नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) में 81 लाख 65 हजार रुपये के दवा घोटाले का मामला सामने आया है। न सिर्फ बाजार से ऊंची दर पर दवा की खरीदारी हुई, बल्कि कई दवाएं ऐसी भी खरीदी गईं, जिनकी कोई आवश्यकता नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग की पांच सदस्यीय जांच टीम ने इस घोटाले के राज खोले हैं।
राज्य सरकार ने मामले की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी है। निगरानी ने इस संबंध में एजी से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। विभागीय जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार 2008-09 के दौरान सोना ड्रग एजेंसी से सी अलार्म इमेज इंटेंसिफियर मशीन की खरीद 16 लाख, 40 हजार में की गई, जबकि इसका कोटेड प्राइस 8 लाख 5 हजार है। 57 दवाओं की खरीदारी काफी मात्रा में ऊंची दर पर की गई, जिससे राज्य सरकार को 32 लाख, 41 हजार, 232 रुपये की हानि हुई।
एनएमसीएच ने सोना ड्रग एजेंसी से 24 लाख, 18 हजार 500 रुपये में एक्सरे मशीन खरीदी, जबकि इसका क्वोटेड प्राइस 10 लाख, 95 हजार रुपये है। टेटनस की दवा टेटग्लोब 1000 की खरीदारी लोकल स्थानीय बाजार से 1440 रुपये प्रति वायल की दर से की गई, जबकि थोक भाव में 1500 रुपये प्रति वायल की दर से। टेटग्लोब 250 आईयू 400 वायल की आपूर्ति नहीं हुई, लेकिन उसका भुगतान कर दिया गया।
एम्फोटेरिसिन बी दवा की आपूर्ति केंद्र सरकार करती है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने 80 रुपये की दर से दो हजार वायल की खरीद की और जांच शुरू होने के बाद आनन-फानन में उसे फर्म को लौटा दिया। एक हजार डेक्सट्रॉज बोतल की खरीद 29 जुलाई 2008 को 91 हजार 312 रुपये में की गई। पुन: उसी विपत्र को पास कर एक लाख, 43 हजार 832 रुपये का भुगतान किया गया।
सात लाख की मशीन 16 लाख में खरीदी गई
कई दवाओं की हुई अनावश्यक खरीदारी
बिना दवा आपूर्ति के ही लाखों का भुगतान
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