भ्रष्टाचार से आहत हैं लोग : राहुल गांधी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 21 दिसंबर 2013

भ्रष्टाचार से आहत हैं लोग : राहुल गांधी


rahul gandhi
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि भ्रष्टाचार 'लोगों को आहत' कर रहा है और दावा किया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने 'अन्य किसी भी सरकार के मुकाबले भ्रष्टाचार से निपटने में कहीं ज्यादा काम किया है।'  फिक्की के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए संप्रग सरकार ने लोकपाल विधेयक पारित कराया है।

फिक्की के एक समारोह में राहुल ने कहा, "भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है। इसने जनता को सर्वाधिक पीड़ित किया है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।" उन्होंने आगे कहा कि संप्रग सरकार को इसके लिए बहुत तीखी आलोचनाएं झेलनी पड़ी हैं, लेकिन "संप्रग सरकार ने किसी भी अन्य सरकार की अपेक्षा भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कहीं अधिक कार्य किए हैं।" राहुल ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार निगरानी प्रणाली को नए सिरे से सुधारने की जरूरत है।

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के बारे में उन्होंने कहा, "किसी राजनीतिक दल की ताकत उन लोगों में सन्निहित होता है जिसका वह प्रतिनिधित्व करता है।" उन्होंने कहा कि चुनावों ने 'अपनी शिक्षा पेश की है' और वह यह कि कांग्रेस के पास 'आंकड़ों के विश्लेषण और अफसोस जताने के परंपरागत राह' से इतर व्यक्त किए गए संदेश को स्वीकार करने की 'अंतर्दृष्टि और विनम्रता' होने की दरकार है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार से यह कहना कि अध्यादेश फाड़ कर फेंक दिया जाए, शिष्ट नहीं था और उन्होंने इस घटना से सीख ली है। उन्होंने कहा, "मैंने इस घटना से सबक भी लिया। मुझे समझ में आ गया है कि सरकार से अध्यादेश फाड़ कर फेंकने के लिए कहना शिष्ट नहीं है।" विपक्ष ने राहुल गांधी की उस समय तीखी आलोचना की थी, जब उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उस अध्यादेश की आलोचना की थी, जिसे दोषी ठहराए गए जनप्रतिनिधियों को बचाने के लिए लाया गया था। 

इस अध्यादेश को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। राहुल गांधी की आलोचना के बाद मंत्रिमंडल ने अध्यादेश वापस ले लिया था।

कोई टिप्पणी नहीं: