उत्तराखंड की विस्तृत खबर (18 सितम्बर) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 18 सितंबर 2014

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (18 सितम्बर)

भारत की माटी का प्रमुख सन्देश है वसुधैव कुटुम्बकम्
  • दक्षिण कोरिया में सम्पन्न विश्व शान्ति सम्मेलन में बोले स्वामी चिदानन्द सरस्वती
  • भारत की ओर से श्री स्वामी जी व अकाल तख्त के ज्ञानी गुरुवचन सिंह ने की षिरकत

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देहरादून, 18 सितम्बर। भारतवर्ष की माटी का प्रधान सन्देश वसुधैव कुटुम्बकम् है। हिन्दुस्तान की भूमि क्षण-प्रतिक्षण शान्ति का सन्देश देती है। दुनिया में शान्ति के लिए अनेकों लड़ाइयाँ लड़ी गयीं लेकिन फैलती अशान्ति ही रही। अब ‘वार’ नहीं ‘प्यार’ की जरूरत है। प्यार की ताकत वार की ताकत से बहुत अधिक है। आज युद्ध से बुद्ध की ओर बढ़ने की बड़ी जरूरत है। अब समय आ गया है कि बुद्धि और दिल में गहरा तादात्म्य स्थापित किया जाए। यह बात परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इन्टरफेथ वाश एलायंस (जीवा) के सह-संस्थापक-अध्यक्ष श्री स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में सम्पन्न विश्व शान्ति सम्मेलन में व्यक्त किए। वह इस अन्र्तराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। सम्मेलन में 122 देशों के धर्मगुरुओं और 24 देशों के वर्तमान व पूर्व राष्ट्राध्यक्षों व शासनाध्यक्षों ने भाग लिया। राजधानी सियोल के विशाल स्टेडियम में सम्पन्न विश्व सम्मेलन में विश्व के 50 से ज्यादा देशों के करीब तीन लाख लोग मौजूद थे। इनमें इन्टरनेशनल यूथ ग्रुप एवं इन्टरनेशनल वीमेन्स ग्रुप के दो लाख से अधिक सदस्य शामिल थे। इस अवसर पर शान्ति के लिए सामूहिक संकल्प-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए तथा सभी ने हाथ उठाकर साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया। परमार्थ प्रवक्ता राम महेश मिश्र ने बताया कि आज साउथ कोरिया की राजधानी सियोल में हुए विश्व शान्ति सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व तीर्थनगरी ऋषिकेश के स्वामी चिदानन्द सरस्वती तथा अकाल तख्त के मुख्य जत्थेदार ज्ञानी गुरुवचन सिंह ने किया। श्री सिंह ने गुरु नानकदेव तथा सिख धर्म के प्रमुख सन्देश दुनियावासियों को सुनाए। विश्व शान्ति के लिए अपने कई कार्यक्रमों के माध्यम से सेवा दे चुके श्री स्वामी जी द्वारा प्रस्तुत हिन्दू धर्म के शान्ति सन्देशों को प्रतिभागियों ने खासा पसन्द किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती द्वारा प्रणीत एच-3 अर्थात् हेड, हार्ट एवं हैण्ड के महत्व को सबने स्वीकारा। उन्होंने दुनिया की युवाशक्ति और महिलाशाक्ति को विशेष केन्द्र में रखकर अपने सन्देश में कहा कि वल्र्ड पीस एलायंस को तभी सफलीभूत किया जा सकता है जब हमारा जीवन एलायंड हो और शान्ति अपने जीवन से शुरू हो तथा जिन्दगी से बैरियर्स एवं बाउंड्रीज खत्म हों। विश्व में शान्ति की स्थापना इंसानियत की स्थापना एवं विभिन्नता में एकता से ही सम्भव हो सकेगी। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम अपने धर्म के प्रति अडिग रहें और दूसरों का सम्मान करें। विश्व परिवार की ऋषियों की परिकल्पना को साकार करने के लिए श्री स्वामी जी ने छोटे-छोटे स्वार्थों से ऊपर उठने की सलाह दुनियावासियों को दी। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने वल्र्ड पीस एलायंस के चेयरमैन श्री मान-ही-व्ही को भारत आने का निमन्त्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। 

‘‘हमारा पेड़ हमारा-धन‘‘ योजना से आम आदमी को जोड़ा जायः मुख्यमंत्री

देहरादून, 18 सितम्बर, (निस) । हमारा पेड़ हमारा-धन योजना को आम आदमी से जोड़ते हुए और अधिक आकर्षक बनाया जाय, इसके लिए अब 300 रुपये प्रति पेड़ तथा तीन वर्ष की अवधि की जाय। वर्षा जल संग्रहण योजना को और प्रभावी बनाया जाय। कम धनराशि में अधिक लाभकारी जलाशय बनाये जाय। राज्य में वन्यजीवों से खेती सुरक्षा योजना के लिए शीघ्र नीति तैयार की जाय। साथ ही गूजर एवं अन्य प्रभावित पुनर्वास योजना को मूर्तरूप दिया जाय। चारागाह विकास योजना के लिए वन पंचायतों को सहभागी बनाया जाय। कैम्पा और जायका के अन्तर्गत मिलने वाली धनराशि के अतिरिक्त यदि इन योजनाओं के लिए और धनराशि की आवश्यकता होगी, तो वह राज्य सरकार द्वारा दी जायेगी। यह निर्देश मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरूवार को बीजापुर राज्य अतिथि गृह में वन विभाग की समीक्षा करते हुए दिये। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड का अधिकांश भू-भाग वन आच्छादित है। हमें वन-पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए विकास कार्य करने है। हमारे पास सीमित ससंाधन है, जिन्हें बढ़ाने के लिए वन विभाग भी कुछ अभिनव योजनाएं तैयार। प्रदेश में ऐसे नेचर जोन बनाये जाय, जो शत-प्रतिशत प्रदूषणमुक्त क्षेत्र हो। इससे पर्यटन को भी जोडा जा सकेगा। इको पार्क जैसी गतिविधियों को और अधिक विकसित किया जाय। वन विभाग गेस्ट हाउसों को पर्यटन के अनुकूल तैयार करे, पर्यटन गतिविधियां बढायी जाय। इस प्रकार की योजनाओं के लिए ठोस कार्ययोजना बनायी जाय। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वन विभाग मिक्स फारेस्ट कान्सेट पर कार्य करे, इससे वनों में चीड़ से होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा। ग्रामीण लोगो वन पर्यावरण से जोड़ने के लिए राज्य सरकार हमारा पेड़ हमारा धन योजना शुरू की है। इस योजना और अधिक आकर्षक बनाया जाय, इसके तहत अब प्रति पेड 300 रुपये तथा इसकी अवधि 3 वर्ष की जाय। वर्षा जल संरक्षण योजना को प्रभावी ढंग से शुरू किया जाय। इसके लिए प्रत्येक डीएफओ अपने क्षेत्र में जल संग्रहण की योजना को मूर्तरूप दे। जंगलों में बनने वाले जलाशय ऐसी स्थानो ंपर बनाये जाय, जहां पर वन्य जीव आसानी से पहुंच सके। वर्षा जल संग्रहण योजना यदि सही रूप में काम करेगी, तो उसके आस-पास के गांव व नदियों में जल स्तर बढेगा। जंगलों से लगी सड़कों के किनारे नाली बनाकर उसका पानी को जंगलों की ओर डायवर्ट किया जाय। वन विकास निगम वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करे। साथ ही पेड़ो के कटान के बाद खाली भूमि पर तत्काल वृक्षारोण करे। चारागाह विकास योजना को वन पंचायतों से जोड़ा जाय। इसके लिए ठोस नीति तैयार की जाय। वन पंचायतों और ग्राम सभाओं के मध्य बेहतर समन्वय हो, इसके लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाय। वन्यजीवों से खेती को होने वाले नुकसान के बचाव के लिए ठोस कार्ययोजना बनायी जाय। लैंटाना घास, सुअर, नील गाय व बंदरों से खेती व जंगलों को काफी नुकसान होता है, इसके बचाव के लिए ऐसी नीति तैयार की जाय। जंगलों से लगे गांवो व खेतों के किनारे सुरक्षा दीवार बनायी जाय, ताकि वन्य जीव खेती को नुकसान न पहुंचा सके। इसके लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना बनायी जाय। राजाजी पार्क, कार्बेट पार्क व अन्य स्थानों पर रहने वाले गूजर एवं अन्य प्रभावितों के पुनर्वास के लिए शीघ्र ही नीति बनायी जाय। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वन क्षेत्र में आने वाली सड़कों की मरम्मत व निर्माण कार्य स्वयं करे। इससे आवागमन व गश्त करने में सुविधा होगी। बैठक में वन मंत्री दिनेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक एस.एस.शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक श्रीमती बीना शेखरी, अपर प्रमुख वन संरक्षक जयराज, एस.टी.एस.लेप्चा, वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्रीकांत चंदोला, समन्वयक जनसंपर्क जसबीर रावत, विशेषकार्याधिकारी मनोज शर्मा आदि उपस्थित थे।  

सीएम ने दिये कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश 

देहरादून, 18 सितम्बर, (निस) । मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण से सम्बन्धित इस वर्ष किये जाने वाले कार्यों के क्रियान्वयन में 15 दिन के अन्दर तेजी लाने के निर्देश दिये हैं। इस सम्बन्ध में जो कठिनाई है उसका निराकरण अविलम्ब किया जाय। सिंचाई विभाग को उनके द्वारा सम्पादित किये जाने वाले कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है, विभाग स्वीकृत योजनाओं पर शीघ्र कार्य प्रारम्भ कर निर्धारित धनराशि का समयान्तर्गत उपभोग करना सुनिश्चित करे। बीजापुर राज्य अतिथि गृह में सिंचाई एवं बाढ़ सुरक्षा कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने निर्देश दिये हैं कि नदियों के किनारे बाढ़ सुरक्षा से सम्बन्धित स्वीकृत कार्यों को जनवरी तक निश्चित रूप से पूर्ण कर लिया जाय, ताकि लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण का कार्य किया जा सके। उन्होंने कहा कि सिंचाई से सम्बन्धित कार्यों के लिए सहायक व कनिष्ठ अभियंताओं की व्यवस्था कर दी गई है, अतः विभाग निर्माण कार्यों पर ध्यान दे। अभियंताओं की कमी का बहाना अब न बनाया जाय। उन्होंने सिंचाई व बाढ़ नियत्रंण से सम्बन्धित कार्यों को आपसी समन्वय से पूरा करने के भी निर्देश देते हुए कहा कि कार्यों के लिए भारी मात्रा में धनराशि व्यय होनी है, अतः विभाग शारीरिक व मानसिक रूप से इसके लिए तैयार रहे। कठिनाइयों को चिन्हित कर उनका समाधान ढूंडे तथा कार्यों को पूर्ण करने में और तेजी लाये। उन्होंने कहा कि केन्द्र पोषित योजनाओं के लिए राज्यांश के रूप में 137 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत कर दी गई है। उत्तरकाशी में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए 20 करोड़ स्वीकृत किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं की अभी डी.पी.आर. नहीं बन पाई है, उन्हें समय बद्धता के साथ बनाया जाय तथा इसके लिए किसी अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाय। उन्होंने कहा कि चारधाम सहित अन्य नदी क्षेत्रों का भी व्यापक सर्वे कराया जाय तथा चिन्हित स्थानों के अतिरिक्त भी यदि बाढ़ सुरक्षा कार्य किये जाने हो तो उसका भी अध्ययन कर लिया जाय, ताकि सड़कों के नुकसान व भूक्षरण को रोका जा सके। मुख्यमंत्री श्री रावत ने रीवर फ्रन्ट डेवलप करने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी-छोटी वाटर बाडी बनाये जाने पर बल दिया। चेक डाम बनाने के कार्यों को प्राथमिकता प्रदान करने, नदी नालों पर छोटे-छोटे बांध बनाने पर भी उन्होंने बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि अल्मोड़ा की लखोरा नदी पर सरायखेत के पास दो तीन जगह पर छोटे-छोटे बांध बना दिये जाय तो इससे गढ़वाल व कुमाऊं के कई क्षेत्रों की पेयजल समस्या का समाधान हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग द्वारा भी छोटे-छोटे चेक डाम बनाये जा रहे हैं, इससे पानी रूकेगा तथा जब यह पानी नीचे आकर नदियों में मिलेगा तो रिचार्ज बढ़ेगा। कोशी में भी छोटे-छोटे बांध बनाने से जाड़ों में इससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने बोल्डरों के लिए नीति बनाने, इनका दुरूप्रयोग न हो इसके लिए कार्ययोजना बनाने को कहा। केदारनाथ में किये जाने वाले बाढ़ सुरक्षा कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को देते हुए कहा कि मन्दिर के नीचे मंदाकिनी नदी के ट्रीटमेंट के साथ ही केदारनाथ के लिए जो कार्य योजना बनायी गई है, उसका विवरण शीघ्र प्रस्तुत किया जाय। गौरीकुण्ड से लिंचोली व केदारनाथ तक नदी तटों पर जो बाढ़ सुरक्षा कार्य किये जाने हैं उस पर भी शीघ्र कार्यवाही के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं। समीक्षा बैठक में सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, सचिव सिंचाई अजय प्रद्योत, अपर सचिव मुख्यमंत्री दिलीप जावलकर सहित सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

” निर्मल गंगा जन अभियान ” का तीसरा चरण गंगा अमृत कलश यात्रा 21 सितम्बर से

देहरादून, 18 सितम्बर, (निस) । विचार क्रांति के माध्यम से युग परिवर्तन की अपनी अनूठी विचारधारा के तहत  सामाजिक संरचना के पुनर्निर्माण हेतु संकल्पित, अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु अनेक अभियान चलाये जा रहे हैं। अभियान के संयोजक डा. जोशी ने बताया कि जल, जंगल, जमीन के संरक्षण एवं शुद्विकरण के अंतर्गत हमारे जलस्रोतों के बचाव हेतु भागीरथी जलाभिषेक अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत पूर्व में दस नदियों पर स्वच्छता का कार्य आरंभ किया गया एवं सतत रूप से इसे चलाया जा रहा है। अब वर्तमान में भारत की श्रद्धा का केंद्र एवं संस्कृति की वाहक, पतित पावनी गंगा की स्वच्छता का कार्यक्रम आरंभ किया गया है जिसे ” निर्मल गंगा जन अभियान ” का नाम दिया गया है। इस अभियान के लिये गंगा पूरी लंबाई को पांच अंचलों में बांटा गया है। संपूर्ण कार्यक्रम पांच चरणों में संपन्न होगा जिसमें से पहला चरण में सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। इसका दूसरा चरण जनजागृति हेतु चलाया गया था जिसमें दोनों तटों पर ” गंगा संवाद ” के रूप में लगभग एक सौ पचास स्थानों पर गायत्री परिवार के कार्यकताओं की टोलियों ने कार्यक्रम दिया था। उल्लेखनीय है कि इसके माध्यम से लगभग दस लाख लोगों को गंगा स्वच्छता हेतु संकल्पित किया गया एवं 450 गंगा मण्डलांे का गठन किया गया है। इस क्रम में तृतीय चरण के अंतर्गत गंगा अमृत कलश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है जिसमें गोमुख से गंगा जल लेकर रथ के साथ कार्यकर्ता गांव गांव नगर नगर में पद यात्रा करेंगे।  इस यात्रा का शुभारम्भ गंगोत्री गांव से 21 सितंबर 14 से हो रहा है जिसमें गायत्री परिवार प्रमुख डाॅ प्रणव पण्ड्या जी यात्रा को हरी झंडी दिखाकर विदा करेंगे। यह यात्रा 11 अक्टूवर को हरिद्वार में आयेगी एवं 17 अक्टूवर तक हरिद्वार एवं आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण करेगी। 2525 किमी लम्बी यह गंगा अमृत कलश यात्रा उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड एवं पष्चिम बंगाल से गंगासागर तक गुजरेगी।

