कूड़ा पाटने से रोकने का उठाया बीडा, अभियान के पहले दिन जुलूस निकालकर जनजागरण करने के बाद वरुणा के किनारों पर जगह-जगह वृक्षारोपण भी किया गया
हमे गन्दा जल नही, गंगा जल चाहिए, वरुणा असि को गटर बनाना बंद करो, नदियों में कूड़ा डालना बंद हो आदि गगनभेदी नारों के बीच सामाजिक संगठन साझा मंच ने संकल्प लिया है कि वह वरुणा में कूड़ा पाटने वालों को न सिर्फ सबक सिखाएंगे, बल्कि सफाई भी करेंगे। अभियान के पहले दिन जुलूस निकालकर जनजागरण किया गया। जुलूस में शामिल प्रेरणा कला मंच की टीम द्वारा गाये गए जनवादी गीतों के माध्यम से जनचेतना की कोशिश की गयी। कार्यकर्त्ता साथ में पीपल, नीम, कदम्ब, अर्जुन, बरगद आदि के पौधे भी लेकर चल रहे थे। जुलूस समापन के बाद इन पौधों को द्वारा शास्त्री घाट के सामने की तरफ से पुल से कूड़ा गिराए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के उद्देश्य से सफाई कर के रोपित किया गया। इसके अलावा रस्सी बाँध कर पौधों को सुरक्षित करने की कोशिश की गयी। मंच के कर्ताधर्ता वल्लभाचार्य पाण्डेय ने बताया कि इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर गंगा के उद्धार के लिए प्रतिदिन विभिन्न चर्चाएँ हो रही हैं। नई-नई परियोजनाओं पर विचार-विमर्श चल रहा है। लेकिन करोड़ों लोगों की आस्था व जीवनदायिनी बनी वरुणा का जिक्र तक नहीं हो रहा। ऐसे में सई, गोमती व बसूही को भूल जाना अव्यवहारिक है। इन नदियों के संरक्षण और निर्मलता के बिना गंगा के निर्मलीकरण की बात करना बेमानी है। जिन नदियों ‘वरुणा’ और ‘असि’ के नाम पर वाराणसी नाम का उद्भव हुआ हो, वे दोनों नदियाँ आज गटर जैसी स्थिति में क्यों तब्दील हो रही।
श्री पांडेय ने बताया कि इस स्थिति से चिंतित सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने आज वरुनापुल स्थित पर बैठक की। साझा संस्कृति मंच द्वारा आयोजित इस बैठक में वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। कहा गया कि आने वाले दिनों में गंगा, गोमती, वरुणा आदि नदियों के लिए हजारो करोड़ की परियोजनाएं आएँगी, जिससे निस्संदेह इन नदियों का मूल स्वरूप प्रभावित होगा और कार्पोरेट घरानों को लाभ पहुचेगा। वरुणा नदी पर बने पुलों से खुले आम कूड़ा डम्प किया जा रहा है, जो अंततः गंगा में ही पहुंचता है। शास्त्री घाट (कचहरी) के सामने की तरफ नदेसर की और से पुल से लगातार कूड़ा गिराया जा रहा है। कुछ इसी तरह की स्थिति पुराने पुल के पास, नक्की घाट और सर्व सेवा संघ परिसर, राजघाट के बगल में भी है। स्थिति भयावह होती जा रही है और सरकारी विभाग एवं जिम्मेदार लोग परियोजना बनाने और संगोष्ठियों के आयोजन में लगे हुए हैं। संत कबीर प्राकट्य स्थल का लहरतारा तालाब जिसका ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है की दुर्दशा पर भी चिंता व्यक्त की गयी। श्री पांडेय ने कहा कि आगे अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार के कार्यक्रम किये जायेंगे। स्थानीय लोगों ने इन पौधों की देख रेख के लिए सहयोग देने का आश्वासन दिया है। बैठक में प्रशासन और मुख्यमंत्री को इस सम्बन्ध में एक ज्ञापन प्रेषित करने का निर्णय लिया गया, जिसमे निम्न मांगे शामिल है-
वाराणसी नगर में वरुणा और असि नदियों पर स्थित सभी पुलों के दोनों तरफ लोहे या तार की जाली द्वारा बैरिकेटिंग की व्यवस्था की जाय जिससे इन नदियों में किसी प्रकार का कूड़ा न डाला जा सके. (जैसा लखनउ में गोमती नदी पर किया गया है)
‘असि’ और ‘वरुणा’ नदियों के उदगम से संगम तक सभी अतिक्रमण और अवरोध हटाए जाय और बसे लोगों को पुनर्वासित किया जाय
कूड़ा एकत्र करने का स्थान ऐसी जगह पर हो जिससे किसी भी तरह नदियों का जल न प्रभावित हो
इन नदियों में गिरने वाले सभी नाले और गटर को शोधन प्रणाली से जोड़ कर यह सुनिश्चित किया जाय कि प्रदूषित पानी किसी भी परिस्थति में नदी में न पहुंचे
अंत में लगभग 70 लोगों के हस्ताक्षर से युक्त अलग अलग ज्ञापन पंजीकृत डाक द्वारा मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त व नगरायुक्त को भेजा गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से फादर आनंद, डा नीति भाई, ड़ा आनंद तिवारी, डा आरिफ, वल्लभाचार्य पाण्डेय, प्रेम प्रकाश, विनय सिंह, नन्दलाल मास्टर, डा मुनीजा रफीक ,राजकुमार पटेल , धनञ्जय त्रिपाठी, रवि सोनकर, गिरसंत कुमार, विकास, ज्ञान वती, विवेकानंद, सूरज पाण्डेय , प्रदीप सिंह , वैभव पाण्डेय, दिलीप मौर्या, डा राजेश श्रीवास्तव, राजेश पहल, महजबीं, मीरा देवी, जियाउद्दीन सिद्धिकी, दिलीप मौर्या, कमलेश यादव, अरुणा सरोज, अखिलेश प्रताप, गजानंद जोशी, किरन आदि ने भागीदारी की।
(सुरेश गांधी )
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