कार्यक्रमों को लेकर धनै ने की समीक्षा बैठक, 9 व 10 अक्टूवर को टिहरी झील में होगें वाटर स्पोर्टस के प्रदर्शन
देहरादून, 17 सितम्बर (निस)। टिहरी झील में पर्यटन विकास के लिये जल क्रीड़ा की अपार सम्भावनाऐं हैं। इस विश्व स्तरीय कार्यक्रम में देश-विदेश के पर्यटक एवं पर्यटन से जुड़े सभी व्यवसायियों एवं ट्रेवल एजेन्टों के साथ-2 साहसिक खेलों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति मंत्री दिनेश धनै ने बुधवार विधानसभा स्थित सभागार में पर्यटन विभाग द्वारा 9 एवं 10 अक्टूबर 2014 को कोटी कालोनी टिहरी में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में उन्होंने टूर आपरेटर, ट्रैवल एजेन्टस को बताया कि भारतीय वायु सेना के जवानों द्वारा पैरा जम्पिंग, पैराग्लाईडिंग तथा वाटर स्पोर्टस के विभिन्न कार्य कलापों को इन जवानों द्वारा प्रर्दशित किया जायगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को पर्यटन के लिये विकसित करना है। टिहरी में 45 किमी0 लम्बी झील है जिसमें जल क्रीड़ा की अपार सम्भावनाऐं हैं। इस का लाभ पूरे उत्तराखण्ड को मिलेगा। जिसका इम्पैक्ट पूरे भारत वर्ष में जायेगा यहां पर गंगा नदी है। जिसमें पूर्व से ही राफ्टिंग, कैनोयिंग और रोविंग देश विदेश के पर्यटकों द्वारा की जाती रही है। उन्होंने बताया कि टिहरी झील में विभिन्न प्रकार के मनोरंजक गतिविधियां भी करायी जायेगी। जैसेः लेजर लाइटिंग शो, हाटएयर बैलून, बोटिंग तथा साहसिक वाटर स्पोर्टस का प्रदर्शन भी विशेषज्ञों द्वारा किया जायेगा जिसमें 9 अक्टूबर को सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जायेगा। बाहर से आये हुए पर्यटक व ट्रेवल्स टूर एजेन्टों को पंजीकरण कराना होगा। मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन सांय किया जायेगा। इसके पश्चात पैनल डिस्कशन एडवेन्चर टूरिज्म नीति पर वर्क शाप होगी तथा टिहरी झील को विकसित करने की योजना तथा टिहरी झील के आस पास के क्षेत्रों को विकसित करने के लिये योजना पर भी कार्यशाला आयोजित होगी। बैठक में उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा तय करते हुए बताया कि 10 अक्टूबरको प्रात सैलानियों व दर्शकों का झील पर आगमन होगा जहाॅं पर साहसिक गतिविधियों का प्रर्दशन प्रारम्भ होगा जिसमें खेल प्रतिभागियों द्वारा मार्च पास्ट भी किया जायेगा। कयाक, कैनोईंग, राफ्टिंग रेस, विड़ सरफिगं, पैरा ग्लाईडिंग तथा पैरा जम्पिंग की जायेगी। दोपहर को मुख्यमंत्री एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का इस अवसर पर उदबोधन होगा। बैठक में उन्होंने उक्त सभी कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समारोह कमेटी गठन करने के निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों को पर्यटकों के लिए टूरिस्ट सिक्यारिटी बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों को टिहरी के आस पास के पौराणिक स्थल एवं पर्यटन स्थलों की जानकारी हेतु ग्रोशर एवं पर्यटन प्रचार सामग्री तैयार करने के साथ ही उन्होंने टूर आपरेटर एवं होटल स्वामियों से निरन्तर बैठक करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से कहा कि टिहरी प्रोजेक्ट से बन रही बिल्डिंगों का फ्रन्ट इवैल्यूसन तैयार करें तथा जहाॅं कार्यक्रम आयोजित होगा। उस साईड की लेबलिंग के साथ-साथ पार्किंग की समुचित व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने पर्यटकों के आवागमन हेतु मुख्य मार्गों का भी रख रखाव करने के निर्देश पी0डब्यू0डी0 को दिये। बैठक में शैलेश बगोली अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर्यटन विकास परिषद, युगल किशोर पन्त जिलाधिकारी टिहरी, अपर निदेशक पर्यटन प्रबंध निदेशक गढ़वाल मंडल विकास निगम के साथ अध्यक्ष उत्तराखण्ड होटल एशोसिएशन संदीप साहनी, सुश्री किरण भट्ट अध्यक्ष आईप्रो के साथ ट्रेवल एजेन्जियों के पदाधिकारी मौजूद थे।
