समाज की सभी समस्याओं का निराकरण, मौलिक अधिकारों में - श्री दुबे
- प्रोग्राम लेसन इन लॉ पर कार्यशाला सम्पन्न, जिला अधिकारियों ने जाने मौलिक कर्त्तव्य
- न्यायाधीश श्री गौरीशंकर दुबे और श्री गंगाचरण दुबे ने दी जानकारी
खण्डवा (13,अक्टूबर,2014) - सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सोमवार को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्ट्रेट सभागृह में आयोजित कार्यशाला में सभी जिला अधिकारियों ने अपने मौलिक कर्त्तव्यों को जाना। साथ ही संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों के निर्वहन में कर्त्तव्यों की पालना के महत्व को समझा। प्रोग्राम लेसन इन लॉ विषय पर आयोजित कार्यशाला में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री गंगाचरण दुबे ने अपने मौलिक कर्त्तव्यों की जानकारी एवं महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि यदि हम समाज की समस्याओं की बात करे। तो समाज की सभी समस्याओं का निराकरण संविधान में उल्लेखित मौलिक कर्त्तव्यों में है। इसलिए हमें देश के संवेधानिक कर्त्तव्यों के प्रति संवेदनशील होकर कार्य करना होगा। इसके साथ ही कार्यशाला में विशेष न्यायाधीश श्री गौरीशंकर दुबे ने सभी जिला अधिकारियों से 6 दिसम्बर को आयेाजित होने वाली नेशनल लोक अदालत में बढ़चढ़ कर उनके विभागों से जुड़े प्रकरणों का निराकरण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह भी हमारा नैतिक कर्त्तव्य है। अधिक से अधिक लोगों को हम योजनाओं का सार्थक लाभ दे। इस अवसर पर कार्यशाला में कलेक्टर श्री महेश अग्रवाल ने भी मौलिक कर्त्तव्यों की जानकारी देते हुए आगामी 6 दिसम्बर को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करने का भरोसा दिलाया। साथ ही उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम हितग्राहियों को एक-एक पौधा उपहार स्वरूप जरूर देगें। इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक श्री मनोज शर्मा, सीईओ जिला पंचायत अमित तोमर , और अपर कलेक्टर एस एस बघेल भी उपस्थित थे।
51 क. मूल कर्तव्य - भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह -
(क) संविधान का पालन करें और उनके आदर्शो, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करें।
(ग) भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे।
(घ) देश की रक्षा करे और आह्यान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
(ड.) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरूद्ध है।
(च) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परीक्षण करे।
(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की, जिनके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दयाभाव रखे।
(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
(´) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊॅंचाइयों को छू ले।
यदि माता-पिता या संरक्षक है, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करे।
1 संविधान (बयालीसवॉं संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 11 द्वारा (3-1-1977 से) अंतः स्थापित।
2 संविधान (छियासीवॉं संशोधन) अधिनियम, की धारा 4 द्वारा (अधिसूचना की तारीख से) अंतः स्थापित किया जाएगा।
किशोर समाधि स्थल पहॅुचकर मंत्री श्री शाह ने अर्पित किए श्रृद्धासुमन
- कलेक्टर श्री महेश अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक मनोज शर्मा ने भी श्रृद्धांजलि दी
खण्डवा (13,अक्टूबर,2014) - सुप्रसिद्ध पाशर््व गायक किशोर कुमार जी की पुण्यतिथि के अवसर पर समाधि स्थल पहॅुचकर प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री कुॅंवर श्री विजय शाह ने श्रृद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर शहर की महापौर श्रीमती भावना शाह भी उपस्थित थी। वही कलेक्टर श्री महेश अग्रवाल, एवं पुलिस अधीक्षक श्री मनोज शर्मा ने भी श्रृद्धाजंली अर्पित की। इस अवसर पर मंत्री श्री शाह ने किशोर कुमार का सुप्रसिद्ध हरपनमोला अंदाज का गीत अपनी तो जैसे तैसे कट जाएगी को गुनगुनाकर उन्हें जहॉं स्वर श्रृद्धाजंलि भी दी। वही पुलिस अधीक्षक श्री मनोज शर्मा ने भी उनका गीत गुनगुनायॉ ंतो वही कलेक्टर श्री महेश अग्रवाल ने स्वरचित कविता के माध्यम से अपनी भावपूर्ण शब्द श्रृद्धांजलि श्री किशोर कुमार को अर्पित की।
