बिहार की नदियों का जलस्तर कम जरूर हुआ है, लेकिन बाढ़ की स्थिति बरकरार है। बिहार के 800 से ज्यादा गांव अब भी बाढ़ में डूबे हुए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि राज्य की प्रमुख नदियों के उफान में कमी आई है। बिहार के सुपौल, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, पश्चिम चंपारण, मधुबनी, नालंदा और सीतामढ़ी जिलों सहित दूसरे कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य में करीब 14 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पटना स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक, बिहार की सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी देखी जा रही है, हालांकि कई क्षेत्रों में नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
नियंत्रण कक्ष में प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता भोला शरण ने गुरुवार को बताया कि कोसी नदी के वीरपुर बैराज में जलस्तर में कमी आई है और गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बैराज में भी जलस्तर कम हुआ है। उन्होंने बताया कि वाल्मीकिनगर में गंडक का जलस्तर सुबह 10 बजे 1.63 लाख क्यूसेक था और अपराह्न् 12 बजे घटकर 1.58 लाख क्यूसेक हो गया। इधर, बागमती नदी बेनीबाद में, कमला बलान नदी झंझारपुर में तथा बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।
उत्तर बिहार के पश्चिम चंपारण, दरभंगा के घनश्यामपुर और गोपालगंज के डुमरिया में बाढ़ का पानी अब भी जमा है। इस वर्ष नालंदा जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। नालंदा के 15 प्रखंडों में बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। जिले के 400 से ज्यादा गांवों की करीब साढ़े सात लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। यहां 144 नौकाओं की मदद से लोगों को सहायता पहुंचाई जा रही है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का पानी कम हुआ है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ ) की आठ टीम लोगों की सहायता के लिए तैनात की गई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 108 राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनमें 40 हजार से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं।

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