गंगा प्रदूषण के कारकंांे पर डाला प्रकाश
देहरादून, 17 सितम्बर (निस)। केन्द्रीय मंत्री उमा भारती व मुख्यमंत्री हरीश रावत की मौजूदगी में आयोजित बैठक में अपर सचिव सौजन्या जावलकर ने राज्य में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के बारे में विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। उन्होंने राज्य में गंगा व इसकी सहायक नदियों व इसके कैचमेंट एरिया की जानकारी देते हुए गंगा को प्रदूषित करने वाले कारकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही उन क्षेत्रों के बारे में भी जानकारी दी जहां गंगा में अपशिष्ट पदार्थ प्रवाहित होते हैं। औद्योगिक प्रदूषण का भी प्रभाव गंगा पर होता है। हरिद्वार सिडकुल में स्थापित सीईटीपी(काॅमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) में तृतीय स्तर का ट्रीटमेंट का काम होना आवश्यक है जबकि रूड़की, भगवानपुर, लंढ़ोरा यूपीएसआईडीसी व हरिद्वार यूपीएसआईडीसी में सीईटीपी स्थापित किए जाने की जरूरत है। गंगा नदी में पानी की गुणवŸाा लक्ष्मण झूला तक ए श्रेणी जबकि हरिद्वार व ऋषिकेश में बी श्रेणी व हरिद्वार से नीचे डी श्रेणी की है। काशीपुर में बहेला व डहेला नदियों में पानी की गुणवŸाा ई श्रेणी की है। नदी के पानी की गुणवŸाा सुधार के लिए 22 कस्बों व आबादियों को प्राथमिकता के तौर पर चिन्हित किया गया है। उन्होंने बताया कि दिसम्बर 2014 तक सभी घरों को शौचालयों की सुविधा उपलब्ध करानी है। सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना है। इसमें मुनि की रेती में एसटीपी(सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्वीकृत किया जा चुका है जबकि श्रीनगर, गोपेश्वर व जोशीमठ में प्रस्तावित है। ऋषिकेश व हरिद्वार में रिवर फ्रन्ट डेवलपमेंट की योजना बनाई गई है। इसमें गंगा नदी के किनारे पथ निर्माण व सौंदर्याकरण करते हुए इसे इको पर्यटन से जोड़ा जाएगा। 132 आबादी क्षेत्रों में सीवरेज सिस्टम विकसित किया जाना है। इस पर लगभग 7634 करोड़ रूपए की आवश्यकता होगी। राज्य के चिन्हित 730 स्थानों पर सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए 219 करोड़ रूपए, गंगा के किनारे अंत्येष्टि से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए आधुनिक शवदाह गृह विकसित किए जाने हैं। कुल 159 शवदाह गृहों के लिए 52 करोड़ रूपए की जरूरत होगी। जेएनयूआरएम के तहत केवल देहरादून, हरिद्वार व नैनीताल में सोलिड वेस्ट मेनेजमेंट के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए थे। गंगा के किनारे अन्य कस्बों व आबादी क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक तरीके से सोलिड वेस्ट होना है। इसके लिए लगभग 829 करोड़ रूपए की लागत आंकलित की गई है। बायोडाईजेस्टर सहित कुल 1223 सचल शौचालयों का निर्माण किया जाना है। इस पर 122 करोड़ रूपए की लागत आएगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को भी गंगा में प्रदूषण को रोकने के संबंध में प्रशिक्षित किया जाना होगा। इस पर 6 करोड़ रूपए की लागत सम्भावित है। महासीर व अन्य मछलियों के संरक्षणए व गंगा में प्रवाहित किए जाने वाले फूलों के निस्तारण के लिए के लिए लगभग 4-4 करोड़ रूपए के प्रोजेक्ट बनाये गये हैं। गंगा किनारे पारम्परिक जीवन निर्वाह से जुड़े सभी पक्षों के विस्तृत अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए 15 करोड़ रूपए का प्रस्ताव बनाया गया है। रिवर फ्रन्ट डेवलपमेंट के लिए 300 करोड़ रूपए, 5 लाख से अधिक परिवारों को शौचालय उपलब्ध करवाने के लिए 256 करोड़ रूपए की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर लगभग 9478 करोड़ रूपए की धनराशि की आवश्यकता होगी।
केन्द्र बाढ़ नियंत्रण कार्यों के प्रस्तावों को दे मंजूरी: रावत
