उत्तराखंड की विस्तृत खबर (20 मई) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 मई 2014

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (20 मई)

कहीं एक और मंत्री तो नहीं है निशाने पर 

देहरादून, 20 मई (राजेन्द्र जोशी)। उत्तराखण्ड में बहुमत से दूर रहने वाली कांग्रेस को पीडीएफ विधायकों ने सहारा देकर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनवाई थी। सरकार के पूर्व मुखिया विजय बहुगुणा लगातार यहीं दावा करते रहे कि वह गठबंधन धर्म निभाएंगे लेकिन लोकसभा की पांचों सीटों पर हार के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी सरकार बचाने के लिए सभी राजनीतिक गोटियां खेलने शुरू कर रखी है। जहां उन्होंने अपने घोर विरोधी सतपाल महाराज की पत्नी को कैबिनेट मंत्री से बर्खास्त किया, वहीं उन्होंने अब सतपाल महाराज के करीबी माने जाने वाले पीडीएफ अध्यक्ष पर कांग्रेस की हार का गुस्सा निकालने के लिए उन्हें मंत्रीमंडल से हटाने का पूरा मन बना लिया है और राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर सुगबुगाहट है कि मुख्यमंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को मंत्रीमंडल से बाहर कर बसपा के विधायक सरवत करीम को कैबिनेट मंत्री की कुर्सी सौंप सकते है। आने वाले चंद समय के भीतर ही अगर नैथानी को मंत्रीमंडल से बाहर कर दिया गया तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। क्योंकि हरीश रावत कांग्रेस की हार के चलते अपने उन सभी विरोधियों को निशाने पर लेने का मन बना चुके है जो उनकी राजनीतिक विरासत में खतरा हो सकता है। सवाल यह भी उठ रहे है कि आखिरकार मुख्यमंत्री की पत्नी की हार का जिम्मेदार कौन  है और उसके खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा? उत्तराखण्ड में ढाई वर्ष पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 33 व भाजपा को 32 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। सरकार बनाने के आंकड़े से पिछड़ने वाली कांग्रेस ने जोड़तोड़ की राजनीति करते हुए निर्दलीय विधायकों के साथ-साथ उक्रांद व बसपा विधायकों का भी समर्थन ले लिया था। जिसके चलते कांग्रेस अपने आपको राज्य में मजबूत महसूस करने लगी। वहीं मंत्री प्रसाद नैथानी को पीडीएफ का अध्यक्ष बना दिया गया जोकि अपने विधायकों को मजबूत करने के लिए हमेशा सरकार से रार लेते रहे। अब लोकसभा चुनाव की पांचों सीटें हारने का ठीकरा प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत पर फोड़कर उन्हें बीते रोज मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया था। वहीं अपनी सरकार को बचाने के लिए अब हरीश रावत ने पीडीएफ अध्यक्ष मंत्राी प्रसाद नैथानी को अपने निशाने पर रखा हुआ है और राजनीतिक गलियारों मंे चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आने वाले एक दो दिन में संभवतः मंत्री प्रसाद नैथानी की भी मंत्रीमंडल से विदाई हो सकती है और उनके स्थान पर बसपा कोटे के विधायक सरवत करीम को मंत्राीमंडल में शामिल कर सीएम अपनी कुर्सी बचाने के लिए एक बार फिर एक बड़ा गेम खेल सकते है? गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस के दिग्गज नेता सतपाल महाराज ने हरीश रावत से 36 के आंकड़े के चलते पार्टी को अलविदा कहकर भाजपा का दामन थाम लिया था। जिसके बाद से ही यह सुगबुगाहट शुरू हो गई थी कि आने वाले कुछ समय के भीतर हरीश रावत सतपाल महाराज के करीबियों को अपने निशाने पर ले सकते है। लोकसभा चुनाव में अपने दम पर पांचों सीटें जिताने का दावा करने वाले हरीश रावत को उस समय जमीन दिख गई जब कांग्रेस पांचों सीटें लाखों के अंतर से हार गई थी। अपनी हार का ठीकरा अपने ही विरोधियों पर फोड़ने के लिए हरीश रावत ने पहले अपनी कुर्सी को बचाने के लिए सात ससंदीय सचिव, दस विधायकों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजने के बाद अमृता रावत को मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर टिहरी विधायक दिनेश धनै को कैबिनेट मंत्री बना दिया। पीडीएफ में प्रीतम पंवार व दिनेश धनै को मजबूत करने के बाद अब हरीश रावत का गुस्सा सतपाल महाराज के करीबी मंत्री प्रसाद नैथानी पर कभी भी उतर सकता है और अगर उन्हें मंत्रीमंडल से बाहर कर दिया गया तो सतपाल महाराज एक बड़े विरोध के साथ हरीश रावत की कुर्सी को हिलाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा सकते है? कुल मिलाकर जिस तरह से हरीश रावत अपनी कुर्सी बचाने के लिए रेवडि़यों की तरह पद बांटने में लगे हुए है उसको लेकर भाजपा का यहीं कहना है कि हरीश रावत की सरकार किसी कीमत पर नहीं बच पाएगी। लेकिन हरीश रावत सरकार के भविष्य को लेकर कतई भी आशंकित नजर नहीं आ रहे हैं।

