राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री द्वारा बस दुर्घटना पर शोक व्यक्त
शिमला, 23 नवंबर ( विजयेन्दर शमौ ) । राज्यपाल श्रीमती उर्मिला सिंह तथा मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज सिरमौर जिले के राजगढ़ के हरीपुरधार के समीप हुई निजी बस दुर्घटना में मारे गए 6 लोगों के प्रति गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की है।
मुख्यमंत्री ने मानवीय सेवा में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका को सराहा
शिमला, 23 नवंबर ( विजयेन्दर शमौ ) । मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि गरीब, जरूरतमंद एवं मानवता की सेवा करना ईश्वर की सेवा के समान है तथा मानवता की सेवा में ही सच्ची खुशियां निहित हैं। मुख्यमंत्री आज हमीरपुर जिला के सुजानपुर टिहरा में जन कल्याण के प्रति समर्पित गैर सरकारी संगठन सर्वकल्याणकारी संस्था के 15वें वार्षिक समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिज्ञों को समर्पित होकर जनसेवा करनी चाहिए क्योंकि लोगों ने उन्हें यह बेहतर अवसर प्रदान किया है। महात्मा गांधी का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि सही अर्थों में सामाजिक कार्यकर्ता थे, यही वजह है कि देशवासी उन्हें भरपूर प्रेम करते थे। उन्होंने कहा कि ऐसी बहुत सी गैर सरकारी संस्थाएं हैं जो समाज सेवा से जुड़ी हैं परन्तु सर्वकल्याणकारी सभा ने अपनी विशेष पहचान बनाई है और लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ी है। सर्वकल्याणकारी संस्था के अध्यक्ष श्री राजिन्द्र राणा के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि श्री राणा राजनीतिज्ञ से अधिक एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने लोगों से भी मानवमात्र की सेवा के लिए कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सुजानपुर टीहरा एक ऐतिहासिक महत्व का स्थल है तथा हमें अपनी परम्परओं एवं भाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सुजानपुर टीहरा के समान प्रदेश के अन्य भागों जैसे चम्बा, मंडी इत्यादि में स्थित बड़े मैदानों के संरक्षण की आवश्यकता है, क्योंकि ये मैदान आजादी पूर्व के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमीरपुर जिले ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार के प्रयासों से हमीरपुर का गठन संभव हुआ। उन्होंने कहा कि आज हमीरपुर राज्य का सबसे साक्षर जिला है और प्रदेश सरकार इसे शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रयासरत है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में चंबा तथा सिरमौर के साथ-साथ हमीरपुर में भी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की है ताकि जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। वीरभद्र सिंह ने वर्तमान प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान हमीरपुर जिला तथा विशेषकर सुजानपुर टीहरा में करोड़ों रुपये की लागत से किए गए विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उप मंडल आरम्भ करने के साथ-साथ क्षेत्र में मिनी सचिवालय भवन का भी निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र में विकास गतिविधियों को कार्यान्वित करने में लोगों के सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोग भाईचारे एवं सदभावना के साथ रहते हैं तथा लोगों को ऐसे समाज विरोधी तत्वों से सावधान रहना चाहिए जो लोगों को ऊपरी व निचले हिमाचल के नाम पर बांटने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग कभी भी प्रदेश के सच्चे हितैषी नहीं हो सकते। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुजानपुर को स्तरोन्नत कर नागरिक अस्पताल तथा सुजानपुर टिहरा में नये बस अड्डे के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुजानपुर टिहरा में विपणन यार्ड के निर्माण की संभावनाओं को तलाशा जाएगा, जिसके लिए उन्होंने कृषि उत्पादन विपणन समिति को इस मामले पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम पंचायत बगैड़ा के बीड़, ग्राम पंचायत सकन्दर के सिसवां तथा ग्राम पंचायत टिपरी के नौंहगी में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्रों को आरम्भ करने की भी घोषणा की। उन्होंने राजकीय माध्यमिक पाठशाला खेरी तथा माध्यमिक पाठशाला बधेड़ा को स्तरोन्नत कर उच्च पाठशाला करने की भी घोषण की।
मुख्यमंत्री ने राज्य में वित्तीय संकट को नकारा
शिमला, 23 नवंबर ( विजयेन्दर शमौ ) । हमीरपुर जिले के सुजानपुर टिहरा में आज आयोजित सर्वकल्याणकारी संस्था के 15वें वार्षिक समारोह के पश्चात मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में वित्तीय संकट की अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक है और वित्तीय संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। कहा कि विकास कार्यों को कार्यान्वित करने के लिए हर राज्य केन्द्र सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त करता है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय संकट के सम्बन्ध में भाजपा द्वारा फैलाई गई चर्चाएं वास्तविकता से कोसों दूर हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने कार्यकाल के दौरान भी राज्य में विकासात्मक गतिविधियों को कार्यान्वित करने के लिए ऋण लिए थे तथा प्रत्येक सरकार केन्द्र सरकारों से ऋण लेती है। यदि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने केन्द्र से ऋण लिया है तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों को कार्यान्वित करने के लिए राज्य सरकार के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध है।
सर्व शिक्षा अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन में हिमाचल अव्वल
शिमला, 23 नवंबर ( विजयेन्दर शमौ ) । प्रारम्भिक स्तर पर गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने प्रभावी पग उठाए हैं। गुणात्मक शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। हिमाचल देश के गिने-चुने राज्यों में से एक है, जहां प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को हासिल किया गया है और अब, प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में एक है। प्रदेश में जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम के प्रयासों की पूर्ति के लिये सर्व शिक्षा अभियान को शुरू किया गया था। इसके माध्यम से सभी बच्चों में मानवीय क्षमताओं में निखार लाने का अवसर प्रदान करने की कोशिश भी की गई है।सर्व शिक्षा अभियान एक निश्चित समयवाधि के भीतर प्राथमिक तथा अपर प्राथमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा सुनिश्चित बनाने पर केन्द्रित कार्यक्रम है।गुणात्मक शिक्षा में सुधार की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भारत सरकार ने भी प्रशंसा की है। वर्ष 2013-14 में पहली से आठवीं कक्षा तक की उपलब्धियों को लेकर किए गए सर्वेक्षण में मानव संसाधन मंत्रालय ने प्रदेश की पीठ थपथपाई है। हिमाचल प्रदेश में सर्व शिक्षा अभियान द्वारा किए गए आंकलन सर्वेक्षण के आधार पर एक स्वतन्त्र एजेन्सी ‘स्कौच’ ने प्रदेश को ‘स्कौच ऑर्डर ऑफ मेरिट’- भारत की उत्कृष्ट शासन परियोजना-2014 से सम्मानित किया है।हिमाचल प्रदेश में सर्व शिक्षा अभियान के सफल कार्यान्वयन के सार्थक परिणाम सामने आये हैं। प्रारम्भिक शिक्षा के लिये मिश्रित शैक्षणिक विकास सूची में प्रदेश 12वें से चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह सब प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के प्रत्येक भाग में शिक्षण संस्थान खोलने तथा शिक्षा जैसे बृहद क्षेत्र के लिये समुचित बजट का प्रावधान करने का प्रतिफल है। इस वित्त वर्ष के दौरान शिक्षा पर 4,282 करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे हैं, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में सर्वाधिक हैं। वर्ष 2014-15 के दौरान एसएसए के लिये 250 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वित्त वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। एसएसए के माध्यम से राजकीय पाठशालाओं में अधोसंरचना विकास पर अभी तक 426.18 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। पहली से आठवीं कक्षा तक लर्निंग इंडिकेटर विकसित करने वाला हिमाचल एक मार्गदर्शक राज्य बनकर उभरा है, और ये अध्ययन सूचक प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2014-15 से कार्यान्वित किये गये हैं। इसके अलावा, प्रदेश प्रारम्भिक स्तर तक सभी बच्चों का बृहद उपलब्धि सर्वेक्षण करने वाला देश का पहला राज्य है। अध्ययन स्थिति का स्कूल स्तर पर जबकि विस्तृत स्तर पर जिला तथा राज्य स्तर पर सर्वेक्षण किया जा रहा है।कस्तूरबा गान्धी बालिका विद्यालयों और लर्निंग लीडरशिप फांउडेशन पायलट स्कूलों में अध्ययनरत लड़कियों के सशक्तिकरण के लिये विज्ञान, प्रोद्यौगिकी एवं नवीन प्रक्रिया में यथोचित सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। देश के 279 कस्तूरबा गान्धी बालिका विद्यालयों से 22,946 लड़कियों में प्रदेश की तीन लड़कियों ने उत्कृष्ट स्थान हासिल किया। इन लड़कियों ने राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र संग्रहालय, नई दिल्ली में 7 नवम्बर, 2014 को आयोजित अभिनन्दन समारोह में भाग लिया। प्रदेश ने सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिये प्रशिक्षण कैलेण्डर विकसित किया है। बैठकों, कार्यशालाओं, फीडबैक, बेसलाईन और मॉनीट्रिंग रिपोर्टस् के आधार पर प्रशिक्षण की आवश्यकता का आंकलन किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान स्कूलों में अध्ययन सत्र को सुनिश्चित बनाकर प्रशिक्षण को पूर्व के मुकाबले अधिक व्यवहारिक बनाया गया है। स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत स्कूलों में ही प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इस परियोजना के तहत तकनीकी का उपयोग करके अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। अध्ययन के मापदण्डों और स्कूलों में सतत् एवं वृहद मूल्यांकन (सीसीई) के कार्यान्वयन को कारगर बनाने के लिये विषय व कक्षावार आंकलन शीट को विकसित किया गया है। पहली से पांचवी कक्षा तक के पाठ्यक्रम को संशोधित किया गया है। कला शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिये भारतीय ब्रिटिश परिषद् तथा डी.ई.ए.ए एवं एन.सी.ई.आर.टी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एकीकृत कला अध्ययन कार्यक्रम आरम्भ किया गया है। ‘प्रथम’ की भागीदारी से विज्ञान और गणित विषयों के पाठन में स्कूलों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के अन्तर्गत लाया गया है। इन विषयों के शिक्षण में आईसीटी का उपयोग करने के लिये सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। अप्पर प्राईमरी स्तर पर विज्ञान और गणित विषयों के अध्ययन के उद्देश्य से एक सौ स्कूलों को ‘प्रथम’ के अन्तर्गत शामिल किया गया है। प्राथमिक पाठशालाओं में पहली कक्षा में प्रवेश की दर को बढ़ाने के लिये मौजूदा प्राथमिक पाठशालाओं के परिसर में ही आंगनवाड़ी केन्द्रों को स्थापित किया जा रहा है।

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