भोपाल से भाजपा की हलचल (10 दिसंबर) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 11 दिसंबर 2013

भोपाल से भाजपा की हलचल (10 दिसंबर)

डूबते जहाज की तरह यूपीए से घटक दल छलांग मारने को तत्पर - रघुनंदन शर्मा

raghunandan sharma
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेष उपाध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा कि चार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार से चिन्तित यूपीए के घटक दलों ने गठबंधन से छलांग लगाने की मंषा जाहिर कर दी है। कांग्रेस खुद नहीं समझ पा रही है कि उसकी पराजय के पीछे महंगाई और भ्रष्टाचार के जो कारण है उनका समाधान किस प्रकार संभव होगा ? क्योंकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दलितों, वनवासियों और पिछड़ो की हालत पर तरस खाकर जो सुझाव दिए थे वे प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की प्राथमिकताओं पर कुर्बान किए जा चुके है। जिस तरह यूपीए सरकार आर्थिक सुधारों की आड में मंहगाई को हवा दे रही है और आम आदमी का चेहरा आंकड़ो में ओझल हो रहा है। कांग्रेस की मुसीबतें कम होने वाली नहीं है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का क्या हश्र होगा यह दीवाल पर लिखी इबारत की तरह स्पष्ट हो रहा है। रघुनंदन शर्मा ने कहा कि यूपीए सरकार अवसरवादियों का जमावडा है। कांग्रेस की फजीहत पर शरद पवार अब नेतृत्व को कमजोर बता रहे है। इसके पहले वे मौन इसलिए थे कि उन्हें यूपीए सरकार में कुर्सी की तलफ थी। समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती भी विफलता के लिए कांग्रेस की नीतियों को जवाबदेह बता रही है। सपा और बसपा के प्रमुख अब तक सीबीआई और आयकर विभाग के चंगुल में थे और उनकी यह विवषता उन्हें यूपीए को समर्थन देते रहने के लिए पैदा की गयी थी, लेकिन जब विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल में कांग्रेस का सफाया हो गया। कांग्रेस के सहयोगियों का मोहभंग हो गया है और वे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से अलग खड़े दिखना कबूल करेंगे। द्रमुक ने भी कांग्रेस से असहमति जाहिर कर दी है। तृणमूल कांग्रेस तो पहले ही कांग्रेस से मुक्ति पा चुकी है।

चार राज्यों में जनता द्वारा ठुकराने के बावजूद अहंकार में चूर कांग्रेस
  • पराजय का गुस्सा कांग्रेस ने गैस मूल्यवृद्धि से किया जाहिर


