कोसी त्रासदी : जांच रिपोर्ट में आयोग ने दिए कई सुझाव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 2 अगस्त 2014

कोसी त्रासदी : जांच रिपोर्ट में आयोग ने दिए कई सुझाव




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कुसहा तटबंध टूटने के बाद कोसी नदी में आई प्रलंयकारी बाढ़ के बाद गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में सरकार को कई सुझाव दिए हैं तथा कई अनुशंसाएं भी की हैं। पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त मुख्य न्यायाधीश राजेश वालिया की अध्यक्षता में गठित 'कोसी बांध कटान न्यायिक जांच आयोग' ने अपनी 758 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि बीरपुर यूनिट सहित कटाव और बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के लिए बड़े अनुभवहीन और अक्षम अभियंता तैनात थे। रिपोर्ट शुक्रवार को बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों में रखी गई।

आयोग ने अनुभवी अभियंता को तैनात करने तथा ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को तकनीकी तौर पर प्रशिक्षण देकर टास्क फोर्स तैयार करने के सुझाव दिए हैं। जल संसाधन विभाग में संविदा पर अभियंताओं की नियुक्ति नहीं करने की सलाह देते हुए जांच आयोग ने कहा है कि योग्य अभियंताओं को ही नियुक्ति की जानी चाहिए। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जल संसाधन विभाग के मॉनिटरिंग सेल में ऐसे व्यक्तियों को तैनात किया गया था जिन्हें क्षेत्र में कार्य करने का कोई अनुभव ही नहीं था। आयोग का मानना है कि मानीटरिंग सेल में ऐसे लोगों की नियुक्ति की जानी चाहिए जिन्हें क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष कार्य करने का अनुभव हो। 

आयोग ने यह भी माना है कि कुसहा तटबंध के कटाव के दौरान मॉनिटरिंग सेल और खराब प्रबंधन के कारण समस्या बढ़ी। कटाव निरोधक कार्य और बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में दूरस्थ नियंत्रण प्रणाली का उपयोग नहीं होना भी समस्या को बढ़ाया। आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि गलत तरीके से कटाव निरोधक कार्य हुए। बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में त्रुटियां थीं। इसके कारण तटबंध सुरक्षित नहीं रहे और इसके टूटने के बाद इतनी बड़ी आपदा से बिहार राज्य को गुजरना पड़ा। 

गंगा बाढ़ आयोग और कोसी उच्चस्तरीय समिति ने वर्ष 2007 के बाद कटाव निरोधक कायरें की मॉनिटरिंग नहीं की थी, जबकि उसका दायित्व बिन्दुवार परीक्षण और क्षेत्र में तैनात अभियंताओं को उचित निर्देश देना था। आयोग ने बाढ़ संघर्षात्मक कार्य और नदी अभियंत्रण कार्य में विशिष्टता के लिए विशेष प्रकार के स्वतंत्र प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना करने का सुझाव दिया है। अभियंताओं को बाढ़ से तबाही मचाने वाली देश-विदेश की नदियों का भ्रमण करने की भी बात जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कही है। 

उल्लेखनीय है कि 18 अगस्त, 2008 को बिहार-नेपाल सीमा पर कुसहा बांध टूटने से कोसी में आई बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया था। इस बाढ़ से बिहार के 247 गांव तबाह हो गए थे। 217 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि आठ लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित हुई थी। इसके बाद सरकार ने तटबंध टूटने के मामले में एक जांच आयोग का गठन किया था।

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