बिहार : पहले अग्रज की और बाद में अनुज की भी मौत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 25 जनवरी 2014

बिहार : पहले अग्रज की और बाद में अनुज की भी मौत

bihar social death
पटना। पहले अग्रज की और बाद में अनुज की भी मौत हो गयी। सप्ताह भर के अंदर विकास कुमार ने पिता गनौरी मांझी और चाचा प्रहृलाद मांझी को खो दिया। पिता पटना में और चाचा पुनपुन में जाकर दम तोड़ा। मगर पटना में दोनों सहोदय भाइयों की दसवीं की गयी। दोनों अभावग्रस्त परिवार के हैं। इसके कारण दाह संस्कार के बदले गाढ़ दिये गये। 

एल.सी.टी.घाट मुसहरी में रहते हैंः उत्तरी मैनपुरा गा्रम पंचायत में स्थित एल.सी.टी.घाट मुसहरी में दुखित परिवार रहते हैं। स्व. चैतू मांझी और संयोगिया देवी के पुत्र गनौरी मांझी और प्रहृलाद मांझी हैं। गनौरी मांझी की शादी कलासो देवी के संग हुई है। दोनों के सहयोग से तीन बच्चे हैं। सबसे बड़का बेटा का नाम विकास कुमार है। उसके बाद पार्वती कुमारी है। छोटका का नाम सोनू कुमार है। पिता,मां और पुत्र रद्दी कागज चुनकर और बेचकर जीविकापार्जन करते हैं। पिता की मौत के बाद विकास कुमार (15 वर्ष ) के ऊपर बोझ आ गया है। अब मां और बेटा रद्दी कागज चुनने जाएंगे। विकास कुमार के चाचा प्रहृलाद मांझी की शादी गीता देवी के संग हुई है। दोनों के सहयोग से एक लड़का इशु कुमार है। 

कुछ दिन से बीमार थाः विकास कुमार की मां कलासो देवी कहती हैं कि उनके पति गनौरी मांझी को कुर्जी होली फैमिली अस्पताल के सामुदायिक स्वास्थ्य एवं ग्रामीण विकास केन्द्र के चिकित्सक से दिखाया गया था। रक्त जांच करने के बाद चिकित्सक ने बताया कि उसे कालाजार हो गया है। कालाजार से ही गनौरी मांझी की मौत 4 जनवरी,2014 हो गयी है। मतदाता प्रमाण पत्र में जे बी एक्स 7030752 के अनुसार 1.1.2004 में 30 साल का था। अब 40 साल का था। उसको गंगा किनारे रेत में गाढ़ दिया गया। उत्तरी मैनपुरा ग्राम पंचायत के मुखिया ने कबीर अत्येष्टि योजना के तरत राशि देने के लिए फार्म भरवा दिया है। इस समय प्रहृलाद मांझी और उनकी पत्नी गीता देवी उपस्थित थीं। 5 जनवरी को दूधमुंही करके प्रहृलाद और रीता देवी पुनपुन चले गये। 

पति और पत्नी पुनपुन चले गयेः पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में स्थित नौरीचक घर में गीता देवी चली गयी। पहले से रोगग्रस्त प्रहृलाद को दिखाया गया। दवा-दारू करने के बाद भी प्रहृलाद मांझी 10 जनवरी को दम तोड़ दिया। वह 35 वर्ष का था। वह भी रद्दी कागज चुनता था। इसको पुनपुन नदी के किनारे दफना दिया गया। दोनों गोतनी कम उम्र में ही विधवा बन गयी। दोनों मिलकर दसवीं कर लिये। वहां के मुखिया ने कबीर अत्येष्टि योजना के तहत पांच सौ रू. दिये हैं। 

पटना जिले के जिलाधिकारी महोदय से निवेदनः पटना जिले के जिलाधिकारी महोदय से आग्रह किया गया है। पटना जिले में मरने वाले महादलित मुसहर समुदाय के लोगों को दफनाया जा रहा है। जबकि सभी हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। इनको कबीर अत्येष्टि योजना से लाभान्वित नहीं करवाया जा रहा है। मुख्यमंत्री परिवार लाभ योजना से महरूम हो जाते हैं। असंगठित कामगार एवं षिल्पकार षताब्दी योजना के तहत लाभान्वित नहीं करवाए जाते हैं। व्यक्तिगत रूचि लेकर दिलवाने का कष्ट करेंगे। 




आलोक कुमार
बिहार 

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