कोलकाता में टैक्सी चालकों पर पुलिस के कथित अत्याचार के विरोध में और टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग को लेकर गुरुवार को टैक्सी चालकों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से यात्रियों को एक बार फिर दिक्कतों का समाना करना पड़ा। अगस्त से लेकर अब तक टैक्सी चालकों की यह आठवीं हड़ताल है। टैक्सी चालकों के साथ-साथ सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन और आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) ने कैब चालकों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए शुक्रवार को परिवहन हड़ताल का आह्वान किया।
टैक्सी हड़ताल के कारण, शहर में ऑटो-रिक्शा, साइकिल रिक्शों के लिए लंबी कतारें देखी गई और बसें भी ठसाठस भरी दिखीं। कोई विकल्प न होने के कारण यात्रियों और पर्यटकों को निजी कार ऑपरेटरों को सामान्य से अधिक किराया देकर गंतव्य तक पहुंचने पर मजबूर होना पड़ा। सीआईटीयू नेता और पूर्व मंत्री अनादि साहू के मुताबिक, जब तक राज्य सरकार उनकी मांगे नहीं पूरी करती, तब तक टैक्सियां नहीं चलेंगी।
उन्होंने कहा, "टैक्सी का किराया आखिरी बार 2012 में बढ़ाया गया था। तब से पेट्रोल का दाम 13 बार बढ़ चुका है, लेकिन टैक्सी के किराए में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे टैक्सी चालक संकट में हैं।" विवाद की जड़ राज्य सरकार का एक फैसला है, जिसके तहत यात्री को मना करने पर जुर्माना 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया था। शहर में प्रतिदिन लगभग 37,000 टैक्सियां चलती हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें