निर्धन बच्चों को भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा के लिए तैयारी कराने वाला चर्चित संस्थान सुपर 30 अब दुनिया के लिए शोध का विषय बन गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन और मुंबई की सामाजिक संस्था टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) ने हाल ही में इस संस्थान पर शोध पूरे किए हैं। शोध करने वाली संस्था टीआईएसएस के सेंटर फॉर कॉम्युनिटी आर्गेनाइजेशन एंड डेवलपमेंट प्रैक्टिस के चेयरपर्सन प्रोफेसर मनीष क़े झा ने बुधवार को बताया कि सुपर 30 के 50 बच्चों पर शोध किया गया, जिसमें यह बातें सामने आई कि जिन परिवारों को दो जून की रोटी नसीब नहीं हो पा रही है, उस परिवार के बच्चे आज आईआईटी उत्तीर्ण होकर बड़े मुकाम पर पहुंच रहे हैं।
उन्होंने सुपर 30 के संस्थापक आनंद की तारीफ करते हुए कहा कि शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि अगर गरीब बच्चों को भी मौका दिया जाए तो वे बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन के शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध को दुनिया के नामी शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित कराया जाएगा। झा ने बताया कि शोध किए गए 50 बच्चों में एक तिहाई ऐसे बच्चे थे जो आज भी सुपर 30 के छात्र हैं जबकि एक तिहाई ऐसे बच्चों को शोध में शामिल किया गया जो आईआईटी की शिक्षा पूरी कर एक मुकाम पर पहुंचे हैं।
इस शोध के विषय में संस्थान के संस्थापक आनंद कहते हैं कि शोध के द्वारा सुपर 30 की कला और विज्ञान को लोग नजदीक से समझ सके। उन्होंने कहा कि यहां के बच्चों को सही मार्गदर्शन की जरूरत है, जो सुपर 30 दे रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रसिद्घ पत्रिका 'न्यूज वीक' ने दुनिया के चार विद्यालयों में सुपर 30 का नाम शुमार किया था तथा 'टाइम पत्रिका' ने इस संस्थान को एशिया का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय घोषित किया था। सुपर 30 पर जापान सहित कई देशों में फिल्म और वृतचित्र बन चुके हैं।

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