दिल्ली में अब फिर से विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने सूबे में अपनी सरकार बना पाने में असमर्थता जताई है। तीनों दलों के नेताओं ने उपराज्यपाल नजीब जंग से विधानसभा को भंग कर चुनाव कराने की हिमायत की है। उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार ताजा राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर उपराज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेज दी है।
ऐसा समझा जा रहा है कि रिपोर्ट में उन्होंने दिल्ली में सरकार के नहीं बन पाने की हकीकत के मद्देनजर पांचवीं विधानसभा को भंग करने की सिफारिश की है। यदि विधानसभा तत्काल भंग हो जाती है तो कोई ताज्जुब नहीं कि दिल्ली में विधानसभा के चुनाव जम्मू एवं कश्मीर और झारखंड के साथ आगामी दिसंबर में ही करा लिए जाएं। राजनिवास से जारी एक बयान में कहा गया है कि उपराज्यपाल ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय व वरिष्ठ विधायक प्रो. जगदीश मुखी, कांग्रेस विधायक दल के नेता हारून यूसुफ ओर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से सोमवार को सूबे में नई सरकार के गठन को लेकर बातचीत की। तीनों ही दलों के नेताओं ने सरकार बनाने में अपनी असमर्थता जताई। अब उपराज्यपाल राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे।
आपको बता दें कि बीते 14 फरवरी को अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद राजधानी में 17 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। उपराज्यपाल ने केजरीवाल सरकार की उस सिफारिश को मानने से इन्कार कर दिया था कि विधानसभा को भंग कर दिया जाए। उन्होंने विधानसभा को निलंबित स्थिति में रखते हुए सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की थी, जिसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके खिलाफ आप सुप्रीम कोर्ट में चली गई। बता दें कि उपराज्यपाल ने सितंबर में एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी थी जिसमें विधानसभा को भंग करने के बजाए यहां सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का एक मौका देने की सिफारिश की गई थी।
हाल ही में राष्ट्रपति ने उपराज्यपाल की रिपोर्ट पर अपनी सहमति जता दी और दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने भी उपराज्यपाल को सूबे में सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशने का समय दे दिया। लेकिन अब तीनों राजनीतिक दलों द्वारा सरकार बनाने में असमर्थता जताए जाने के बाद दिल्ली में नए सिरे से चुनाव कराया जाना तय हो गया है।
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