दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एच. एल. दत्तू को देश का अगला प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। रॉ की एक पूर्व महिला अधिकारी और वकील ने याचिका दाखिल कर दत्तू पर यौन प्रताड़ना का आरोप लगाया था। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग की खंडपीठ ने महिला की याचिका खारिज कर दी। महिला ने अपनी याचिका में न्यायमूर्ति दत्तू को प्रधान न्यायाधीश नियुक्त करने संबंधी राष्ट्रपति से की गई सरकार की सिफारिश निरस्त करने की मांग की थी।
खंडपीठ ने कहा, "एक बार जब राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है तो हम कुछ नहीं कर सकते। यह हस्तक्षेप का मामला नहीं है।" याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से मौजूद अतिरिक्त महाधिवक्ता संजय जैन ने महिला की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि राष्ट्रपति दत्तू को अगले प्रधान न्यायाधीश नियुक्त करने के संबंध में अपनी मंजूरी पांच सितंबर को दे चुके हैं। जैन ने यह भी कहा कि याचिका गंभीरता से विचार करने योग्य नहीं है और ऐसे में इस पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए।
51 वर्षीय महिला ने यौन प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए अपनी याचिका में कहा, "सरकार की ओर से न्यायमूर्ति एच. एल. दत्तू को प्रधान न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के लिए राष्ट्रपति को की गई अनुशंसा रद्द की जाए।" महिला ने आरोप लगाया है कि 2011 में जब वह कानून की छात्रा थीं, तब न्यायमूर्ति दत्तू ने उनके सभी अदालती मामलों की सुनवाई महिला के कार्यस्थल, सर्वोच्च न्यायालय में शुरू की। याचिका में कहा गया है, "उन्होंने (दत्तू) उसके बाद से उसका गंभीर रूप से यौन प्रताड़ना किया। जबकि सर्वोच्च न्यायालय के विशाखा दिशानिर्देश के तहत यदि कोई तीसरा पक्ष उसके साथ इस तरह की हरकत करता तो उससे रक्षा की जिम्मेदारी उनकी बनती थी।"
याचिका में कहा गया है कि न्यायमूर्ति दत्तू ने महिला के सभी मामले खारिज कर दिए और महिला ने उनके खिलाफ पुलिस, राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली महिला आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई। यह महिला रिसर्च एंड एनेलीसिस विंग (रॉ) में 1987 बैच की प्रथम श्रेणी की कार्यकारी काडर की अधिकारी थीं और उन्हें 2009 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति मिल चुकी है।

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