बिहार : नियम-कानून और नीति को लागू करने की नीयत नहीं: सांसद - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

बिहार : नियम-कानून और नीति को लागू करने की नीयत नहीं: सांसद

bihar rural developmentदानापुर। बिहार की जनसंख्या 11 करोड़ हो गया है। इसमें आधी जनसंख्या गरीबों की है। दिनभर कमाने के बाद मजदूर भूखे रहने को बाध्य हैं। जब मजदूर के बच्चे दूध मांगते हैं। मां के स्तन में दूध नहीं  और न दूध खरीदने की राशि ही है। दूघ के बदले बच्चे को थप्पड़ मिलता है। और बच्चे रोते-रोते आंसू पीकर सो जाते हैं। यह स्थिति अपना बिहार का है। यहां नियम-कानून और नीति है। परन्तु नियम-कानून और नीति को लागू करने की नीयत नहीं है। कारण कि हिन्दुस्तान की पूंजी को इंडिया वालों की जेब में भरने की तैयारी चल रही है। 

गैर सरकारी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति का रजत जयंती समारोह के द्वितीय दिन सांसद रामकृपाल यादव ने आगे कहा कि समाज में व्याप्त गैर बराबरी को खात्मा करने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं होता है कि गुस्से से लाल होकर नक्सल की राह पर चलने को मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत और पार्टी तौर पर नक्सलवादी के खिलाफ हैं। सभी जगहों की राह बंद होने के बाद दूसरी राह नक्सल की ही ओर जाती है।

सांसद श्री यादव ने कहा कि गांवघर में आजादी के 66 साल के बाद भी सरकार ग्रामीण नागरिकों को न्यूनतम जरूरतों को पूर्ण करने में कौताही बरत रही हैं। वहीं गैर सरकारी संस्थाआों के साथ भी सकारात्मक रूख अख्त्यिार नहीं कर रही है। इसके परिणाम गांव से लोग शहर की ओर पलायन कर रहे हैं। पिछले 20 साल में शहर की आबादी बढ़ी है। अगर गांवघर में विकास की गंगा बहा दी जाती थी। तो सार्थक परिणाम सामने आता। परिणाम नहीं आने के कारण एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष और गांधीवादी विचारक पी.व्ही.राजगोपाल के द्वारा गांवघर की ओर चलो अभियान का ऐलान कर रखा है। जो सही समय में सही कदम है।

इसके पूर्व आज सोमवार को दिनभर गांव की ओर चलों अभियान पर जोरदार चर्चा की जाती रही। इस चर्चा का लब्बोलुवाब यह है कि 25 साल पहले प्रगति ग्रामीण विकास समिति के द्वारा जो कार्य गांवघर में रहकर किया गया था। उसे सामाजिक कार्यकर्ता करना शुरू कर दें। ग्रामीणों के साथ मिलकर जन आधारित कार्य ,संस्था आधारित कार्य और सरकार आधारित कार्य को मजबूती के साथ करना है। गांधी और विनोबा जी के ग्राम स्वराज के सपना को साकार करना है। यह नारा गांव की समस्या को दूर करों, तब वोट लो। जमीन की समस्या का समाधान करों। गरीबों को कुचलने वाली नीति को खत्म करो। इंसान को सम्मान के साथ मानव की जिंदगी जीने का अधिकार दो।

एकता परिषद संचालन समिति की सदस्य मंजू डुंगडुंग, सिंधु सिन्हा, वी.के.सिन्हा.विजय गौरेया, प्रदीप प्रियदर्शी,उमेश कुमार,पुष्पा लकड़ा, चन्द्रशेखर , अजय मांझी आदि ने विचार व्यक्त किए।




आलोक कुमार
बिहार 

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