हिमाचल में वीरभद्र सिंह के खिलाफ बगावत के सुर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 22 मई 2014

हिमाचल में वीरभद्र सिंह के खिलाफ बगावत के सुर

virbhadra singh
शिमला,  22 मई (विजयेन्दर शर्मा) । हिमाचल प्रदेश के सी एम वीरभद्र सिंह के खिलाफ अपनी ही पार्टी के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है।  कांग्रेस में मौजूद उनके नेतृत्व को चुनौती देने वाले नेताओं ने अब  अब आरपार की लड़ाई लडऩे का र्फैसला ले लिया है।  पार्टी के आला नेतृत्व को दो टूक कह दिया गया है कि अबकी बार नेता को नहीं बदला तो हिमाचल से भी कांग्रेस की सरकार का पत्ता साफ हो जायेगा।  हांलाकि अपनी सफाई देने के लिये वीरभद्र सिंह भी पिछले दो दिनों से दिल्ली में हैं। लेकिन विरोधी कांग्रेस नेताओं ने भी अपना अंदोलन तेज कर दिया है। यही वजह है कि सारा राजनैतिक परिदृशय दिल्ली शिफट हो गया है। पार्टी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के स्वास्थय मंत्री ठाकुर कौल सिंह को भी दिल्ली बुलाया गया है।  कौल सिंह  को वीरभद्र सिंह का विकल्प माना जाता रहा है। वहीं पार्टी अध्यक्ष ठाकुर सुखविन्दर सिंह भी दिल्ली रवाना गये हैं।  

राज्य सभा सदस्य विप्लव ठाकुर एवं पार्टी की राष्टरीय सचिव आशा कुमारी ने वीरभद्र सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला है। कांग्रेस पार्टी के ज्यादातर लोग इस हार के लिये वीरभद्र सिंह को ही दोषी मान रहे हैं।  कहा जा रहा है कि चुनावों में पार्टी संगठन को दरकिनार कर वीरभद्र सिंह ने अपनी पसंद के लोगों को टिकट दिलाये। मंडी से जहां अपनी पत्नी प्रतिभा सिंह को मैदान में उतारा, वहीं हमीरपुर से कुछ दिन पहले भाजपा छोड़ कांग्रेस में आये राजेन्दर राणा को टिकट दे दिया, उसके बाद उनकी पत्नी को सुजानपुर विधानसभा उपचुनावों में उतारा गया। शिमला से मोहन लाल ब्राक्टा व कांगड़ा से चंदर कुमार भी वीरभद्र सिंह की ही पसंद थे। सब लोग चुनावों में बुरी तरह हारे।   लेकिन अब वीरभद्र सिंह हार को दोष पार्टी के मत्थे मढ़ रहे हैं। यह बात पार्टी के एक धड़े को रास नहीं आ रही। दरअसल कांग्रेस के अंदर भी वीरभद्र सिंह के प्रति पहले ही अंसतोष है।   विधायक राकेश कालिया व  राजेश धर्माणी पहले ही सरकार से मुंह फुलाये बैठे हैं। वह उन्होंने मुख्य संसदीय सचिव  पद से इस्तीफा दे दिया है।  विरोधी खेमें में बनीखेत की विधायक  आशा कुमारी की सक्रियता भी वीरभद्र सिंह के लिये सुखद नहीं मानी जा सकती।  

विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर  व परिवहन मंत्री जी एस बाली भी सी एम के खिलाफ गाहे बिगाहे ताल ठोकते रहे हें।    प्रदेश के कांग्रेस नेताओं की दलील है कि अगर जल्द ही प्रदेश में वीरभद्र सिंह की जगह नया नेता नहीं बनाया गया तो भाजपा जोड़तोड़ करेगी।  कहा जा रहा है कि वीरभद्र सिंह के खिलाफ पहले ही अदालतों में कई मामले चल रहे हैं। सरकार बनने के बाद सी बी आई भी उनके  खिलाफ जांच तेज करेगी। वहीं विधानसभा में  भी कांग्रेस के पास संख्या बल कम होता जा रहा है। उसके पास 68 सदस्य वाले सदन में मात्र 35 सदस्य हैं। स्पीकर के अलावा एक कांग्रेस सदस्य जेल में है, उसकी सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है।  कांग्रेस को पांच निर्दलीय सदस्य बाहर से समर्थन दे रहे हैं।  जबकि भाजपा के एक सदस्य का ईजाफा हुआ है। उनकी तादाद 29 हो गई है।  कांग्रेस नेताओं को लगता है कि पांच निर्दलीय विधायक बदले राजनैतिक महौल में पाला बदल सकते हैं।  दरअसल केन्द्र में मोदी की सरकार बनने के बाद भाजपा आक्रामक हो गई है।  भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल पहले ही कह चुके हैं कि वीरभद्र सिंह सरकार को जाना होगा।  उन्होंने दावा किया है कि कुछ कांग्रेस विधायक उनके संपर्क में हैं।

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