महान नायक अमिताभ बच्चन 71 के हुए. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

महान नायक अमिताभ बच्चन 71 के हुए.

लगभग 200 हिंदी फिल्मों में काम कर चुके सदी के महानायक अमिताभ का जन्म हिंदी के महान कवि हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन के घर 11 अक्टूबर 1942 को हुआ। उनके जन्म के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक अमरनाथ झा ने उनका नाम इंकलाब रखने का सुझाव दिया, लेकिन राष्ट्रकवि सुमित्र नंदन पंत द्वारा सुझाए गए नाम अमिताभ (जिसकी आभा कभी नहीं मिटती) ने देश-विदेश में अभिनय की कविता रच डाली।

बॉलिवुड में ‘बिग बी’ के नाम से लोकप्रिय अमिताभ के लिए हिंदी सिनेमा में अपना स्थान बनाना आसान नहीं था। 1969 में पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ करने के बाद उन्होंने ‘परवाना’, ‘रेशमा’ ‘शेरा’, ‘गुड्डी’ और ‘बांबे टू गोवा’ जैसी एक के बाद एक असफल फिल्में कीं, लेकिन इन फिल्मों से वह दर्शकों को खुश नहीं कर पाए।
अमिताभ को पहली बड़ी पहचान 1971 में ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘आनंद’ से मिली। ‘आनंद’ में अमिताभ द्वारा निभाई गई सहायक भूमिका ने उन्हें पहला फिल्म फेयर पुरस्कार मिला।

अमिताभ को लेकिन बतौर अभिनेता देश की जनता ने 1973 की फिल्म ‘जंजीर’ में उनके गुस्सैल छवि वाले किरदार से पहचाना। आज बॉलीवुड और अभिनय का पर्याय बन चुके अमिताभ को ‘जंजीर’ ने ही स्टारडम के साथ एंग्री यंगमैन का तमगा भी दिलाया। इसके बाद तो एक के बाद एक अमिताभ ने ‘मर्द’, ‘शोले’, ‘कुली’, ‘लावारिस’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों से एंग्री यंग मैन के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर ली। सफलता की दौड़ के बीच उनके जीवन में वह पल भी आया जब ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग में हुए भयानक दुर्घटना ने उनकी रफ्तार रोक ली। उनके स्वस्थ होकर घर आने की उम्मीद कम थी, लेकिन प्रशंसकों की उम्मीद के बीच कई महीने बाद वह स्वस्थ हो कर घर लौटे। अमिताभ वही शख्स हैं जो मरणासन्न अवस्था में पहुंचने के बाद एकबार फिर बाजार के सबसे बड़े ब्रैंड बनकर उभरे हैं, यह उनकी जीवटता का बेहतरीन उदाहरण है।

अमिताभ ने इसके बाद कुछ वर्षों के लिए अभिनय से अवकाश ले लिया और अपने मित्र राजीव गांधी की पहल पर राजनीति में किस्मत आजमाई। उन्हें सफलता भी मिली और इलाहाबाद सीट से उन्होंने एच.एन. बहुगुणा के खिलाफ रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की। लेकिन राजनीति उन्हें ज्यादा दिन तक रास नहीं आई और इसकी वजह बना बोफोर्स कांड में उनका नाम उछाला जाना। उन्हें न्यायालय ने हालांकि क्लीन चिट दे दी, लेकिन उन्होंने राजनीति को गंदी नाली करार दे कर इससे किनारा कर लिया। उनकी शादी बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकारा जया भादुड़ी से हुई। 

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