- बाहुबलि विधायक के दवाब में पुलिस ने दर्ज की गैंगरेप रपट
- मेडिकल जांच रिपोर्ट में अब पीड़िता के दो माह गर्भवती होने की पुष्टि से पुलिस महकमा से लेकर साजिसकर्ताओं तक की नींद हराम
- जांच में पीड़िता का कई महिनें पहलेे सेे चल रहा था लवअफेयर
- आरोपियों की सीमेंस परीक्षण के बाद डीएनए टेस्ट कराने में जुटेगी पुलिस
- जांच पूरी हुए बगैर किसी भी दशा में नहीं होगी गिरफतारी: एसपी
- झूठी रपट दर्ज कराने का पहले भी बाहुबलि विधायक कर चुके है प्रयास: पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय
उत्तर प्रदेश भदोही में नौ दिन पहले हुए कथित सामूहिक गैंगरेप के मामले में पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में गर्भवती होने की बात सामने आने पर पुलिस महकमा सेे लेकर साजिसकर्ताओ के पैरों तले जमीन खिसक गयी है। खासतौर से पूरे मामले की कहानी गढ़ने वाले बाहुबलि विधायक विजय मिश्रा, जो जनपद में अब तक 1000 से अधिक लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर अपनी माफियागिरी चमकाने में महारत हासिल कर चुके है, को करारा तमाचा तो लगा ही है एक बार फिर मोहनलालगंज की तर्ज पर सरकार की किरकिरी होने लगी है। लोगबाग इस घटनाक्रम की भी सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उधर? बाहुबलि विधायक विजय मिश्रा के दचाब में जनपद में ताबड़तोड़ दर्ज हो रहे फर्जी मुकदमें से पीड़ितों को न्याय दिलाने वाले व सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों सहित आम नागरिक खौफ की जिंदगी जी रहे है। अगला टारगेट कौन होगा, लोग कयास लगाने लगे है। काफी लोग तो हर क्षण अपना डाटा साक्ष्यों के साथ रख रहे है, पता नहीं कब पुलिस किसी मामले में फंसा दें। लोगों का कहना है, विधानसभा चुनाव तक तो यूपी के लोगों को घुट-घुटकर दहशतभरी जिंदगी जीने की आदत डाल लेनी ही चाहिए, क्योंकि अगर किसी के साथ कुछ हो जायेगा तो न्याय मिलने से रहा।
शनिवार को पीड़िता द्वारा काफी हंगामा मचाने के बाद जिला न्यायालय के मजिस्ट्रेट द्वितीय फरीदा बेगम की अदालत में में 164 के तहत मजिस्टेटियल बयान दर्ज किया गया। हंगामें के दौरान न्यायालय के बाहर पीड़िता चीख-चीखकर दुहाई दे रही थी कि उसे दवाब बनाकर बयान दर्ज करानेे के लिए कहा जा रहा है। हालांकि पीड़िता की मेडिकल परीक्षण के बाद पुलिस ने दुष्कर्म की पुष्टि तो कर दी है, लेकिन संख्या में बारे में कुछ कहने से इनकार कर दिया है। सूत्र बतातेे है कि मेडिकल परीक्षण में पीड़िता के गर्भ में दो माह का बच्चा पल रहा है। और घटनाक्रम से पहले जब इसकी जानकारी पीड़िता के पिता को लगी तो 25 जुलाई को दोपहर में जमकर धुनाई कर दी। इससे आक्रोशित पीड़िता ने जहर खा ली। जहर खा लेने के बाद बेेहोशी हालात परिवारीजनों ने उसे एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। तब तक इसकी जानकारी पूरे गांव में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। इसी बीच किसी करीबी ने घटनाक्रम की जानकारी बाहुबलि विधायक विजय मिश्रा को दे दी। फिर क्या प्रदेश में आम हो चली गैंगरेप की घटना को इससे जोड़ते हुई पूरी पटकथा लिख डाली और परिवारीजनों पर अपने प्रभाव का दबदबा बनाकर रटी-रटाई भाषा बोलने के लिए हामी भरवा ली। जब मामला पूरी तरह प्लान में तब्दील हो गया तो अपनी पत्नी रामलली मिश्रा के साथ पीड़िता को जिला अस्पताल पहुंचाया। बात कैसे फैलाई जाएं और पुलिस पर दवाब कैस बने इसका मीडिया का सहारा लिया गया। पूरी प्लानिंग व रटी-रटाई भाषा की पटकथा सुबह एक अखबार में भी छप गई। खबर इलेक्टानिक मीडिया में कैसे चले, इसकी भी कंमान लोगों ने संभाल ली। शाम तक वह भी दो-चार चैनलों में प्रशारित भी हो गई। लेकिन दाद देनी पड़ेगी जिले के इकलौते पुलिस कप्तान को जो अपनी जांच रिपोर्ट पर अड़े रहे, भले ही मुकदमा दर्ज करवा दी, लेेकिन सबूत इकठ्ठा होने तक गिरफतारी न करने का ऐलान कर दिया।