विकास का मांग पत्र सौपेंगे प्रधानमंत्री को: हरीश रावत

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देहरादून, 20 मई,(निस)। उत्तराखण्ड के सीएम अपनी कुर्सी बचाने के लिए जहां राज्य में उठापठक की राजनीति करते हुए नजर आ रहे है। वहीं देश में मोदी के नेतृत्व में बनने जा रही सरकार से हरीश रावत को आशा है कि केन्द्र में उत्तराखण्ड के विकास के काम जो भी लटके हुए है, उन्हें उत्तराखण्ड के पांचों भाजपा सांसद पूरा कराएंगे और वह जल्द प्रधानमंत्राी से मिलकर उन्हें राज्य के विकास से संबंधित एक मांग पत्र सौंपेंगे। हरीश रावत ने जिस तरह से आज एक और राजनीतिक कार्ड खेलते हुए उत्तराखण्ड के विकास के लिए मोदी सरकार के पाले में गेंद फेंकी है उसको लेकर भाजपा के कई नेता हरीश रावत का गेम प्लान मान रहे हैं। मंगलवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सचिवालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उत्तराखण्ड से भाजपा के पांचों सांसदा ेंको जीत के लिए बधाई दी है और कहा कि तत्कालीन केन्द्र सरकार के कार्यकाल में उत्तराखण्ड के विकास को लेकर जो काम अधूरे रह गए थे, उसे उत्तराखण्ड के पांचों सांसद जल्द पूरा कराएंगे। ऐसी उनकी पूरी आशा है। उन्होंने वह उत्तराखण्ड के विकास का एक डाॅक्यूमेंट जल्द प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास लेकर जाएंगे और उन्हें बताएंगे कि उत्तराखण्ड के विकास के लिए केन्द्र ने जो योजनाएं स्वीकृत की हुई थी उसे जल्द पूरा किया जाए, जिससे कि उत्तराखण्ड का विकास हो सके। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि हरीश रावत ने यह बयान एक राजनीतिक गेम प्लान के तहत दिया है और वह राज्य के विकास के लिए खुद ऊंचाई की सीढ़ी पर चढ़ना चाह रहे है तथा राज्य के विकास के लिए पैसा वह उत्तराखण्ड के पांचों सासंदों के माध्यम से लाना चाहते हंै।

राष्ट्र, धर्म और राजनीतिः डा. विनोद बब्बर

देहरादून, 20 मई,(निस)। हाल ही संपन्न हुए लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए। एक गरीब परिवार के बच्चा का देश के सर्वाधिक शक्तिशाली पद तक पहुंचना दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की शक्ति है। आज सारी दुनिया कभी चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को मिली इस आशातीत सफलता पर हैरान है  लेकिन कुछ अपनो को यह ‘हजम’ नहीं हो रहा है। इसीलिए वे इस अभूतपूर्व निर्णय को छोटा साबित करने के बहाने तलाश रहे है। असफलता की भविष्यवाणियां की जा रही है। आश्चर्य है कि अपने परस्पर विरोधी आंकलनों के कारण वे स्वयं उपहास का पात्र बन रहे हैं पर होंठों पर जनता-जनार्दन के फैसले को नकारने का दुस्साहस है, कुटिल मुस्कान है। ऐसे लोग जो स्वयं को धर्मनिरपेक्षता का ध्वज वाहक बताते नहीं थकते, इस बार उनके तमाम प्रयास उस समय असफल हो गए जब मोदी के विरूद्ध अल्पसंख्यकों के मन में खौफ पैदा कर अपने ध्रवीकरण नहीं करा सके। इमाम को अपने पक्ष में मतदान की अपील करवाने वालों को अपनी करनी का उल्टा फल मिला जब क्रिया के बाद प्रतिक्रिया हुई और बहुसंख्यक समाज में ध्रुवीकरण हुआ। परिणाम सामने है अतः आतंक के चुनाव में धर्म के नाम पर समाज के न बंटने पर खिन्न है। एक नेत्री ने तो एक सम्प्रदाय विशेष  को इसलिए कोसा है कि उन्होंने उस नेत्री के दल को अपना समर्थन नहीं दिया इसलिए उनकी संसद से उपस्थिति ही नहीं रही। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के एक घोर साम्प्रदायिक मंत्री मुसलमानों के बीजेपी के झांसे में आने की शिकायत करते नजर आ रहे है जबकि एक पत्रकार मित्र जीत को फीकी करने के लिए कहते हैं, ‘देश में 543 चुनाव क्षेत्र थे लेकिन मोदी ने वाराणसी को ही चुना जहां मंदिर-मस्जिद विवाद हैं। यह धर्म के राजनैतिक इस्तेमाल की उनकी मानसिकता दर्शाता है।’ बिहार में अपनी करनी का फल सामने पर मुख्यमंत्री जी जो दीवार पर लिखी अपनी हार को भी नहीं पढ़ सके पर जनता के फैसलें की व्याख्या करते हुए इसे धर्म और राजनीति के घालमेल का परिणाम बता रहे है। ऐसे में आवश्यक है कि हम धर्म और राजनीति के संबंधों पर स्वस्थ्य बहस करें। यह विशेष रूप से समझना होगा कि जिस यूरोप को हमारे तथाकथित आधुनिक लोग आदर्श के रूप में प्रस्तुत करते हैं वहाँ भी राजनीति और धर्म अलग नहीं है। पिछले दिनों ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अपने धार्मिक विश्वास की चर्चा करते हुए कहा था कि वह एक प्रतिबद्ध ईसाई हैं और स्थानीय चर्च के दिखाए रास्ते पर चलकर उन्होंने भरपूर शांति और मदद पाई है।’ उन्होंने  चर्च टाइम्स से कहा कि ‘यह मेरी ईसाइयत ही है, जिसने मुझे लोगों की जिंदगी संवारने की कोशिश के लिए प्रेरित किया। जो लोग ‘धर्मनिरपेक्ष तटस्थता’ को अपनाते हैं, वे उसके नतीजे को समझने में नाकाम रहते हैं।’ वैसे  कैमरन पहले प्रधानमंत्री नहीं है। उनसे पहले  मार्गरेट थैचर ने 1985 में  सार्वजनिक रूप से अपनी धार्मिक आस्था को प्रकट किया।

