उत्तराखंड की विस्तृत खबर (16 सितम्बर) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (16 सितम्बर)

खता उनकी और सजा अवाम को अमित ने चुकता किया उपचुनाव में हार का हिसाब-किताब

देहरादून,16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)।  भाजपा अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के तत्काल बाद ही उत्तराखंड उपचुनाव में मिली करारी हार को अमित शाह अभी तक पचा नहीं पाए हैं। उन्होंने इसका खुलासा भी खुले तौर पर ही किया है। उनका कहना है कि मोदी कैबिनेट में किसी को जगह न मिलने का कारण भी हार ही है। सवाल यह है कि अगर शाह को यहां के नेताओं से ही बदला लेना था तो उन्हें लालबत्ती क्यों दी गई। जाहिर हो रहा है कि शाह ने ऐसा करके उपचुनाव में हार दिलाने वाले उत्तराखंड के अवाम से अपना हिसाब चुकता कर लिया है।लोकसभा चुनाव में सूबे की पांचों सीटों पर जीत का परचम फहराने वाली भाजपा दो माह बाद ही तीन विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में औंधे मुंह जा गिरी। उस वक्त तक नरेंद्र मोदी के खास सिपहसालार भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन हो चुके थे। इसका जश्न खत्म भी नहीं हो पाया था कि उत्तराखंड में करारी हार हो गई। इससे कांग्रेस ने देशभर में यह संदेश देने की कोशिश की कि मोदी लहर खत्म हो गई है। जाहिर सी बात है कि इस स्थिति से अमित शाह को बड़ा धक्का लगा होगा। इसके बाद से ही लग रहा था कि मोदी कैबिनेट के विस्तार में उत्तराखंड के किसी सांसद को जगह नहीं मिलेगी और हुआ भी ऐसा ही। अलबत्ता तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों बीसी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल निशंक को लोकसभा की विभिन्न समितियों का अध्यक्ष बनाकर लालबत्ती समेत तमाम सुविधाएं जरूर दे दी गईं। अब उत्तराखंड में बतौर प्रदेश अध्यक्ष अपने पहले दौरे में अमित शाह कह रहे हैं कि हार की वजह से यहां के नेताओं को कैबिनेट में जगह नहीं मिली। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अमित की खुंदक उपचुनाव में हार दिलाने वाली उत्तराखंड की जनता से है या फिर धड़ेबाजी करने वाले स्थानीय नेताओं से। अगर उनका आक्रोश भितरघात और धड़ेबाजी करने वाले नेताओं से हैं तो उन्हें लालबत्ती क्यों दी गई। भले ही इन नेताओं को मंत्रिपरिषद में जगह नहीं दी गई है लेकिन तमाम सुविधाएं और सत्तासुख तो वैसा ही है। अगर किसी नेता ने भितरघात या फिर धड़ेबाजी करके भाजपा प्रत्याशियों को हराने में मदद की तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन होना चाहिए था। लेकिन ऐसा अब तक तो नहीं किया गया है। हां, दूसरे राज्यों के चुनाव के बाद संगठन में फेरबदल की बात जरूर की गई है। सवाल फिर भी वही है। अगर फेरबदल करना ही है तो तत्काल क्यों नहीं। दूसरे राज्यों के चुनाव पर यहां होने वाले फेरबदल का तो कई असर होने से रहा। हालात इशारा कर रहे हैं कि अमित शाह को हार से पैदा हुई खुंदक की असली वजह उत्तराखंड भाजपा के नहीं हैं। जाहिर है कि ऐसे में सवाल पैदा होता है कि तो फिर क्या है इसकी वजह। माना जा रहा है कि ताजपोशी के तत्काल बाद मिली करारी हार को शाह पचा नहीं पा रहे हैं और इसकी एकमात्र वजह उत्तराखंड की जनता को मान रहे हैं। जनता से अपना हिसाब चुकाने के लिए ही किसी स्थानीय नेता को कैबिनेट में नहीं लिया गया और नेताओं को संतुष्ट करने के लिए लालबत्तियां थमा दी गईं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगर उत्तराखंड से किसी को मोदी कैबिनेट में जगह मिलती तो उस नेता का फोकस अपने राज्य पर ज्यादा होता। मंत्री का प्रदर्शन कितना भी खराब क्यों न रहता उत्तराखंड के हिस्से में कुछ न कुछ तो केंद्रीय योजनाओं का हिस्सा अपेक्षाकृत ज्यादा रहता। मौजूदा हालात में कहा जा सकता है कि अमित शाह ने उपचुनाव में मिली हार का हिसाब-किताब उत्तराखंड की जनता से चुकता कर लिया है। हो सकता है कि आने वाले समय में उत्तराखंड को केंद्र की ओर ज्यादा उपेक्षा का सामना करने पड़े।

