सुप्रीमकोर्ट ने नक्सलियों के लिए कथित तौर पर संपर्क सूत्र का काम करने वाली छत्तीसगढ़ की शिक्षिका सोनी सोरी और पत्रकार लिंगाराम कोडोपी को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आज आदेश दिया। न्यायमूर्ति एस एस निज्जर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोजाल्विस और लिंगाराम के वकील प्रशांत भूषण की दलीलें सुनने के बाद दोनों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन दिसंबर की तारीख मुर्करर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस समय पर जवाब पेश करने में असफल रही है। इसलिए अंतरिम जमानत मंजूर की जाती है। शीर्षस्थ अदालत में दोनों की जमानत याचिकाएं इस माह के शुरू में दायर की गई थीं। इससे पहले छत्तीसगढ हाईकोर्ट ने दो माह पहले दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थी। सोनी को पिछले डेढ़ साल में आठ में से छह मामलों में बरी किया जा चुका है।

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