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनेगा हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट

देहरादून, 20 मई,(निस)। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। मोबाइल मेडिकल यूनिट में सुधार किया जा रहा है। इसे आपदा राहत और ट्रामा सेवाओ के अनुकूल बनाया जा रहा है। मातृ शिशु सुरक्षा बीमा योजना में और अधिक सेवाओं को जोडा जा रहा है। बीजापुर राज्य अतिथि गृह के सभागार में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य कर रही विश्व बैंक के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विश्व बैंक के अधिकारियों से राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सहयोग की अपेक्षा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ग्रामीण आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार एवं आम आदमी तक इसकी सुलभता हमारे लिये एक चुनौती बनी हुई है। इसके लिये राज्य सरकार निरन्तर प्रयासरत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना तथा मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के क्रियान्यवन में तेजी लाने तथा सामुदायिक स्वास्थ केन्द्रों को और सुविधा युक्त बनाये जाने के लिये प्रभावी पहल करने की विश्व बैंक के अधिकारियों से उन्होंने सहयोग की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने विश्व बैंक के अधिकारियों से प्रारंभिक तौर पर राज्य के एक दो क्षेत्रों से स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास की योजना प्रारम्भ करने को कहा तथा उस पर पूरी तरह ध्यान दिया जाय। उन्होंने कहा कि योजना शत-प्रतिशत सफल हो इसके लिये राज्य सरकार किसी वित्त अधिकारी की तैनाती करेगी, ताकि योजना सम्बन्धी कार्यो को अमली जामा पहनाने में शीघ्रता हो सके तथा राज्य की जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सके। विश्व बैंक के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी प्रदेश के 2700 स्थानों पर इंटरनेट सेवाओं की योजना है। स्वास्थ्य की बेहतर हेल्पलाइन 104 और टेलीमेडिसिन को भी हेल्थ सिस्टम में उपयोग करने की योजना है। आपदा से निपटने के लिए क्षमता विकास। निजी क्षेत्र की सहभागिता। वल्र्ड मिशन के साथ वार्ता। विभिन्न सेक्टरों के मध्य समन्वय। अनुश्रवण प्रणाली। क्षमता विकास आपदा से निपटनेे की तैयारी। पीपीडी मोड में प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाएं सेवाओं की उपलब्धता से संबंधित विषय भी उनकी कार्य योजना में शामिल है। ऊन की योजना इस क्षेत्र में 100 मिलियन यू.एस.डाॅलर के वित्तीय सहयोग की योजना है। इस अवसर पर राज्य सरकार की ओर से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओमप्रकाश एवं निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम व अपर परियोजना निदेशक(यू़़केएचएसडीपी) डा. प्रेम लाल तथा विश्व बैंक की ओर से उनके सैक्टर मैनेजर सुश्री जूली मैकलाफिन, वरिष्ठ स्वास्थ विशेषज्ञ डा. सोमिल नागबल, स्वास्थ विशेषज्ञ सुश्री अबेयाह अलोमायर, सुश्री फैडरीका सेक्की, सलाहकार सचिन भोकाडे, अंगद करान्डे उपस्थित थे।

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