देहरादून, 17 सितम्बर (निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्र सरकार से बाढ़ नियंत्रण कार्यों के प्रस्तावों को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने राज्य में सैंकड़ों जलाशयों में जलसंरक्षण व जलसंवर्धन के लिए सहयोग का अनुरोध किया है। बुधवार को सचिवालय में केंद्रीय मंत्री जल संसाधन, नदी विकास व गंगा पुर्नरूद्धार उमा भारती व मुख्यमंत्री हरीश रावत की मौजूदगी में केंद्र सरकार व राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई। इसमें गंगा पुनरूद्धार के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट, व्यक्तिगत व सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण, आधुनिक शवदाह स्थलों के निर्माण, सोलिड वेस्ट मेनेजमेंट आदि के लिए कुल मिलाकर 9478 करोड़ रूपए का प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया गया। बैठक में भारत सरकार के उपक्रम वाप्कोस लिमिटेड व राज्य सरकार के मध्य उŸाराखण्ड में जल संसाधन, ऊर्जा व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट परियोजनाओं के चिन्हिकरण, प्लानिंग व क्रियान्वयन के लिए एमओयू भी हस्ताक्ष्रित किया गया। वाप्कोस की ओर से चेयरमैन व एमडी आरके गुप्ता ने जबकि राज्य सरकार की ओर से सचिव सिंचाई डा.अजय प्रद्योत ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड में कम लागत के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने की आवश्यकता है। चारधाम यात्रा मार्ग को तब तक स्थायी रूप से सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता है जब तक इस मार्ग पर बाढ़ सुरक्षा का काम नहीं कर लिया जाता है। पर्वतीय प्रदेश उŸाराखण्ड में मौसम संबंधी बाध्यताओं के कारण अपेक्षाकृत काम का समय कम मिलता है। इसलिए केंद्र सरकार उŸाराखण्ड से भेजे गए बाढ़ सुरक्षा के प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी दे ताकि समय पर काम प्रारम्भ किया जा सके। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि गंगा के पुनरूद्धार के लिए केवल आक्सीजन लेवल को ही नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि इस बात पर अधिक बल देना होगा कि गंगा में अपशिष्ट पदार्थों को जाने से रोका जाए। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा के पुनरूद्धार का काम उŸाराखण्ड से प्रारम्भ किया जाएगा। केंद्र व राज्य सरकारों के सहयोग से ही इस मिशन को पूरा किया जा सकता है। हाल ही में एक संस्था को गोमुख से पानी की टेस्टिंग का काम दिया गया है। इसमें 15-20 पाॅइन्ट निर्धारित किए गए हैं। अविरल धारा व निर्मल धारा मिशन को पीपीपी माॅडल के आधार पर लिया जाए। स्थानीय नगर निकायों को भी इस मिशन से जोड़ना होगा। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए उŸाराखण्ड द्वारा बेहतर शुरूआत की गई है। अन्य राज्यों में भी इसे अपनाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री रावत एक विजनरी व्यक्ति हैं और केंद्र सरकार उŸाराखण्ड के हित में उनका पूरा सहयोग करेगी। बैठक में पेयजल मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी, विधायक केदारनाथ शैलारानी रावत, मुख्य सचिव सुभाष कुमार, भारत सरकार में सचिव आलोक रावत सहित भारत सरकार व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जौलीग्रांट से शुरू की जायें अन्तर्राष्ट्रीय हवाई सेवा: महाराज
देहरादून, 17 सितम्बर (निस)। पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता सतपाल महाराज ने केन्द्र सरकार से जौलीग्रांट हवाई अड्डे से अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा शुरू करने की मांग की है। महाराज ने आज दिल्ली में केन्द्रीय नागर विमानन् मंत्री गजापति राजू से मुलाकात की तथा उनसे देहरादून स्थित जौली ग्रांट हवाई अड्डे से अन्तर्राष्ट्रीय परिचालन शुरू करने की मांग की। मुलाकात के दौरान उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से यह भी अनुरोध किया कि हाल ही में प्रधानमंत्री की ब्राजील यात्रा के दौरान लेटिन अमेरिकी देशों से रिश्तों में प्रगाढ़ता के लिए नई दिल्ली से पनामा सीधी हवाई सेवा शुरू की जाए। मौजूदा समय में पेरू, ब्राजील व अन्य लेटिन अमेरिकी देशों की यात्रा करने में तीन दिन का समय लगता है यदि सीधी हवाई सेवा शुरू हो जायेगी तो यह सफर मात्र 16 से 18 घण्टे में तय हो जायेगा। इससे त्रिनिदाद व सुरीनाम में रह रहें भारतीयों को भी कनेक्टिविटी मिलेगी।