13 अक्टूबर 2014 को नेशनल लोक अदालत हेतु जिला अधिवक्तासंघ में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्तागण एवं पक्षकरों के साथ बैठक का आयोजन
खण्डवा (13,अक्टूबर,2014) - 06 दिसम्बर 2014 को राष्ट्रीय स्तर पूरे देश में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। कार्यपालक अध्यक्ष श्री अजीत सिंह, मध्यप्रदेश राजय विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशन में जिला खण्डवा में लोक अदालत का आयोजन किया जावेगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अभिनंदन कुमार जैन द्वारा नेशनल लोक अदालत के आयोजन के इस क्रम में आज जिला अधिवक्ता सभागृह में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें जिला न्यायालय खण्डवा के समस्त न्यायाधीशगण, जिला अधिवक्तासंघ के अध्यक्ष, पदाधिकारीगण, समस्त अधिवक्तागण एवं पक्षकारगण उपस्थित हुए। बैठक का संचालन श्री गंगाचरण दुबे, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण , खण्डवा ने किया तथा नेशनल लोक अदालत में समस्त अधिवक्तागण एवं पक्षकरागणों से सहयोग की अपील की। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सरदार सिंह तंवर ने कहा कि आयोजित नेशनल लोक अदालत में अधिवक्ता अपना पूर्ण सहयोग कर अधिक से अधिक संख्या में प्रकरणों को राजीनामा से निपटाने मंे सहयोग करेंगे। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.ए. भाटे, ने अधिवक्तासंघ के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि इस लोक अदालत में हमें और कुछ नही गरीबों की मदद करना है।, जिससे अधिवक्ताओं को कम से कम उनकी दुआ तो मिलेगी।अधिवक्ता श्री लखन मण्डलोई, श्री एम.के. गुप्ता, श्री ऋषि गुप्ता, श्री मोहन गंगराड़े ने भी अधिवक्ताओं एवं पक्षकारगणों को संबोधित किया अधिवक्तागण ने व्यक्त किया कि गरीब की सेवा ईश्वर की सेवा है जिसके लिए अधिवक्ता संघ तत्पर है। तथा अधिवक्ता संघ लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में मामले निपटाने मंे सहयोग करेगा। श्री अभिनंदन कुमार जैन, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, खण्डवा ने कहा कि आज मैं अधिवक्ता संघ का नेशनल लोक अदालत के प्रति सहयोग देखकर अभीभूत हॅॅू। जिला न्यायाधीश ने यह भी व्यक्त किया कि लोक अदालत से पुराने मामले निराकृत होते है। खत्म नहीं होते विगत वर्ष 9000 समझौते योग्य मामलों मंे से 3000 मामले निराकृत होने पर भी 01 वर्ष बाद प्रकरणों की संख्या 11000 है। जो दर्शाती है कि समझौतों से शीघ्र सस्ता न्याय प्रदान करने की महती आवश्यकता है। तत्पश्चात श्री आर.के. दशोरा, द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश ने संबोधन किया कि लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण से जहॉं एक ओर पक्षकार को आर्थिक क्षति से लाभ मिलता है। वही लेाक अदालत आयोजन से न्यायालयों में लंबित मामले निपटने से बोझ कम होता है।
श्री गंगाचरण दुबे, सचिव, जिविसेप्रा ने व्यक्त किया कि लोक अदालत से -
- ऽ पक्षकारों के मध्य आपसी सद्भाव बढ़ता है व कटुता समाप्त होती है।
- ऽ समय, धन व श्रम की बचत होती है।
- ऽ लोक अदालतों में निराकृत मामलों मंे लगा न्याय शुल्क वापस हो जाता है।
- ऽ लोक अदालत द्वारा पारित आदेश , अवार्ड की निःशुल्क सतय प्रतिलिपि पक्षकारों को तुरंत प्रदान की जाती है।
- ऽ लोक अदालत का आदेश, अवार्ड अन्तिम होता है व इसके विरूद्ध कोई अपील नही होती है।
- ऽ नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल एवं समस्त बैंको द्वारा लोक अदालत के समय दी जाने वाली विशेष सुविधाओं (छूट) का लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है।
- ऽ प्रकरण के पक्षकार स्वयं के प्रकरणों में राजीनामा करने के साथ - साथ अपने पड़ोसी तथा गांववालों के अन्य प्रकरणों में भी राजीनामा कराने में सहयोग कर समाज - सेवा का लाभ प्राप्त कर सकते है।
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