कारपेट एक्स्पों में रही हैंडमेड कार्पेट की धूम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014

कारपेट एक्स्पों में रही हैंडमेड कार्पेट की धूम

  • चार दिवसीय कालीन मेले से निर्यातक उत्साहित, बेहतर कारोबार की उम्मीद ं
  • सीईपीसी ने किया 600 करोड़ के कारोबार का दावा 

इंडिया कार्पेट एक्सपो में इस बार हैंडमेड परशियन, हैंड टफटेड व सैगी कालीन की जगह नाटेड व दरी कालीन की धूम रही। सात समुन्दर पार से आएं खरीददारों का रुझान इन कालीनों की ओर कुछ ज्यादा ही रहा। मेले में बनारसी ही नहीं अन्य प्रकार की साडि़यों के कतरन निर्मित कालीन भी विदेशियों के आकर्षण के केन्द्र रहे। धर्म की नगरी काशी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रांगण में आयोजित चार दिवसीय कार्पेट मेला में कुल 283 स्टाल लगाए गए, भदोही, मीरजापुर व वाराणसी के ज्यादा स्टाल थे। हैं। स्टाल लगाने वालों में जयपुर, आगरा, कश्मीर, पानीपत, मुम्बई, दिल्ली व अन्य राज्य भी शामिल हैं। मेले में आने वाले खरीदारों की अधिक संख्या अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया, टर्की, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, बेल्जियम से रही। कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन देशों के आयातक भी पहुंचे। मेला आयोजक कारपेट क्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल का दावा है कि मेले में 57 देशों से आएं कुल 300 से अधिक ग्राहकों ने तकरीबन 600 करोड़ का कारोबार किया, जो अपने आप में एक रिकार्ड है और सरकार की ओर से दिए गए निर्यात लक्ष्य की ओर अग्रसर है। 

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सीईपीसी के वरिष्ठ प्रशासनिक सदस्य उमेश गुप्ता ने बताया कि मेले में जहां महंगी, सस्ती, परंपरागत व आधुनिक डिजाइनर कालीनों के स्टाल पर देशी-विदेशी क्रेताओं की भीड़ रही वहीं रंगों के कोड स्टाल पर भी लोग जमे रहे। विदेशी ग्राहकों ने हस्तनिर्मित उत्कृष्ट कालीनों को जांचा-परखा। ग्राहकों को नई डिजाइन व लुक वाले कालीनों से लुभाने की कोशिश की गई। सभी स्टालों पर निर्यातक व उनके कारिंदे विदेशी ग्राहकों को कालीन की गुणवत्ता व डिजाइन को समझाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़े। विभिन्न स्टालों पर करीब छह अरब के कार्पेट की पूछताछ और बुकिंग हुई। इसके अलावा कुछ ने सैम्पल लेकर आर्डर देने की बात भी कही है। इस बार बॉयरों के मुकाबले उनके एजेंट या प्रतिनिधि ज्यादा दिखे। कालीन मेला में भदोही, मीरजापुर और आसपास क्षेत्र के कालीन निर्माताओं ने भी बताया कि इस बार आर्डर खूब मिले हैं। हर विदेशी ग्राहक नई डिजाइन तलाशते दिखा। ऐसे में हैंडमेड परशियन, हैंड टफटेड व सैगी कालीन की जगह नाटेड व दरी कालीन के प्रति ग्राहकों का रुझान काफी नजर आया। मेले में बनारसी ही नहीं अन्य प्रकार की साडि़यों के कतरन निर्मित कालीन भी हैं, जिसकी लैटिन अमेरिका में काफी डिमांड हैं। दो वर्षो से मार्केट थमा है। उम्मीद से कम आर्डर मिल रहे थे। रॉ मैटेरियल के मूल्य में दस फीसद की वृद्धि हो गई लेकिन बॉयर पुराने रेट पर ही कार्पेट की डिमांड कर रहे हैं। 17 अक्टूबर को अमेरिका में हाई प्वाइंट शुरू होने वाला है, इस वजह से अमेरिकन बॉयर कम आए हैं। इस बार विदेशी ग्राहकों का रूझान डिजाइन पर कम नए कलर पर ज्यादा रहा। 50 फीसद बॉयर नए कलर और फैशनेबल कार्पेट के ऑडर दिए। कारोबार की दृष्टि से इस बार का फेयर ठीक है। सीईपीसी के अध्यक्ष कुलदीप राज वाटल व प्रशासनिक कमेटी के वरिष्ठ सदस्य उमेश गुप्ता ने उम्मीद जताई है कि इस बार का फेयर रिकार्ड तोड़ेगा। अब तक 57 देशों से तीन सौ से अधिक बॉयर पहुंचे। उम्मीद है कि हम लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे। स्वीडन, रूस, अमेरिका, बेल्जियम, चाइना, टर्की, दक्षिण अमेरिका, जर्मनी, पोलैंड, इंग्लैंड, हालैंड, पुर्तगाल देशों के आयातक ज्यादा आए। कालीन मेला में एक ओर जहां लाखों रुपये कीमत वाले कालीन विदेशी ग्राहकों के मन को छू रहे थे, वहीं यार्न कार्पेट भी ग्राहकों को आकर्षित करते रहे। विभिन्न स्टालों पर लगे उत्पादों में बुनकरों का हुनर देखने को मिला। कहा, यह उद्योग कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला प्रदूषण रहित कुटीर उद्योग है। इस प्रकार के आयोजन से बुनकरों की महारत खुलकर सामने आती है। 