कांग्रेस की जिम्मेदारी और बढ़ी
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के उत्तराखंड दौरे के दौरान जो कुछ हुआ उससे कांग्रेस को सबक लेने की जरूरत है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और उत्तराखंड की जनता के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार के मुखिया हरीश रावत के पास है। भाजपा के मौजूदा रुख से लग रहा है कि उत्तराखंड के हिस्से में केंद्र सरकार का उतना सहयोग आएगा, जितना आना चाहिए। ऐसे में सरकार को और अधिक सतर्कता के साथ विकास कार्यों को तेज करना होगा।

एफआरआई पहुंची केन्द्रीय मंत्री उमा

uttrakhand news
देहरादून,16 सितम्बर(निस)। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती अपने उत्तराखंड भ्रमण के तहत मंगलवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) पहुंची, जहां उन्होंने संस्थान का भ्रमण करने के साथ-साथ अधिकारियों के साथ बैठक भी की। अपने उत्तराखंड भ्रमण के तहत केन्द्रीय मंत्री उमा भारती मंगलवार सुबह वन अनुसंधान संस्थान पहुंची, जहां उनका भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के महानिदेशक डा0 अश्वनी कुमार तथा वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा0 पदम् प्रकाश भोजवैद ने स्वागत किया। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने काष्ठ निर्मित दीक्षांतगृह, प्रकाष्ठ संग्रहालय एवं अकाष्ठ वन उपज संग्रहालय का भ्रमण किया। संस्थान भ्रमण के दौरान वह संस्थान के वास्तुशिल्प तथा यहां पर मौजूद सुविधाओं को देखकर अत्यधिक प्रभावित हुई। इस दौरान मंत्री महोदया को महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् एवं निदेशक, वन अनुसंधान संस्थान द्वारा परिषद् व संस्थान के कार्यकलापों की संक्षिप्त जानकारी दी गई। उन्होने संस्थान के शोध कार्यकलापों विशेषकर हिमालयन पारितंत्र के सम्बन्ध में रूचि दिखाई। बाद में अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए उन्होंने गंगा के संरक्षण के पारिस्थितिकीय एवं धार्मिक पहलुओं के सुधार में सहायता करने हेतु संस्थान की विशेषज्ञता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने परिषद् व संस्थान के अधिकारियों को हिमालयों एवं इसके लोगों की विभिन्न समस्याओं में संस्थान द्वारा निभाई जा रही भूमिका की सराहना की और गंगा नदी के प्रदूषण और अति दोहन किए गए पारितंत्र को सुधारने में ग्रामीण समुदायों को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होने औषधीय व सुरभित पादपों, उनके उपयोगिता परिवर्धन सहित के जरिए स्थानीय समुदायोन्मुखी विकास की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होने गंगा की गुणवत्ता और हिमालयन पारितंत्र के सुधार के लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के लिए वन अनुसंधान संस्थान का आह्वान किया। महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् एवं निदेशक, वन अनुसंधान संस्थान ने स्मृतिचिन्ह एवं शाॅल भेंट कर मंत्री महोदया का स्वागत किया।

एटीएम काट रहे तीन बदमाश मुठभेड़ के बाद दबोचे

देहरादून/रुद्रपुर ,16 सितम्बर(निस)। काशीपुर मार्ग पर पंजाब एण्ड सिंध बैंक के एटीएम को काटकर नगदी उड़ाने की कोशिश कर रहे तीन बदमाशों को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दबोचा। मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से जमकर फायरिंग हुई। एटीएम काट रहे बदमाशों से तमंचा, चाकू, एटीएम काटने के उपकरण, आल्टो कार व बाइक बरामद की गयी है। सोमवार को देर रात्रि काशीपुर मार्ग पर गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों को पंजाब एण्ड सिंध बैंक के एटीएम की लाइट बंद मिली। जब उन्हें संदेह हुआ तो वह एटीएम के समीप पहुंचे जहां बाहर एक आल्टो कार व पल्सर बाइक खड़ी थी जबकि भीतर से आवाजें आ रही थीं। इस पर पुलिसकर्मियों ने मामले की जानकारी तुरन्त कोतवाल अजय ध्यानी को दी उन्होने तुरन्त पुलिसकर्मियों को कोतवाली में बुलाया और फोर्स के साथ काशीपुर मार्ग पर बैंक के एटीएम की ओर रवाना हो गये जहां एटीएम के बाहर आल्टो कार संख्या यूके-04जे/9022 व पल्सर मोटरसाइकिल संख्या पीबी-46एल / 3569 खड़ी दिखायी दी। पुलिसकर्मियों ने एटीएम की घेराबंदी कर दी और एटीएम का दरवाजा खटखटाया तो भीतर से कुछ लोगों की आवाजें आयीं। अचानक एटीएम का दरवाजा खुला और वहां मौजूद बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायर झोंक दिया,  जिस पर पुलिस टीम ने भी पोजीशन ले ली और बदमाशों पर जवाबी फायरिंग की। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद पुलिस ने वहां मौजूद तीन बदमाशों को दबोच लिया। पुलिस ने उनके पास से 315 बोर का एक तमंचा, 5 जिंदा कारतूस, 1 खोखा, 2 चाकू, आॅक्सीजन सिलेंडर, एलपीजी सिलेंडर, गैस कटर, 2 रबर आदि सामान बरामद किया। पकड़े गये बदमाशों से जब पूछताछ की गयी तो उन्होंने अपना नाम पता ग्राम बन्नाखेड़ा बाजपुर निवासी जसपाल सिंह पुत्र सतनाम सिंह, ग्राम नगली थाना सगड़ जिला अमृतसर पंजाब निवासी अमरजीत सिंह पुत्र सुरेंद्र सिंह व पहाड़ी कालोनी बाजपुर निवासी खुशवंत सिंह पुत्रा भूपेंद्र सिंह बताया। पुलिस ने जसपाल के पास से तमंचा व पांच कारतूस जबकि अमरजीत व खुशवंत के पास से 1-1 चाकू बरामद किया। एटीएम लूटने आये बदमाशों को मुठभेड़ में पकड़ने पर एसएसपी ने पुलिस टीम को ढाई हजार व एएसपी ने 1500 रूपए इनाम देने की घोषणा की है। पुलिस ने पकड़े गये बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