शिल्प कला उन्नयन परिषद की स्थापना की दिशा में तेजी से होगा कार्यःयशपाल आर्य

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देहरादूनः  18 सितम्बर,(निस)। उत्तराखण्ड की विलुप्त हो रही हस्त शिल्प को संरक्षित करने में सरकार दृढ़ता से कार्य करेगी , शिल्प कला उन्नयन परिषद की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य होगा। उन्होंने कहा कि संस्थान की स्थापना के बाद इसमें अनुभवी हस्तशिल्पियों को मानदेय के रूप में  नियुक्त कर उनके अनुभवों का लाभ लिया जायेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विलुप्त हो रही हस्तशिल्पकला को प्रत्येक दशा में विकसित कर उनका संरक्षण किया जायेगा और इसके लिए एक संस्थान की स्थापना भी की जायेगी। यह एक प्रमुख विषय है इसलिए इसके लिए एक कार्य योजना तैयार की जायेगी और पुराने शिल्पकारों का जनपदवार सर्वेक्षण कर शिल्पकारों को सूचीबद्ध किया जायेगा। पुरानी एवं विलुप्त हो रही शिल्पकलाओं को विकासित कर शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जायेगा। यह बात कबीना मंत्री यशपाल आर्य ने गुरूवार को विधानसभा स्थित अपने कक्ष में शिल्प कला उन्नयन परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में प्रदीप टम्टा पूर्व सांसद द्वारा सुझाव दिया गया कि इस कार्य के लिए एक संस्थान बनाकर उसे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान व पालीटैक्निकों की भाॅंति तकनीकी रूप से विकसित किया जाय। वहीं पूर्व मंत्री राम प्रसाद टम्टा ने सुझाव दिया कि हरिप्रसाद टम्टा जी के नाम से एक ट्रस्ट बनाया जाय। जिससे शिल्प कला को विकसित करने के लिए शिल्पकारों को रोजगार देकर विलुप्त हो रही दुर्लभ कला को जीवित रखा जा सकेगा।   बैठक में पौड़ी विधायक सुन्दरलाल मन्द्रवाल का सुझाव था कि इसके लिए उत्तराखण्ड के दोनों मण्डलों में अलग-अलग संस्थान स्थापित किए जाए। सुन्दरलाल मुयाल सेवानिवृत्त आईएएस द्वारा संस्थान के निर्माण से सामाजिक परिवर्तन होगा तथा शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। उनका विचार था कि जिस क्षेत्र में जो हस्तशिल्प कला विकसित है उसे उसी क्षेत्र में विकसित किया जाय तथा इसके लिए शिल्पकारों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराये जाएॅं। विधायक गंगोलीहाट नारायण रामदास माननीय का सुझाव था कि संस्थान की स्थापना से पूर्व इसके लिए बाईलाज तैयार किया जाना श्रेयस्कर रहेगा। प्रदेश महासचिव अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ कांग्रेस टम्टा चमोली, बचनलाल का सुझाव था कि रिंगाल से बनने वाले हस्तशिल्पों को भी प्रोत्साहित किया जाय जिसके लिए टोकरी, चटाई एवं बाॅंसुरी आदि उत्पादों का उत्पादन कर इस कला को आगे बढ़ाया जाय। इसके साथ ही उनका सुझाव था कि अनुभवी एवं दक्ष बुजुर्ग शिल्पकारों को इन स्थापित होने वाले संस्थानों में मानदेय पर प्रशिक्षक रखा जाय।  बैठक में एन.आर. स्नेही,राकेश लाल शाह, सेवानिवृत्त आई.ए.एस.चन्द्र सिंह, एस.लाल ,पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा, पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत उत्तरकाशी नत्थीलाल शाह आदि उपस्थित थे।  

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