कोई खजाना नहीं मिलेगा. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 23 अक्टूबर 2013

कोई खजाना नहीं मिलेगा.

उन्नाव के डौंडियाखेड़ा में खजाने के लिए चल रही खुदाई पर अब तक कई लोगों के बयान सामने आ चुके हैं। जहां नरेंद्र मोदी ने सरकार के इस कदम को देश का मजाक उड़ाने वाला बताया तो दो दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने भी इसे बकवास करार दे दिया। लेकिन इस बार इस खुदाई के विरोध में बयान किसी नेता या किसी विशेषज्ञ की तरफ से नहीं, बल्कि उन्नाव के शाही परिवार की ही एक वंशज की तरफ से आया है, जिनके मुताबिक वहां कोई खजाना नहीं गड़ा हुआ है।

खुद को उन्नाव के राजा की वंशज बताने वाली 57 वर्षीय रेखा सिंह बख्शी का कहना है कि इस बात की संभावना बहुत ही कम है कि यहां कोई खजाना मिले। हो सकता है कि थोड़ी चांदी और तांबा वगैरह मिल जाए। रेखा बताती हैं कि वह अपने बचपन से ही यहां दबे खजाने के कई किस्से-कहानियां सुनती आ रही हैं। हालांकि, पिछले कुछ दशकों के दौरान खुदाई में यहां से ऐतिहासिक महत्व की कुछ पुरानी चीजें जरूर मिली हैं लेकिन इससे खजाना दबा होने का संकेत नहीं मिलता।

रेखा के मुताबिक उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी अयोध्या सिंह, राजा राव रामबख्श सिंह के प्रपौत्र के बेटे थे। राजा राव रामबख्श सिंह 1857 की क्रांति के समय डौंडियाखेड़ा के राजा थे। रेखा, जिन्होंने खुद जाधवपुर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स के साथ जेएनयू से इंटरनैशनल रिलेशंस में पीएचडी की है, की इस 'खजाने' में जरा भी रुचि नहीं है। वह कहती हैं, 'मैंने अपने पिता जी से सुना था कि डौंडियाखेड़ा और आस-पास के इलाकों में कई बार थोड़ी सी खुदाई के बाद चांदी के सिक्के मिल चुके हैं। राजा और उनके परिवार द्वारा उपयोग किए गए चांदी और कांसे के कुछ बर्तन भी मिलें हैं। हो सकता है कुछ और भी मिल जाए, लेकिन 1,000 टन सोना मिलेगा, इसकी कोई संभावना नहीं है।'

1999 से पश्चिम बंगाल में रह रहीं रेखा स्वाधीनता (साप्ताहिक पत्र) से जुड़ी हुई हैं। वह कहती हैं, 'राजा रामबख्श ने नाना साहब के साथ मिलकर 1857 की क्रांति के समय देश की आजादी की लड़ाई में योगदान दिया था। सरकार को राजा की संपत्ति का संरक्षण उसके ऐतिहासिक महत्व की वजह से करना चाहिए। खजाने की खुदाई की खबर फैलते ही कई लोगों ने खुद को राजा का रिश्तेदार बताना शुरू कर दिया है। कई लोग तो उन्नाव में ही डेरा डाल कर बैठ गए हैं और खजाने में हिस्सेदारी मांग रहे हैं। लेकिन मुझे इस खजाने में कोई रुचि नहीं है। मेरी सरकार से बस यही गुजारिश है कि खजाने से जुड़ी बातों को सही तथ्यों के साथ इतिहास में दर्ज किया जाए।'

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