हरीश रावत सरकार पर गहराए संकट के बादल,डैमेज कंट्रोल में जुटे मुख्यमंत्री - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 19 मई 2014

हरीश रावत सरकार पर गहराए संकट के बादल,डैमेज कंट्रोल में जुटे मुख्यमंत्री

harish rawat
देहरादून,19 मई,(राजेन्द्र जोशी)। उत्तराखंड में मोदी इफेक्ट का असर दिखने लगा है। चुनावी दंगल के मैदान में बीेजेपी से बुरी तरह पिटी कांग्रेस में एक दूसरे पर हमला करने का सिलसिला शुरू हो गया है। जबकि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी सरकार बचाने के लिए हर समझौता करने के लिए तैयार देखे जा रहे है। मोदी इफेक्ट की पहली गाज गिरी है भाजपा नेता सतपाल महाराज की पत्नी और हरीश सरकार में कैबिनेट मंत्री अमृता रावत पर। अमृता रावत को मुख्यमंत्री ने अपनी कैबिनेट से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इस घटना से अमृता रावत और हरीश खेमे में चल रहा शीत युद्ध अब खुले मैदान में आ गया है। 

अपनी बर्खास्तगी के तुरंत बाद अमृता रावत ने मुख्यमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने दिल्ली में आनन फानन में बुलाई गई प्रेसवार्ता में उत्तराखंड में कांग्रेस की हार की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पर डाली। उन्होंने कहा कि हरीश रावत ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को गुमराह कर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन कराया। हरीश रावत ने सोनिया गांधी से राज्य की पांच में से तीन सीटें दिलाने का वादा किया था लेकिन अब कांग्रेस पांचो सीटों पर बुरी तरह से हार गई है इसलिए हार की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री को लेनी चाहिए और उनको तुरंत अपना त्यागपत्र सौंप देना चाहिए। अमृता रावत ने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का बखान किया। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उनको बर्खास्त कर पूरे देवभूमि की महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश के सबसे अधिक वायु यात्रा करने वाले सीएम है वे देहरादून से हरिद्वार भी राज्य सरकार के हेलीकाॅप्टर से जाते है। हालांकि उनका अगला कदम क्या होगा यह उन्होंने नहीं बताया।

उधर भाजपा के 30 में से 2 विधायको के सांसद चुने जाने के बाद कुछ राहत महसूस कर रहे ताजा घटनाक्रम से मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुश्किले बढ़ती दिख रही है। हालांकि मुख्यमंत्री को चुनाव में पार्टी की हार के बाद आने वाले संकट का पूरा अहसास था शायद इसीलिए उन्होंने चुनाव परिणाम आने का भी इंतजार नहीं किया और 15 मई को अपने और विजय बहुगुणा के समर्थक 7 विधायको को संसदीय सचिव का दर्जा दे दिया। सातो विधायको को संसदीय सचिव बनाने के बाद सतपाल महाराज खेमे के विधायको में विरोध की चिंगारी उठने लगी थी जिसे शांत करने के लिए सीएम ने रविवार को 10 और विधायको को अलग अलग जिम्मेदारी देकर खुश कर दिया। अब सरकार में शामिल कुल 40 विधायको में से 34 को विभिन्न दायित्व और मंत्रीमंडल में स्थान मिल चुका है। जैसे ही हरीश रावत को लगा कि सतपाल महाराज गुट के विधायक अब संतुष्ट है और वे सरकार का साथ नहीं छोड़ेंगे तो उन्होंने तुंरत अमृता रावत को बर्खास्त कर दिया। 

कांग्रेस सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री भले ही अपनी सरकार बचाने के लिए सारे कीलकांटे दुरूस्त कर रहे है लेकिन कांग्रेस के अन्दर से जिस तरह की  चिंगारी फूटने की सूचना मिल रही है उससे मुख्यमंत्री को ज्यादा दिन चैन की सांस लेना मुश्किल है। उधर विजय बहुगुणा खेमे में भी चुनाव परिणाम को लेकर सीएम के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इस खेमे का मानना है कि हरीश रावत ने तीन सीटें जिताने का वादा कर विजय बहुगुणा की कुर्सी छीनी थी अब जब उनके नेतृत्व में चुनाव हुआ और वे उसमें असफल हो गए तो उनका अपना पद छोड़ देना चाहिए। 

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