कानून व्यवस्था सुधारने की मांग
देहरादून, 17 सितम्बर (निस)। दून की लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था से नाराज राज्य आंदोलनकारियों ने बुधवार को पं. दीनदयाल पार्क के समक्ष जोरदार नारेबाजी के बीच धरना दिया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच से जुड़े सदस्य आज प्रातः गांधी रोड़ स्थित पं. दीनदयाल पार्क के समक्ष एकत्र हुए, जहां पर वह जोरदार नारेबाजी के बीच धरने पर बैठ गये। इस अवसर पर आहूत सभा में वक्ताओं ने कहा कि सूबे की राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में आए दिन कोई न कोई आपराधिक वारदात हो रही है, जिसको रोक पाने में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि इन आपराधिक वारदातों के कारण आम जनमानस में भय व्याप्त है। इस दौरान उन्होंने सूबे के गृह मंत्रालय की कार्यशैली पर जहां सवाल उठाये, वहीं सख्ती के साथ ठेलियों, पुताई करने वालों और फेरी करने वालों के वैरिफिकेशन करने की मांग की। वक्ताओं का साफ कहना था कि पुलिस की लचर कार्यप्रणाली के कारण ही प्रदेश में अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है। पुलिस गश्त व पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था ठीक नहीं है, जिसके कारण अपराध्यिों के हौसले बढ़े हुए हैं। उन्होंने साफ कहा कि यदि आपराधिक वारदातों में शीघ्र लगाम न लगायी गयी, तो उन्हें आंदोलन तेज करने पर विवश होना पड़ेगा। इस अवसर पर ओमी उनियाल, जगदीश कुकरेती, महिपाल सिंह नेगी, विजय जुयाल, शम्भू ममगाई, प्रभात डंडरियाल, गणेश डंगवाल, केशव उनियाल आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।
मार्ग के रखरखाव की ओर ध्यान न दिए जाने से रोष, मार्ग के सुधारीकरण को लेकर मुख्य अभियंता को भेजा ज्ञापन
देहरादून, 17 सितम्बर (निस)। देहरादून जनपद अंतर्गत कालसी-बैराटखाई मोटर मार्ग विभाग की अनदेखी के चलते बदहाल हो चुका है। पूरे मार्ग में जगह-जगह पर गड्ढे बने हुए हैं। वहां से निकलने वाले वाहन चालकों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बार-बार शिकायत के बाद भी विभाग मार्ग के सुधारीकरण के प्रति उदासीन बना हुआ है। विभाग की अनदेखी से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में ग्रामीणों का कहना है कि तीस किमी लंबे कालसी-बैराटखाई मोटर मार्ग से कोथी, भौंदी, बिजऊ, खणी, कुइथा, थैना, भागना, भंद्रोटा, कोफ्टी, समाया, बाइथा, जोशीगोथान, हमरऊ, बसाया, मसराड़ और सिंगोर समेत दो दर्जन से अधिक गांव जुड़े हुए हैं। विभाग मार्ग के रखरखाव के प्रति उदासीन बना हुआ है। विभाग ने इस मार्ग का पिछले कई वर्षाे से सुधारीकरण नहीं कराया है, जिससे कदम-कदम पर गड्ढे बन गए हैं। कुछ स्थानों पर मार्ग की पेंटिंग उखड़ चुकी है तो कुछ स्थानों पर दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। हालात यह हैं कि यात्रियों को हिचकोले भरा सफर तय करना पड़ता है। इस कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ज्ञापन में क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता खजान सिंह नेगी, जयपाल सिंह का कहना है कि मार्ग के सुधारीकरण के संबंध में विभागीय अधिकारियों से कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन विभाग उदासीन बना हुआ है। उन्होंने कहा यदि विभाग ने मार्ग का सुधारीकरण कार्य जल्द नहीं शुरू किया तो ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।

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