नेपाल में भूस्खलन से नदी जाम, 8 मरे, बिहार में अलर्ट - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 2 अगस्त 2014

नेपाल में भूस्खलन से नदी जाम, 8 मरे, बिहार में अलर्ट




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नेपाल में शनिवार को हुए एक भूस्खलन में आठ व्यक्तियों की मौत हो गई। बड़ी मात्रा में मिट्टी और चट्टानों के टूटकर नीचे आने से सुनकोशी नदी अवरुद्ध हो गई। नेपाल में उत्पन्न स्थिति को देखते हुए बिहार में कोशी क्षेत्र के सुपौल, सहरसा, पुर्णिया और मधेपुरा जिलों में बाढ़ की चेतावनी दी गई है।  नेपाल से मिली जानकारी के मुताबिक, भूस्खलन में एक छोटा गांव भी मलबे के नीचे दफन हो गया है और कम से कम 150 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

शनिवार तड़के लगभग दो बजे हुए भूस्खलन के बाद सिंधुपालचौक जिले में यह नदी में एक विशाल झील बन गई है। यह स्थान काठमांडू से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है।  ऐसी आशंका है कि अवरुद्ध पानी जब छोड़ा जाएगा, तो नेपाल व भारत के बिहार में भयानक बाढ़ आ सकती है। नेपाल के गृह मंत्रालय ने सुनसरी जिले के स्थानीय प्रशासन से कोशी बराज के 56 फाटक खोल देने का आग्रह किया है। 

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव यादव कोईराला ने कहा, "जलस्तर में भारी वृद्धि का बराज पर असर पड़ सकता है, लिहाजा हमने कोशी बराज के फाटक खोलने का निर्देश दिया है।" कोईराला आपदा प्रबंधन का कामकाज भी देखते हैं। नेपाल के गृह मंत्रालय ने भी प्रभावित इलाकों में आपात स्थिति की घोषणा कर दी है और जान-माल की क्षति रोकने के लिए भारत व चीन से मदद मांगी है। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता गणेश के.सी. ने कहा कि प्रशासन जन निकासी के लिए एक नियंत्रित विस्फोट करने की कोशिश कर रहा है।

भूस्खलन के कारण मनखा वीडीसी में बांध स्थल पर अरनिको राजमार्ग जाम हो गया है जिससे नेपाल को चीन से जोड़ने वाले मार्ग पर यातायात अवरुद्ध हो गया है। सिंधुपालचौक जिले में बारहबिशे, लामेसंघु, खादीचौर और दोलालघाट गांवों के अलावा आसपास के अन्य इलाकों के निवासी इस भय से ऊंचाई वाले स्थानों पर चले गए हैं कि अवरुद्ध नदी का पानी किसी भी समय छूट सकता है। मुख्य जिला अधिकारी गोपाल प्रसाद पाराजुली ने कहा, "प्रशासन नदी का अवरुद्ध मार्ग खोलने और प्रवाह को बहाल करने के लिए नेपाल सेना के एक हेलीकॉप्टर से बम गिराने पर विचार कर रहा है।"

इस बीच प्रधानमंत्री सुशील कोईराला ने गृह मंत्रालय को अवरुद्ध नदी से नियंत्रित तरीके से जल छोड़ने की संभावना तलाशने और जान-माल की हिफाजत के लिए कदम उठाने का प्रयास करने का निर्देश दिया है।  इधर बिहार सरकार ने कोशी क्षेत्र के सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और पुर्णिया जिलों को सचेत कर दिया है तथा कोशी तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों को ऊंचे स्थान पर भेजने का काम शुरू कर दिया है।  

बिहार के जल संसाधन विभाग के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने शनिवार को बताया कि सुबह नेपाल सरकार द्वारा सूचना दी गई है कि काठमांडू से करीब 100 किलोमीटर दूर भूस्खलन हुआ है। इस कारण नेपाल की सुन कोशी नदी में जल प्रवाह रुक गया है।  चौधरी ने कहा कि पानी निकासी शुरू होने के बाद कोशी के जलस्तर में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर सभी कदम उठाए जा रहे हैं।  आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ब्यास जी ने बताया कि आशंका है कि कोशी नदी का जलस्तर करीब 10 मीटर ऊंचाई तक बढ़ सकता है। 

उन्होंने बताया कि सुपौल में मुख्यालय बनाकर सभी बाढ़ संभावित जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ ) की टीम भेज दी गई है तथा तटबंध के आसपास बसे लोगों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि बिहार के लोग 18 अगस्त, 2008 को बिहार-नेपाल सीमा पर कुसहा बांध टूटने से कोशी में आई बाढ़ की त्रासदी को अभी तक भूल नहीं पाए हैं। छह वर्ष पूर्व कोशी में आई बाढ़ से बिहार के 247 गांव तबाह हो गए थे और 217 लोगों की मौत हो गई थी तथा आठ लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित हुई थी। 

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