बंद इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम को चालू हो: उमेश 
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कालीन निर्यातक रामचंद्र यादव ने कहा कि छह महीने से इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम की तरफ टकटकी लगाए हैं। इस स्कीम के बंद होने से अब तक निर्यातकों के चार अरब के कालीन के ऑर्डर निरस्त हो चुके हैं। यह स्कीम निर्यातकों के कर्ज पर लगने वाले ब्याज को कम करती है। स्कीम बंद होने से निर्यातकों को ऊंची ब्याज दर पर बैंक से लोन लेना पड़ रहा है। मार्च 2014 में पूर्व सरकार के कार्यकाल में बंद हुई इस स्कीम को अप्रैल में रीलांच होना था, लेकिन मौजूदा सरकार भी इस पर ध्यान नहीं दे पाई है। इससे निर्यातकों पर ब्याज का बोझ बढ़ता जा रहा है। इस स्कीम से केवल निर्यातक ही नहीं बल्कि लघु, सूक्ष्म व मध्यम (एमएसएमई) उद्यमी भी लाभांवित होंगे। यह स्कीम एमएसएमई व निर्यातकों को उत्पादन व निर्यात को बढ़ाने के लिए लाई गई थी। सीईपसी के वरिष्ठ प्रशासनिक सदस्य एवं निर्यातक उमेश कुमार गुप्ता मुन्ना ने बताया कि इस स्कीम के जरिये निर्यातकों को रियायती कर्ज मुहैया कराया जाता था। ब्याज पर दो फीसदी की रियायत दी जाती थी। लेकिन अचानक बंद हुई इस स्कीम के बाद अरबों के ऑर्डर निर्यातकों को कैंसिल करने पड़े। कालीन के निर्माण की लागत बढ़ गई पर ऑर्डर छह महीने पूर्व बुक थे। दाम बढ़ाने पर ऑर्डर कैंसिल कर दिए हैं। स्कीम के दोबारा शुरू नहीं होने से एमएसएमई सेक्टर के निर्यातकों के साथ ही हैंडीक्राफ्ट, कारपेट, रेडिमेड गारमेंट, प्रोसेस्ड एग्रीकल्चर प्रोडक्ट, स्पोर्ट्स गुड्स, ट्वॉयज, इंजीनियरिंग गुड्स आदि से जुड़े निर्यातकों को काफी नुकसान हो रहा है। 






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(सुरेश गांधी)

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