पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने आज कहा है कि अगले छह महीने में डीजल की कीमतें पूरी तरह नियंत्रण मुक्त हो जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों को डीजल बिक्री पर अभी भी 9 रुपये 58 पैसे प्रति लीटर का घाटा हो रहा है जबकि मिट्टी के तेल और रसोई गैस पर क्रमशः 35 रुपये 77 पैसे प्रति लीटर और 482.41 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि डीजल बिक्री पर होने वाले घाटे को खत्म करने के लिए इसकी कीमतों को नियंत्रण मुक्त करना जरूरी हो गया है। सरकार पहले ही डीजल को आंशिक रूप से नियंत्रण मुक्त कर चुकी है। इस व्यवस्था के तहत बीपीसीएल, एचपीसीएल और इंडियन ऑयल जैसी सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने डीजल की कीमत में 50 पैसे प्रति लीटर का इजाफा करने की छूट मिली हुई है।
मोइली के अनुसार कच्चे तेल के आयात पर हर साल 16 हजार करोड़ डॉलर का खर्च आ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को अंतर्राष्ट्रीय कीमतों की तुलना में घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल सस्ता बेचना पड़ता है जिसके कारण उस पर सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बोझ को कम करने के लिए सरकार पेट्रोल की कीमत को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त कर चुकी है और अब डीजल को भी नियंत्रण मुक्त करने की योजना है। अंडर रिकवरी का हवाला देते हुए तेल कंपनियां सरकार से लगातार डीजल की कीमतों को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त करने की मांग करती रही है। डीजल की कीमत को नियंत्रण मुक्त करने की मंजूरी कैबिनेट दो साल पहले ही दे चुकी है लेकिन सरकार अभी तक इसे लागू नहीं कर पाई है। आगे आम चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद इसे लागू करना और भी मुश्किल हो सकता है।
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