वारासिवनी में राज्य स्तरीय कृषि मेले का समारोह पूर्वक किया गया शुभारंभ
- आर्थिक समृध्दि के लिए किसान नई तकनीक के साथ जैविक खेती करें---श्री नीतिन गड़करी
वक्त के साथ दुनिया तेजी से बदल रही है। किसानों को भी समय के साथ बदलना होगा। किसानों को सम्पन्नता एवं समृध्दि के लिए नई तकनीक के साथ जैविक खेती की ओर आगे बढ़ना होगा। कृषि अपशिष्टों पर आधारित उद्योग लगाकर किसानों के लिए आय का अतिरिक्त जरिया पैदा करना होगा। तभी देश के किसान की माली हालत में सुधार होगा और देश तरक्की की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा। यह बातें राष्ट्रीय नेता एवं कृषि विचारक श्री नीतिन गड़करी ने आज वारासिवनी में राज्य स्तरीय कृषि मेले के शुभारंभ अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए कही। वारासिवनी में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि मेले के शुभारंभ अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, म.प्र. के कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, म.प्र. के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री रूस्तम सिंह, विधायक श्री के.डी. देशमुख, डॉ. योगेन्द्र निर्मल, श्रीमती नीता पटेरिया, जिला अंत्योदय समिति की उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा बिसेन, बोधसिंह भगत, श्री रामकिशोर कावरे, श्री रमेश भटेरे, कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजोरा, संचालक डॉ. डी.एन. शर्मा, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के उप कुलपुति डॉ. विजय सिंह तोमर, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री महेन्द्र ज्ञानी, बालाघाट रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री के.पी. खरे, कलेक्टर श्री बी. चन्द्रशेखर, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री तरूण राठी, अन्य गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।
कृषि अपशिष्ट पर आधारित उद्योग लगायें
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री गड़करी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में म.प्र. की सरकार ने किसानों के लिए अच्छा काम किया है और कृषि की विकास दर को देश में सर्वाधित 18 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। लेकिन किसानों के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। किसानों को नगदी फसलों के लिए प्रोत्साहित करना होगा। कृषि से निकलने वाले अपशिष्टों पर आधारित उद्योग लगाना होगा। उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती से दोहरा लाभ मिलता है। शक्कर बनने के बाद उसके अपशिष्ट से ऐथेनाल मिलता है। इसका उपयोग वाहनों में किया जा सकता है। इससे देश की विदेशी मुद्र की भी बचत होगी। धान की भूसी से राईस ब्रांड तेल का उद्योग लगाया जा सकता है।
केन्द्र सरकार की गलत नतियों से नुकसान
श्री गड़करी ने कहा कि किसानों की हालत अच्छी नहीं है। केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों द्वारा पैदा किया गया कपास, धान सस्ता मिलता है लेकिन इनसे बनने वाला कपड़ा, चावल मंहगा मिलता है। किसानों के उपयोग का खाद महंगा हो गया है। किसानों के द्वारा पैदा किये गये अनाज को रखने के लिए पर्याप्त गोदाम नहीं है। गोदामों के अभाव में अनाज सड़ जाता है। आज किसानों के हित में नीतियां बनाने की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान केन्द्र सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
गन्ने की खेती करें, गन्न मिल लगायें
श्री गड़करी ने कहा कि बालाघाट जिले के किसान गन्ने की खेती करें और जिले में शक्कर कारखाना लगाने का प्रयास करें। जब तक बालाघाट जिले में शक्कर कारखाना नहीं लग जाता तब तक बालाघाट जिले के किसानों का गन्ना महाराष्ट्र में स्थित उनकी मिलों द्वारा खरीदा जायेगा। उन्होंने कहा कि वे बालाघाट जिले में गन्ना मिल लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवायें देने भी तैयार है।
किसानों के लिए सबसे अच्छा कार्य कर रही है म.प्र. एवं छत्तीसगढ़ सरकार
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य के कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि म.प्र. एवं छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार देश में किसानों के लिए सबसे अच्छा काम करने वाली सरकार है। म.प्र. को गेहूं उत्पादन के लिए तो छत्तीसगढ़ को धान उत्पादन के लिए कृषि कर्मण पुरूस्कार मिला है। देश के किसर अन्य राज्य में किसानों को उनकी उपज पर बोनस नहीं दिया जा रहा है। लेकिन म.प्र. एवं छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार किसानों को बोनस दे रही है। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दे रही है। उन्होंने किसानों से कहा कि कोई भी किसान गेहूं एवं चावल की खेती कर करोड़पति नहीं बन सकता है। लेकिन गन्ना, उदरक एवं अन्य नगदी फसलों की खेती कर कम समय में करोड़पति बन सकता है। किसानों को परंपरागत खेती के स्थान पर कुछ नया करते हुए नगदी फसलों की खेती करना चाहिए।
गेहूं, दलहन, तिलहन उत्पादन में अग्रणी राज्य
कार्यक्रम के संयोजक म.प्र. शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने इस अवसर अपने संबोधन में आजादी के समय देश में पर्याप्त अनाज पैदा नहीं होता था। देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने हरित क्रांति लाने के लिए जय जवान-जय किसान का नारा दिया। इसके बाद देश में श्वेत क्रांति आई। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान का नारा दिया और किसानों को नई तकनीक के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में खेती को लाभ धंधा बनाने के लिए किसानों को अनेक सहूलियतें दी। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया। प्रदेश सरकार की नीतियों के कारण म.प्र. आज देश में सर्वाधिक गेहूं, तिलहन, दलहन उत्पादक राज्य बन गया है और उसे लगातार दो बार राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरूस्कार के लिए चुना गया है।
प्रगतीशील किसानों का सम्मान
वारासिवनी में आयोजित इस राज्य स्तरीय मेले में किसानों को नवीनतम कृषि तकनीक से परिचित कराने के लिए कृषि आदान एवं उपकरणों के अलग-अलग स्टाल लगाये गये है। इस मेले में अन्य जिलों से भी किसान आये है। कार्यक्रम में जैविक खेती कर किसानों को नई राह दिखाने वाले किसानों का सम्मान भी किया गया। इनमें पपिता की एक एकड़ की खेती से 25 लाख रु. कमाने वाले छिंदवाड़ा के किसान मधुसूदन ओकटे, एक एकड़ में 50 क्विंटल धान फसल लेने वाले शहडोल के दल्लू सिंह व दशरथ साहू, एक करोड़ रु. की अदरक बेचने वाले ओम ठाकुर, जैविक खेती करने वाले जियालाल रहांगडाले, मत्स्य पालन करने वाले ओमप्रकाश ठाकरे, सिवनी के विलास तिजारे को सम्मानित किया गया।
कृषि महाविद्यालय भवन का किया गया शिलान्यास
वारासिवनी में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि मेले में 80 करोड़ रु. की लागत से मुरझड़ में बनने वाले कृषि महाविद्यालय भवन का शिलान्यास अतिथियों द्वारा किया गया।
80 करोड़ के छात्रावास भवन का लोकार्पण
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई 80 करोड़ रु. की राशि से वारासिवनी कालेज के लिए नव निर्मित कन्या छात्रावास भवन का इस अवसर पर अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया।
गर्रा-नवेगांव सड़क के लिए भूमिपूजन
अतिथियों द्वारा वारासिवनी में गर्रा-नवेगांव बी.ओ.टी. योजना में बनने वाली सड़क निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। क्षेत्र की जनता लंबे समय से इस सड़क को बनाने की मांग कर रही थी।

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