प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रौद्योगिकी को 'वास्तविक शक्ति' करार देते हुए कहा कि दुनिया का नेतृत्व करने के लिए भारत को इस क्षेत्र में आगे रहने की जरूरत है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक कार्यक्रम में मोदी ने कहा, "दुनिया तेजी से बदल रही है और इतनी ही तेजी से युद्ध एवं रक्षा के मानदंड भी बदल रहे हैं। ऐसे में प्रौद्योगिकी वास्तविक शक्ति बन गई है।" उन्होंने कहा, "मैं इसे बड़ी चुनौती के रूप में देखता हूं कि समय से पहले हम अपना काम कैसे पूरा करें। यदि दुनिया किसी काम को वर्ष 2020 में पूरा करेगी, तो हम इसे 2018 तक करें।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी काम की परिकल्पना 1992 में हो और 2014 में कोई कहे कि इसे पूरा होने में कुछ समय और लगेगा।" उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को दुनिया के लिए एजेंडा बनाना चाहिए। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "भारत की भौगोलिक स्थिति अनूठी है। हम दशकों से अशांत पड़ोसियों के बीच रह रहे हैं और हम इसे बदल नहीं सकते।" उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को अपने कार्यो को शीघ्र निपटाकर निर्यात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने डीआरडीओ में युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए कहा कि वैज्ञानिकों को कुछ समय के लिए विश्वविद्यालयों से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि छात्रों के लिए उदाहरण स्थापित हो सके। प्रधानमंत्री ने कहा, "आइये हम इस क्षेत्र में विश्वविद्यालयों की पहचान करें और फिर वैज्ञानिकों को उससे जोड़ें। इससे छात्रों को मदद मिलेगी।" उन्होंने कहा कि युवाओं की क्षमता के इस्तेमाल के लिए डीआरडीओ को 35 वर्ष तक की आयु के सभी वैज्ञानिकों के लिए एक प्रयोगशाला का निर्माण करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने डीआरडीओ सम्मान भी दिया। डीआरडीओ के शोध व विकास मामलों के पूर्व मुख्य नियंत्रक दीपांकर बनर्जी को मेटलर्जी, मटीरियल विज्ञान और युद्धक विमान कार्यक्रम में योगदान देने के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारतीय वैज्ञानिकों के काम की सराहना करते हुए मोदी ने कहा, "हमारे वैज्ञानिक प्रयोगशाला में कड़ी मेहनत करते हैं। वे बहुत कुछ बलिदान देते हैं और इसके बाद ही वे कुछ ऐसा लेकर सामने आते हैं, जो पूरी मानव जाति के हित में होता है।"

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