स्कॉटलैंड वासियों ने ब्रिटेन से अलग होने के लिए कराए गए जनमत सर्वेक्षण में आजादी के खिलाफ में मतदान किया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने स्कॉटलैंड में हुए जनमत संग्रह के बाद कहा कि अब समय आगे बढ़ने का है। शुक्रवार को घोषित जनमत संग्रह के नतीजों के अनुसार, अधिकांश स्कॉटलैंड वासी ब्रिटेन का हिस्सा बन कर रहना चाहते हैं। कैमरन ने स्कॉटलैंड की जनता के ब्रिटेन के साथ रहने के पक्ष में दिए गए मतदान के बाद कहा, "यह मामला कई पीढ़ियों तक के लिए सुलझ गया है। या जैसा कि स्कॉटलैंड के मंत्री एलेक्स सैलमंड ने एकबार कहा था 'जीवनभर के लिए।'
समाचार पत्र द गार्जियन के अनुसार, कैमरन ने कहा, "अब समय आगे बढ़ने का है। इस बंदोबस्त में संतुलन है, जो स्कॉटलैंड की जनता के पक्ष में और ब्रिटेन की शेष जनता के भी पक्ष में है।" कैमरन ने अपने भाषण के दौरान यह भी कहा कि वह स्कॉटलैंड को और अधिक अधिकार देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "ब्रिटेन एक ऐसा देश है, जहां ऐसे मुद्दे मतदान के जरिए शांतिपूर्ण रूप से सुलझ सकते हैं। अब समय अच्छे भविष्य के लिए आगे बढ़ने का है।" एडिनबर्ग शहर के मुख्य मतगणना अधिकारी मैरी पिटकैथी और सू ब्रस ने घोषणा की कि 55.42 फीसदी स्कॉटलैंड वासियों ने स्वतंत्रता के खिलाफ मत डाला और जबकि स्वतंत्रता के पक्ष में 44.58 फीसदी मत पड़े।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, कुल 84.48 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और मतगणना गुरुवार रात शुरू हुई। जनमत संग्रह ब्रिटिश निर्वाचन आयोग की निगरानी में हुआ। स्कॉटलैंड की सरकार द्वारा 26 नवंबर, 2013 को जारी किए गए श्वेत पत्र 'स्कॉटलैंड का भविष्य' के अनुसार, अगर आजादी के लिए सामान्य बहुमत मिल जाता तो यह 24 मार्च, 2016 को आजाद हो जाता। जनमत संग्रह के नतीजे आजादी के खिलाफ आने के बाद ब्रिटेन की तीन मुख्य पार्टियों के नेता यानी कंजरवेटिव के नेता व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, लेबर पार्टी के नेता एड मिलिबैंड और लिबरल डेमोक्रेट के नेता व उप प्रधानमंत्री निक क्लेग के वादे के अनुसार स्कॉटलैंड को और अधिक अधिकार दिए जाएंगे।
अक्टूबर 2012 में कैमरन और स्कॉटलैंड के प्रथम मंत्री व सत्तारूढ़ स्कॉटिश नेशनल पार्टी के नेता अलेक्स सैलमंड के बीच एडिनबर्ग समझौता हुआ था, जिसमें स्कॉटलैंड को 2014 में आजादी के लिए जनमत संग्रह कराने की मंजूरी दी गई थी। बीबीसी के अनुसार, जनमत संग्रह के दौरान स्कॉटलैंड के सबसे बड़े काउंसिल क्षेत्र और ब्रिटेन के तीसरे बड़े शहर ग्लासगो में 1,94,779 लोगों ने पक्ष में और 1,69,347 ने विरोध में मतदान किया। डुंडी, पश्चिम डनबार्टनशायर और उत्तरी लनार्कशायर में भी आजादी के पक्ष में मतदान हुए। देश की राजधानी एडिनबर्ग में विरोध में मतदान पड़े और 1,94,638 लोगों ने आजादी के खिलाफ मतदान किया।

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