तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को निमंत्रित किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। मोदी सोमवार को शपथ लेंगे। तमिलनाडु की अन्य पार्टियों एमडीएमके और डीएमके ने भी राजपक्षे को निमंत्रित किए जाने का विरोध किया है, जबकि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस कदम का समर्थन किया है। डीएमडीके और पीएमके ने इस मामले में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जयललिता ने गुरुवार को यहां एक बयान जारी कर कहा, "हमें उम्मीद थी कि केंद्र में बनने वाली नई सरकार की तमिलों के प्रति हमदर्दी होगी और वह तमिलनाडु के प्रति दोस्ताना रवैया रखेगी।" उन्होंने आगे कहा, "यहां तक कि नए प्रधानमंत्री और उनकी नई सरकार के कामकाज शुरू करने के पहले ही श्रीलंका के राष्ट्रपति को निमंत्रित करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे तमिलनाडु की जनता गहरे आहत हुई है। यह कदम तमिल भावना के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।"
उन्होंने कहा कि राजपक्षे को निमंत्रित करने का निंदनीय कदम नहीं उठाया जाना खास तौर से नई सरकार का तमिलनाडु की सरकार के साथ बेहतर संबंध के लिहाज से कहीं बेहतर होता। विरोध करने वालों में भाजपा के सहयोगी एमडीएमके महासचिव वाईको भी शामिल हैं। यहां मीडिया को जारी किए गए मोदी को लिखे पत्र में वाईको ने कहा है कि राजपक्षे को शपथ ग्रहण में बुलाया जाना उनके लिए भारी झटके की तरह है।
उन्होंने कहा, "आंखों में आंसू और करबद्ध होकर आपसे यही विनती कर रहा हूं कि आप राजपक्षे को शपथ ग्रहण में हिस्सा लेने से रोकिए और तमिलों को भरोसा दिलाइए। भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों, जिन्होंने पिछले 10 वर्षो से श्रीलंकाई तमिलों के हितों के साथ छल किया है उन्होंने आपको राजपक्षे को निमंत्रित करने की गलत सलाह दे दी।"

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