भारतीय जनता पार्टी की प्रदेष महामंत्री, सांसद और राज्यसभा में सचेतक माया सिंह ने कहा कि कांग्रेस 4 राज्यों में चारों खाने चित और जनता द्वारा पूरी तरह नकारने के बावजूद अहंकार में चूर है। जनता की अस्वीकार्यता के बाद भी कांग्रेस सबक लेने के बजाए संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग कर भ्रष्टाचार और घोटाले को छुपाने की कोषिष में लगी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी आर्थिक नीतियों की विफलता से मिली पराजय को गंभीरतापूर्वक लेने के बजाए अपने गुस्से का विस्फोट पेट्रोलियम उत्पादों और गैस सिलेंडर की मूल्यवृद्धि के रूप में कर रही है। इस दिषा में गैस सिलेंडरों पर कमीषन के रूप में डीलरों के प्रभार में वृद्धि का प्रस्ताव कांग्रेस की मंषा पर सवालिया निषान है। पेट्रोलियम मंत्री मोइली इस मूल्यवृद्धि का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की जुगत में है लेकिन गैस सिलेंडर पर 3.50 रू. बढाने से आम आदमी की जेब पर भार पडेगा और महंगाई और बढेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ एक धोखा है। कांग्रेस का हाथ कार्पोरेट और उद्योगपतियों के साथ है। माया सिंह ने आषंका जतायी है कि कांग्रेस की मंषा आम आदमी को असहयोग के लिए हमेषा दंडित करने की रही है और गैस, डीजल, पेट्रोल में मूल्यवृद्धि को नियमित करना कांग्रेस का शगल बन चुका है। उन्होंने कहा कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह को क्लीनचिट देने और तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए.राजा द्वारा उन्हें गुमराह करने का दावा करने वाली संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी की विवादास्पद रिपोर्ट फर्जी और मनगढंत है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पेष करके सच्चाई छुपाने की कोषिष की गयी है। 4 राज्यों में जनता द्वारा ठुकराने के बावजूद अंहकार में चूर कांग्रेस कोई सबक नहीं ले रही है और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्था का इस्तेमाल कर रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी टूजी स्पेक्ट्रम से जुडी संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट को विपक्ष को धंता बताते हुए जिस तरह से संसद में पेष किया गया उससे लगता है कि कांग्रेस के नेता दिखावा, धोखा और फरेब करते है। लोकसभा में जेपीसी की रिपोर्ट रखते समय विपक्षी सदस्यों को बोलने तक नहीं दिया गया जबकि राज्यसभा में भी विपक्ष के सवाल पर कोई व्यवस्था दिए बिना रिपोर्ट पेष की गयी। माया सिंह ने कहा कि इससे साफ होता है कि कांग्रेस की रणनीति है कि शर्मनाक ढंग से भ्रष्टाचार करें और बेषर्मी से उसका बचाव करें। कांग्रेस जनता द्वारा नकारने के बावजूद सबक सीखने के लिए तैयार नहीं है। अहंकार और बेषर्मी कांग्रेस के डीएनए के हिस्से है।

डब्ल्यूटीओ द्वारा कृषि सब्सीडी में हस्तक्षेप भारत की संप्रभुता पर प्रहार

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेष प्रवक्ता विजेन्द्रसिंह सिसौदिया ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून संसद में पारित किया जा चुका है। खाद्य सुरक्षा को लेकर कांगे्रस और यूपीए सरकार संसद से लेकर सड़कों तक अपनी डींग हाक रही है, लेकिन केन्द्र सरकार कृषि सब्सीडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की सीमा तय करने के अधिकार पर डब्ल्यूटीओ के सामने देष की स्वायत्तता का सवाल उठाने का साहस नहीं कर पायी। यदि आगे-पीछे डब्ल्यूटीओ ने फिर इस मामलें में दखल दिया और हस्तक्षेप करके सीमा बांध दी तो संसद द्वारा पारित कानून की अवमानना होगी। कृषि स्वायत्तता में बाहरी दखल बर्दाष्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होनें कहा कि केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री ने बाली में संपन्न डब्ल्यूटीओ की मंत्रिमंडल स्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद बताया कि खाद्य सुरक्षा के लिए एक पैकेज पर बात हुई है। पैकेज क्या है ? यह बात देष के सामने उजागर की जाना चाहिए, जिससे खाद्य सुरक्षा पर आघात पहुंचाने की दषा में ऐहतियात बरता जा सके। खाद्य सुरक्षा कानून में हस्तक्षेप से संप्रभुता के साथ खिलवाड़ होगा। विजेन्द्रसिंह सिसौदिया ने कहा कि विकसित देष, विकासषील देषों में किसानों को सब्सीडी और समर्थन मूल्य पर खरीद की सुविधा पर रोक लगाना चाहते है। इस दिषा में विकासषील देषांे के विरोध का नेतृत्व भारत ने किया है, लेकिन विकसित देषों ने इस विरोध की धार कुंद करने के लिए कथित शांति अनुच्छेद जोड़ने का वायदा किया है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। देष के किसानों का संरक्षण करने के पीछे भावना अन्नदाता का सषक्तिकरण करना है। भारत के किसानों को मिलने वाली सहायता, प्रोत्साहन और सरंक्षण के मामलें में डब्ल्यूटीओ द्वारा थोपी जा रही है पाबंदियों का स्पष्ट रूप से यूपीए सरकार को मुखर विरोध करना चाहिए।

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