10 करोड़ की दी मदद

देहरादून/नई दिल्ली,16 सितम्बर(निस)। विगत दिनों जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने जम्मू कश्मीर सरकार को 10 करोड़ रूपये की मदद दी है। इस मदद का चैक मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरफ से उत्तराखण्ड के स्थानिक आयुक्त शंकर दत्त शर्मा ने जम्मू कश्मीर के प्रमुख स्थानिक आयुक्त लोकेश झा को सौंपा। 

राज्य में दुग्धव्यवसाय आय का अतिरिक्त श्रोत

नई दिल्ली/देहरादून, 16 सितम्बर,(निस)नई दिल्ली में आयोजित दुग्ध विकास, मत्स्य उद्योग एवं पशुपालन पर आयोजित राष्ट्रीय परिचर्चा में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखण्ड के श्रम एवं दुग्ध विकास मंत्री हरीश चंद दुर्गापाल ने बताया कि उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन एवं दुग्ध व्यवसाय कृषि से अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाया जा रहा है। दुग्ध व्यवसाय से जहॅा एक ओर अतिरिक्त आय के साधन सुलभ होते हैं वॅंही दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक न्यूट्रीशनल सपोर्ट भी प्राप्त हो रहा है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियां होने के फलस्वरूप इन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की सम्भावनाएं अत्यन्त सीमित हैं। इन परिस्थितियों में पशुपालन व दुग्ध व्यवसाय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व आय के साधन सुलभ कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। दुग्ध विकास मंत्री श्री दुर्गापाल ने बताया कि अन्य पर्वतीय राज्यों की भाॅति उत्तराखण्ड मंे भी कम दूध उत्पादन करने वाले देशी पशुओं की संख्या अधिक है तथा पर्वतीय क्षेत्रों में पशु चारे की मांग एवं उत्पादन में अन्तर होने के फलस्वरूप इन क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन भी कम है। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के गांॅव मुख्य मार्गो से दूर तथा छितरे हुए होने के फलस्वरूप इन स्थानों पर दुग्ध सहकारी समितियों को गठित किये जाने एवं इनके माध्यम से दुग्ध उपार्जन किए जाने में कठिनाई होती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में अधिक से अधिक ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से संगठित क्षेत्र में सम्मिलित करने तथा जनपदीय दुग्ध संघों के माध्यम से तैयार दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थो के विक्रय अंश में वृद्धि किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इस हेतु उत्तराखण्ड सहकारी डेरी फैडरेशन को प्रदेश के 05 जनपदों हेतु भारत सरकार की समन्वित डेरी विकास योजना (इन्टेन्सिव डेरी डेवलपमेण्ट प्रोग्राम) अन्तर्गत रू0 1502.69 लाख की योजना का अनुमोदन प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त डेरी विकास विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अन्तर्गत दुग्ध उपार्जन, प्रसंस्करण एवं विक्रय हेतु आवश्यक अवस्थापनाएं स्थापित किये जाने के लिए सहायता प्राप्त की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अन्तर्गत प्राप्त धनराशि से दुग्ध सहकारी समितियों में मिल्क एनालाॅइजर स्थापित कर कार्य पद्धति को अधिक पारदर्शी बनाए जाने के प्रयास किये जा रहे हैं।  इसी प्रकार वर्ष पर्यन्त बाजार में दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थो की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने हेतु मार्केटिंग नेटवर्क को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस परिचर्चा का उद्घाटन मंगलवार को केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह द्वारा किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आये मंत्रियों ने भी प्रतिभाग किया। 

कोई टिप्पणी नहीं: