजा,उसी पार्टी के बिहारी रावण को राम ने नहीं यहां की जगत जननी सीता ने अपने हाथों वध कर मार डाला। आज डेग-डेग पर दसमुखी दशानन वही रावण खड़ा है और दुर्भाग्य,लालू-रामविलास,कांग्रेस के बाद आज भाजपा भी जिस विपक्ष की राजनीति कर रही है उसमें प्रदेश नजर अंदाज है। दिल्ली गैंगरेप के समय देश समेत बिहार भी जागा। लेकिन अब जब खुद की बारी है विपक्ष, सत्ता, मीडिया, तंत्र या फिर आवाम सब बलात घटनाओं से कहीं उद्देलित नहीं। जिस रात दिल्ली में दामिनी सड़क पर बेहोश मिली। बात वहीं से शुरु करते हैं। इसी दिन से बिहारी स्त्रीत्व की पीड़ा देखिए, लगातार। समस्तीपुर में एक बाप को अपनी बेटी के साथ बीच नवरात्र में आपत्तिजनक देखकर लोगों ने पंचायत में थूक चटवाया। इससे आहत व्यक्ति ने खुदकुशी तलाश ली। गोपालगंज के राजापुर गांव में बाइक सवारों ने लड़की को हवस का शिकार बनाया। बांका में स्कूल जाती लड़की को अगवा कर गैंगरेप किया। मुजफ्फरपुर के मुसहरी बाजार से घर लौट रही युवती, नवादा की वो महिला, सहरसा में जिला गल्र्स हाई स्कूल की दसवीं की छात्रा के साथ चलती कार में दुष्कर्म। कैमूर में बलात्कार का विरोध करती छात्रा की हत्या। बहेड़ी के ज्योतिनगर झुग्गी में वो तेरह साला किशोरी। समस्तीपुर के बासुदेवपुर गांव में गैंगरेप से बेहोश पड़ी छात्रा।
नवादा में पति से नाराज घर छोड़कर बाहर निकली महिला। औरंगाबाद में इंटर की फार्म भरने पहुंची छात्रा से गैंगरेप। कुरसौला में नाबालिग लड़की। धमदाहा के वधवा गांव, उदाकिशुनगंज के कुस्थनी व सहरसा के सतरकटैया में विवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म। सुपौल में अगवा कर छह दिनों तक बलात्कार झेलती दसवीं की छात्रा। दलसिंहसराय में बेटी के साथ हवस मिटाता बाप या पिछले 26 सालों से तड़प रही भागलपुर की वह दामिनी जिसकी दर्द ने मत्स्य विभाग में प्रोविजनल डायरेक्टर उसके पिता को भी मौत की सौगात दे दी। यह दामिनी भी तो मोक्ष्दा हाई स्कूल में पढऩे गई थी फिर...। सीतामढ़ी के परिहार व बेला में दो नाबालिग से दुष्कर्म। बेतिया/मौनाटांड़ में महिला के साथ गैंगरेप। मोतिहारी में हवस के आगे बेसुध पड़ी तीन वर्षीय बच्ची। यह वही बिहार है, शर्मनाक हालात में सबके सामने ओझल। जहां महिला अधिकारी को सामूहिक दुष्कर्म की धमकी भी मिलती है। इतना भर नहीं। दुस्साहस यह, बिहार शरीफ के समाहरणालय में काम करने वाली महिला अधिकारी को सरेआम नालंदा समाहरणालय के पास रोककर उससे छेड़खानी की जाती है। उसके बाल खींचे जाते हैं। मोबाइल व पर्स की भी लूट...ये तो यहां आम बात है। ऊपर से, रंगदारी, अपहरण का उद्योग, पलायन, जहरीली शराब पीकर बेमौत मर रहे सो अलग।
गोपालगंज के एक स्कूल में घुसकर छात्र का अपहरण होता है। बियान में निर्माण कंपनी, डॉक्टर, मोतिहारी के छोड़दानी के दो व्यवसायियों से रंगदारी महज यहां की दिनचर्या है। हद यह, स्वयं भाजपा के सीवान रधुनाथपुर के विधायक को भी रंगदारी चाहिए वो भी बंदूक की नोंक पर। जहरीली शराब से पटना के मेंहदीनगर, कसबा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर कहां नहीं मरे लोग और उसकी कमाई से चलता सारा प्रदेश। हर रोज होती यहां हत्याएं। गोपालगंज के फुलवरिया में बीडीओ चैंबर में घुसकर मुखिया पति की हत्या एक टेलर। लोगों को नहीं मिलती, तरसा रही है बिजली और 147 गेजटेड अधिकारी यहां चोरी कर रहे बिजली। मेले में पान खाने की महिलाओं को मिलती है सजा( बंधक बनाकर मधुबनी के परखलपुर गाव में जमकर होती पिटाई, वाह रे सुशासन। बदतर शिक्षा, रेंगती स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच पलायन को विवश मजदूर। औरंगाबाद में जो कुछ हुआ यही यहां की सच्चाई, पोल गुपचुप खोलती है। बाहर से कमा कर घर लौट रहे 47 में से 27 मजदूरों की मौत और ट्रक से बरामद उनकी मजदूरी का वह 200 बोरा चावल गवाह हैं यहां के खोखले विकास का। ये सब तो एक बानगी है।
आइए, एक नजर दौड़ाते हैं शिक्षा व्यवस्था पर । शिक्षा के नाम पर बीआर बिहार विवि में एमए व बीए की कॉपियां ठेके से लेकर कमीशन तक में जांची जा रही। नजीजतन, मुजफ्फरपुर के छात्र देवनागरी की जगह देवनागरिक, पटना विवि के स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र डॉ.राजेंद्र प्रसाद को देश का प्रथम प्रधानमंत्री, वीर कुंवर सिंह के बारे में अपनी उत्तर पुस्तिका में महान कवि बतला रहे हैं। स्वयं, कई मौकों पर राज्यपाल भी इन मेधावी छात्रों की करतूत मंच पर सुन, देखकर हतप्रभ हो चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य महकमा भला क्यों पीछे रहे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा के नाम पर सैकड़ों महिलाओं के गर्भाशय इसी बिहार में निकाल लिए गए। इस सबके बीच, सीतामढ़ी की कंचनबाला या फिर मुजफ्फरपुर की नवरुणा सरीखे कइयों के परिजन आज भी अपनी बेटी की मौत मामले में न्याय की उम्मीद लिए आंखें निपोड़े इस सुशासन की ओर टकटकी लगाए, पथरा गए हैं। सत्ता से भाजपा के अलग होते ही यहां का चेहरा बिल्कुल ही बदल गया है। राजनीतिक लड़ाई आकर 27 अक्टूबर को प्रस्तावित भाजपा की हुंकार रैली पर टिक गई है। रैली के लिए नौ जिले से 11 ट्रेनों व 1900 बसों की बुकिंग हो चुकी है जिसपर लादकर लोगों को पटना नरेंद्र मोदी का बिहार में बहुप्रतीक्षीत भाषण सुनने के लिए ढ़ोया जाएगा। भाजपा के पूर्व मंत्री अश्विनी चौबे हुंकार रथ यात्रा पर निकले हुए हैं। चारा घोटाले की राख अब भी ठंडी नहीं हुई है। हर दिन लालू के माफिया किरदार के गुणगानों के बीच उनके व लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के पुत्रों का राजनीतिक दौरा एक अलग संकेत की ओर इशारा भर है। वहीं पाकिस्तानी सरकार की पत्रिका में नीतीश कुमार की जमकर हो रही तारीफ को पचा पाने को विपक्ष कतई तैयार नहीं। पत्रिका की शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य आधारभूत संरचना में सुधार व विकास की बू को पचा पाना कमोबेश आम लोगों के लिए भी मुश्किल। त्रिशंकु जनादेश के बीच जाता समूचा बिहार मौजूदा परिवेश में कुछ सहमा, थका-हारा दिख रहा। फलसफा, दावे यह कहने को तैयार नहीं, तुम्हारा वतन है राहे तरक्की पे तेजगाम...।
मनोरंजन ठाकुर
वरीय पत्रकार
दरभंगा

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