बिहार : हड़ताल का फल, समान वेतनमान पाने का ख्याब पालने वाली सपना साकार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 18 सितंबर 2014

बिहार : हड़ताल का फल, समान वेतनमान पाने का ख्याब पालने वाली सपना साकार


  • संविदा पर बहाल 6758 नर्सेंस होगीं स्थायी, 38 जिलों के संविदा में कार्य करने वाली नर्सों को फायदा

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गया। आखिरकार 5 मरीजों की अकाल मौत हो गयी। जिस प्रकार सरकार ने हड़ताल पर जाने वाली नर्सों को की सुधि ली हैं। उसी तरह मृतक के परिजनों को भी सुधि लेनी चाहिए। कल्याणकारी राज्य के सरकार के नाते सीएम जीतन राम मांझी को 5 मरीजों के परिजनों को मुआवजा देना ही चाहिए। 

बताते चले कि बिहार ‘ए’ ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन एवं बिहार ‘ए’ अनुबंध परिचारिका संद्य ने मैदान-ए-जंग में उतरने के पहले सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इस ओर स्वास्थ्यम मंत्री रामधनी सिंह संवेदनशील नहीं हुए। इनके अविवेकता के कारण अन्ततः मानव सेवा करने वाली नर्सेंस ने दिल को कठोर करके 12 सितम्बर 2014 से बेमियादी हड़ताल करने को मजबूर हो गयीं।  

तब बिहार ‘ए’ ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन एवं बिहार ‘ए’ अनुबंध परिचारिका संद्य के संयुक्त तत्वावधान में पी. एम. सी. एच. एवं इन्दिरा गाँधी हृदय रोग संस्थान की नर्सेंस हड़ताल पर चली गयीं। मरीजों को मुस्कान बिखेड़कर तकलीफ पर मलहम लगाने वाली नर्सेंस कहती हैं। हमलोगों को हक चाहिए,भीख नहीं। हम ‘ए’ ग्रेड नर्सें किसी तरह की परीक्षा का विरोध करते हैं। हमलोगों को एकमुस्त सीधी नियुक्ति चाहिए। जहां पर सेवा कार्य कर रही हैं। वहीं पर स्थायी कर दिया जाए। 

संविदा में कार्यरत नर्सों का कहना है कि हमलोग एक ही तरह का कार्य करते हैं। और तो और एक ही जगह पर पदासीन हैं। नियमित और अनुबंध वाले एक ही नल का पानी पीते हैं। मगर यह क्या इनके और उनके वेतनमानों में आसमान और जमीन का फर्क है। ऐसा होने से अनुबंध पर कार्य करने वालों के न वर्तमान और न ही भविष्य ही सुरक्षित है। इसके आलोक में आठ साल से समान वेतनमान पाने का ख्याब पालने वाली पी.एम.सी.एच. की नर्सेंस हड़ताल पर चली गयीं। हड़ताल की चिंगारी गया और दरभंगा में भी प्रसार हो गयी। इसके कारण मरीजों का पलायन होने लगा। 5 मरीजों की अकाल मौत हो गयी। सरकार मृतक के परिजनों को मुआवजा प्रदान करें। 

बिहार ‘ए’ ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन एवं बिहार ‘ए’ अनुबंध परिचारिका संद्य की महामंत्री विथीका विश्वास और महासचिव प्रमिला कुमारी ने कहा कि हमलोग बिहार परिचारिका निबंधन परिषद के द्वारा आयोजित परीक्षा में उत्र्तीण होने वाली नर्सेंस हैं। बिहार सरकार के द्वारा संविदा पर नर्सेंस की बहाली की जाने लगी। बेकारी दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2000 में अगस्त माह में पी.एम.सी.एच. में बहाल किए गए। उस समय 6 हजार 500 रू. मानेदय दिया जाता था। तब से आजतक अस्पतालों एवं मेडिकल काॅलेजों में अपनी सेवा समर्पित करती आ रही हैं। आम अवाम की स्वास्थ्य सेवा कर रही हैं। यह सेवा आधुनिक नर्सिग की जननी फ्लोरेंस नाइटिगल की प्रेरणा से और उनके अधूरे सपना को साकार करने के लिए उनके बताए राह पर अग्रसारित हैं। 

इस बीच अनेक बार सरकार ने संविदा पर कार्यशील नर्सेंस को नियमित करने की घुटी पिलाती रही। लगातार आश्वासन देने के बाद भी सरकार नर्सेंस को नियमित करने की दिशा में पहल नहीं की। इसके आलोक में माननीय उच्च न्यायालय ने नियमित करने का आदेश प्रस्ताव पारित कर चुका है। जब चारों तरफ से असफल होने के बाद बेहाल नर्सेंस को राह दिखी। अपना हक की लड़ाई के लिए मैदान में उतर जाए। 

 पी.एम.सी.एच. में 2500 बेड है। वेतनमान वाले करीब 200 नर्सेंस हैं। संविदा पर करीब 606 नर्सेंस हैं। पी.एम.सी.एच. की 606, इन्दिरा गाँधी हृदय रोग संस्थान की 160 और एन.एम.सी.एच.की 200 संविदा वाली नर्सेंस हड़ताल में शामिल थीं। दरभंगा और भागलपुर की नर्सेंस हड़ताल पर चली गयी। आधी रात से मुजफ्फरपुर की नर्सों ने हड़ताल पर जाने वाली थीं। इस बीच सरकार और  बिहार ‘ए’ ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन एवं बिहार ‘ए’ अनुबंध परिचारिका संद्य की नेत्रियों के बीच में समझौता हो गयी। समझौता के अनुसार राज्य कमर्चचारी चयन आयोग के द्वारा 6758 नर्सों का अनुभव को ही साक्षात्कार माना जाएगा। उसी दिन से बहाल समझी जाएगी। इस तरह 38 जिलों के संविदा में कार्य करने वाली नर्सों को फायदा हो गया।  




आलोक कुमार
बिहार 

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