बता दें, प्रकरण में पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के लड़के का नाम आने पर मामला हाई प्रोफाइल हो जानेे से पुलिस शुरुवाती दौर से ही काफी सतर्कता बरत रही है। पुलिस अधीक्षक सुभाष दुबे ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होेने व दोष साबित हो जाने के बाद ही गिरफतारी होगी। अब तक के जांच रिपोर्ट में पुलिस इस तथ्य तक पहुंची है कि पीड़िता व आरोपी पिन्टू सिंह के बीच काफी महिने पहले से प्रेम-प्रपंच चल रहा था। पीड़िता के परिवारीजनों के विरोध के बाद भी दोनों का एक-दुसरे से अच्छा संबंध होने की बात कहीं जा रही है। पीड़िता व उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान कर दी गई है। हो सकता है बाहुबलि विधायक इसी का फायदा उठाकर काफी दिनों से पूर्व सांसद से चल अदावत का कसर निकालने के लिए अच्छा मौका समझे हो। पीड़िता को बाहुबलि विधायक की पत्नी रामलली मिश्र द्वारा जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाना व पुलिस पर दवाब बनाने को लोगबाग इस षडयंत्र का एक हिस्सा भी बता रहे है। सूत्रों की मानें तो पिन्टू सिंह व पीड़िता का लवअफेयर सार्वजनिक हो चुकी थी। इसकी जानकारी बाहुबलि तक उनके करीबियों ने जब पहुंचाई तो उन्हें अपने दुष्मन को ठेकाने लगाने का अच्छा मौका मिल गया। फिर पीड़िता के परिवारीजनों को विश्वास में लेकर जो खेला खेला गया उसका भी पर्दा जल्दी ही उठने वाला है।
भदोही के कोइरौना इलाके के शिवदासपुर-डगडगपुर के प्राथमिक विद्यालय में 25 जुलाई को घटित कथित गैंगरेप की घटना के मामले में पहली अगस्त को शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के पुत्र आनंद पाण्डेय और उनके तीन साथी पिंटू सिंह, विकास मिश्रा, रिंकू सिंह पर धारा 376डी, 328, 506 के तहत रपट दर्ज की। पीड़िता दवाब में है या घटनाक्रम सही बता रही है यह तो जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही खुलासा हो पायेगा। लेकिन आज भी लोगबाग में सवालों की झड़ी के बाद घटनाक्रम गले के नीचे नहीं उतर रहा था। लोगबाग का कहना है कि अगर तबीयत ज्यादा खराब थी तो उसे कायदे से अच्छे अस्पताल में इलाज कराना चाहिए था। अगर झोलाछाप चिकित्सक ने इलाज किया तो उसने इस गंभीर प्रकरण पर पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। अगर परिवारीजन आरोपियों से इतने भयभीत थे तो एक सप्ताह बाद कौन सी इनर्जी मिल गयी जो सीधे पूर्व सांसद के बेटे आदि का नाम लेने लग गयी। जबकि पीड़िता जिस गांव की है वहां काफी प्रभवशाली लोग है। ग्रामीणों से चर्चा करने पर बताया गया कि पीड़िता का पिन्टू सिंह से काफी दिनों से अफेयर चल रहा है। दोनों कई बार बाहर भी चले जाते थे। देर से लौटने पर पीड़िता की मां उसे कई बार डाटा-फटकारा भी है। 25 जुलाई को भी जमकर मारा पीटा था।
बाहुबलि विधायक विजय मिश्रा से पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय की राजनीतिक दुश्मनी तो चुनाव केे दौरान से ही थी। लेकिन गहरा उस वक्त जब वर्ष 2002 के चुनाव में पुर्नमतदान के दौरान बाहुबलि विधायक सहित अन्य ने श्री पांडेय के भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हालांकि डे-लाइट इस मर्डर से अपने तीन-तिकड़म से धिायक बरी हो गए थे, लेकिन दुश्मनी तो बरकरार रहा। श्री पांडेय इस मामले में अभी सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट का चक्कर लगा रहे है। उसी कड़ी में सत्ता में जलवा बनने के बाद बाहुबलि विधायक ने कुछ माह पहले इसी तरह की बलातकार की एक झूठी रपट दर्ज कराने की भरपूर कोशिश की, लेकिन जांच में तथ्य सही न आ पाने पर मामला खत्म हो गया। खासकर श्री पांडेय के बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हो जाने से बाहुबलि विधायक की धड़कने तेज हो गयी है। हो सकता है कि एक साजिस के तहत षडयंत्र रचा गया हो कि श्री पांडेय कि इस प्रकरण में न सिर्फ छबि खराब होगी बल्कि उलझन भी बढ़ जायेगी और गेम आगे चलता रहेगा।
---सुरेश गांधी---

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