बिहार सरकार ने राज्य के औद्योगिक विकास के लिए उद्योंगपतियों ने आगे आने की अपील करते हुए कहा है कि उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। बिहार के विकास आयुक्त एस.के. नेगी ने अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेला में राज्य स्थापना दिवस के अवसर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उद्योगों की स्थापना के लिए सभी विभाग एक निश्चित सीमा के अन्दर स्वीकृति प्रक्रिया को पूरी करते हे। श्री नेगी ने कहा कि औद्योगिक समस्याों का समाधान खुद मुख्यमंत्र जीतन राम मांझी अपने स्तर पर भी कर रहे है। उद्योगों की सुविधा के लिए आधारभूत ढांचो के विकास पर भारी रकम खर्च की गई है और विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ किया गया है।
श्री नेगी ने बिहार को बड़ा बाजार बताते हुए कहा कि वहाँ सस्ते और कुशल मानव संसाधन है। इसके अलावा भूगर्भ जल भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विधि व्यवस्था की स्थिति काफी अच्छी है. जो उद्योगों की स्थापना के लिए आर्दश माहौल पैदा करता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिहार सरकार ने एक टास्क फोर्स का गठन किया है जो निवेशकों को हर तरह की सुविधा सुगमता से उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। इसके अलावा औद्योगिक समस्याों के समाधान के लिए औद्योगिक कैबिनेट की बैठक शुरू हो गई है। विकास आयुक्त ने कहा कि सामान्य उद्यमियों की तुलना में महिला उद्यमियों को पाँच प्रतिशत अधिक अनुदान दिया जा रहा है।
श्री नेगी ने बताया कि सरकार ने हाल के वषा6 में तीन लाख करोड़ रूपये के उद्योगों की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इनमें से दो लाख करोड़ रूपये केवल ऊर्जा के क्षेत्र के लिए है। उन्होंने ऊर्जा उद्योगों की स्थापना के लिए कोल लिंकेज की समस्या आ रही है जिसे केन्द्र सरकार के समक्ष रखा गया है। उन्होंने बताया कि हाल के वषा6 में 272 उद्योगों की स्थापना हुई है तथा।76 का निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी निवेश हुआ और कई राइस मिलों की स्थापना हुई हैं। राज्य में चीनी मिल और स्टील के क्षेत्र में भी उद्योगपतियों ने रूचि ली है। उन्होंने कहा कि बिहार में दुग्ध उत्पादन. मत्स्य पालन. पोल्ट्री तथा कृषि के क्षेत्र में निवेश की भारी संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि के क्षेत्र में मशीनीकरण करना चाहती है. जिसके लिए भारी निवेश की जरूरत है। श्री नेगी ने कहा कि राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर 5000 करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे।

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