20 सदी के प्रारम्भ में जन्म और मृत्यू दर दोनों अधिक थीं लेकिन भारत में 1960 और 1970 के दषक में जनसंख्या विस्फोट हुआ। इस दौरान मृत्यू दर में अचानक कमी आई लेकिन जन्म दर उच्च ही बनी रही। भारत की जनसंख्या जो 1950 में थी इस अवधि में उससे दुगुनी हो गयी । तब लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया गया कि वह अपने परिवार का आकार घटाएं। उस वक्त एक विषेश अभियान जैसे की ‘‘हम दो, हमारे दो’’ चलाया गया जिसका उद्देष्य लोगों को छोटे परिवार की वांछनियता पर ध्यान केन्द्रित करना था। सरकार की ओर से जनसंख्या नियंत्रण के लिए चलाए गए जागरूकता अभियानों से काफी हक जनसंख्या पर नियंत्रण किया जा सका है। लेकिन बावजूद इसके आज भी हमारे देष की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है। भारत दूनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देष है। भारत की जनसंख्या इस वक्त 1 अरब 27 करोड़ के आस पास है। देष के दूसरे राज्यों की तरह जम्मू एवं कष्मीर में भी जनसंख्या विस्फोट बहुत तेज़ी से हो रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू एवं कष्मीर की जनसंख्या तकरीबन 1.25 करोड थी जो 2001 की जनसंख्या 1.01 करोड़ से बहुत ज़्यादा है। 2011 की जनसंख्या के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या 12,541,302 थी जो 2001 में 10,143,700 थी। भौगोलिक स्थिति अत्यंत जटिल होने के बावजूद भी जम्मू प्रांत के पुंछ जि़ले में भी जनसंख्या विस्फोट बहुत तेज़ी से हुआ।
भगवान ने इंसान को सोचने और समझने की ताकत दी है। यही वजह की आज इंसान का पूरी दूनिया पर राज और दबदबा कायम है। बढ़ती हुई जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों के रिष्ते के बीच आपसी संबंध को सबसे पहले थाॅमस माल्थस ने ‘‘।द म्ेेंल वद ज्ीम च्तपदबपचसम व िच्वचनसंजपवद’’ में प्रतिपादित किया था। माल्थस ने बताया था कि जनसंख्या ज्यामितीय तरीके से बढ़ती है जैसे-1, 2, 4, 16, 32, 64, 128, 256 आदि जबकि भोजन व अन्य प्राकृतिक संसाधन अंकगणितीय तरीके से जैसे-1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 आदि। इसी के चलते जनसंख्या, भोजन और प्राकृतिक संसाधनों के बीच में अंतर पैदा हो जाता है। हिंदुस्तान समेत पूरी दूनिया में बढ़ती हुई आबादी एक संगीन समस्या बनती जा रही है। जम्मू एवं कष्मीर में हर साल 11 जुलाई से 24 जुलाई तक स्वास्थ्य और परिवार नियोजन विभाग की ओर से बढ़ती हुई जनसंख्या पर काबू पाने के उद्देष्य से अस्पतालों, षहरों, कस्बों और गांवों में जागरूकता कैंपों का आयोजन किया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लोगों में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देष्य से भारी भरकम पैसा खर्च किया जा रहा है। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार दोनों का मानना है कि लोगों में जागरूकता पैदा करके ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
केंद्र सरकार का स्वास्थ्य और परिवार नियोजन विभाग और जम्मू एवं कष्मीर का स्वास्थ विभाग लोगों में परिवार नियोजन की जानकारी पहुंचाने में काफी हद तक कामयाब हुआ है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है। 11 जुलाई 1987 में विष्व की जनसंख्या 5 अरब हुई थी तब से लेकर इस विषेश दिन को विष्व जनसंख्या दिवस घोशित कर हर साल एक याद और परिवार नियोजन का संकल्प लेने के दिन के रूप में मनाया जाता है। जनसंख्या दिवस घोशित हो जाने के बाद से दूनिया के सारे देष बढ़ती हुई जनसंख्या पर चिंता व्यक्त करने लगे हैं और इस खास दिन विभिन्न देषों की सरकारें, स्वास्थ विभाग, सरकारी और गैर सरकारी संगठन एकजुट होकर पूरी दूनिया में जागरूकता कैंपों का आयोजन करते हैं। इन जागरूकता कैंपों में बढ़ती हुई जनसंख्या के खतरों और छोटे परिवारों की अहमियत से लोगों को आगाह कराया जाता है। न्छथ्च्। इस मिषन पर काफी सरगर्म होकर काम कर रहा है। दूनिया भर में बढ़ती हुई जनसंख्या पर काबू पाने के लिए विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संगठन 2 सौ से ज़्यादा देषों में काम कर रहे हैं। यूनाइटेड स्टेट्स सेंसस ब्यूरों के सर्वे के मुताबिक पूरी दूनिया की कुल आबादी 7 अरब 2 करोड़ 3 लाख से ज़्यादा है। भारत और चीन पूरी दूनिया में दो ऐसे देष हैं जहां जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। इन दोनों देषों की वजह से ही अकेले एषिया की कुल आबादी 4.2 अरब के पास पहुंच गई है जोकि पूरी दूनिया की कुल आबादी का तकरीबन 60 प्रतिषत है।
एषियाई देष हिंदुस्तान, चीन, पकिस्तान, बांग्लादेष और श्रीलंका को चाहिए कि वह बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाने के लिए संजीदगी के साथ ज़रूरी कदम उठाए ताकि जनसंख्या विस्फोट विकास के आड़े न आए। ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने बढ़ती हुई जनसंख्या के बारे में कहा था कि दूनिया में 2013 तक भोजन, ऊर्जा और पानी की समस्या एक विकराल रूप धारण कर लेगी। स्थिति काफी हद तक कुछ इसी तरह की हो चुकी है। भारत ने अगर जल्द ही बढ़ती हुई जनसंख्या पर नियंत्रण न किया तो यहां भी लोगों की जिंदगी कठिन हो जाएगी। जनसंख्या विस्फोट की वजह से ही भोजन, बिजली, पानी और दूसरे प्राकृतिक संसाधन सभी लोगों तक नहीं पहुंच पर रहे हैं। देष के षहरी इलाकों में लोग परिवार नियोजन को तरजीह देने लगे हैं लेकिन तमाम सरकारी और गैर सरकारी प्रयासों के बावजूद ग्रामीण इलाकों तक परिवार नियोजन की जानकारी ठीक से नहीं पहुंच पा रही है। पूरी दूनिया इस वक्त बढ़ती हुई आबादी की रफ्तार पर चिंतन-मनन करने में लगी हुई है जोकि एक नेक षगुन है। जिस तरह से एक छोटा परिवार खुषी परिवार होता है ठीक उसी तरह से जिस मुल्क या राज्य की आबादी कम होती है वहां के लोग भी खुषहाल रहते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि हिंदुस्तान के द्वारा जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए की जा रही कोषिषें ज़रूर रंग लाएंगी।
तारीक अबरार
चरखा फीचर

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