बाढ़ का कहर झेल रहे जम्मू-कश्मीर के सीमांत जिले राजौरी और पुंछ के हालात का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि राज्य सरकार को योजनाबद्ध ढंग से पुनर्निर्माण और पुनर्वास करना चाहिए.
उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘हमें इस तबाही से सबक लेना चाहिए और योजनाबद्ध ढंग से पुनर्निर्माण और पुनर्वास करना चाहिए.’’ मुख्यमंत्री ने बाढ़ से मची तबाही का जायजा लेने के लिए गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू के साथ आज सुरनकोट तहसील और हवेली के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और पुंछ नदी से लगे इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया. उन्होंने सुरनकोट में डाक बंगला में सार्वजनिक बैठक की और बाढ़ पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा का आश्वासन दिया और राहत वितरण एवं अनिवार्य सेवा की बहाली की प्रक्रिया तेज करने का अधिकारियों को निर्देश दिया.
उमर ने बाढ़ के चलते शेर-ए-कश्मीर पुल और उससे लगे शंकर नगर के रिहायशी इलाकों में मची तबाही का भी जायजा लिया. मुख्यमंत्री ने गुज्जर और बकरवाल होस्टल में चल रहे जिला प्रशासन के राहत शिविर का भी दौरा किया और वहां का जायजा लिया. उन्होंने डीडीसी से कहा कि वह वहां मौजूद 400 से ज्यादा लोगों को भोजन, कंबल और अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करें.
पुंछ जिले में उमर ने जिला अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें जिला विकास आयुक्त :डीडीसी: एमएच मलिक ने उन्हें बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई जबकि 65 लोग घायल हुए. मुख्यमंत्री को बताया गया कि नदी के किनारे से विभिन्न जगहों से अब तक 20 शव बरामद किए गए हैं. उन्हें भूस्खलनों से गांवों को पहुंचे नुकसान की भी जानकारी दी गई. उन्हें संपत्ति, फसलों, मवेशियों और सड़कों, पुलों, जलापूर्ति प्रणालियों और विद्युत प्रतिष्ठानों को पहुंचे नुकसान की जानकारी दी गई.उमर ने जिला के विधायकों से कहा कि वह बाढ़ प्रभावितों के लिए उपलब्ध रहें. उन्होंने संकट से निबटने के जिला प्रशासन के सक्रिय और प्रभावी तरीकों की तारीफ की और आश्वासन दिया कि तमाम प्रभावित लोगों को पुनर्वास सुविधा प्रदान की जाएगी.
राजौरी जिले में उमर ने नौशेरा बस दुर्घटना के पीड़ितों के परिवार से मुलाकात की और शोक-संवेदना जताई. उन्होंने गुरूद्वारा में शरण लेने वाले बाढ़ प्रभावितों से भी मुलाकात की और उनकी शिकायतें सुनीं.

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