सुलह की चर्चाओं के बीच, आखिर छुप क्यों रहे यशपाल
- कहीं आर्य को बेपर्दा होने का डर तो नहीं ! बढ़ते सिरफुटव्वल देख केन्द्र करेगा हस्तक्षेप
देहरादून, 2 नवम्बर (राजेन्द्र जोशी )। काबीना मंत्री यशपाल आर्य गुम हो गए हैं। इस कथित गुमशुदगी के बाद से आर्य और सीएम के सलाहकार रणजीत रावत के बीच हुए कथित विवाद पर तमाम सवालात खड़े हो रहे हैं। अहम बात यह है कि अगर आर्य के साथ वाकई में कुछ गलत हुआ है तो सामने आकर उसके विरोध में क्यों नहीं बोलते। मीडिया की सुर्खियां बन रहे इस कथित विवाद की सही तस्वीर जनता के सामने क्यों नहीं रख रहे हैं, या कहीं ऐसा तो नहीं कि आर्य को यह पता है कि इस हमाम के सब नंगे हैं और वह भी तब बेपर्दा न हो जाएँ. लिहाजा चुप्पी को ही वे बेहतर हथियार मान रहे हों. वहीं मामले के सिर से उपर निकलता देख अब केन्द्रीय आला कमान भी सक्रिय हो गया है इस सिलसिले में (कल) सोमवार को पार्टी की प्रदेष प्रभारी अम्बिका सोनी व सह प्रभारी संजय कपूर प्रदेष के नेताओं की नब्ज टटोलने आ रहे हैं जिसका विविवत् कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है। विवाद का मामला सुर्खियों में आने के बाद से ही आर्य अडरग्राउंड से हो गए हैं। न किसी से मिल रहे हैं और न ही किसी सरकारी बैठक में शिरकत कर रहे हैं। इतना ही नहीं सीएम हरीश रावत की समीक्षा बैठक से भी उन्होंने किनारा कर लिया। कहा जा रहा है कि आर्य ने मुख्यमंत्री को कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफ तक भेज दिया है। इस इस्तीफे का सच भी सामने नहीं आ रहा है। सीएम दफ्तर ने भी मौन साध रखा तो आर्य खुद ही गुम हो गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यशपाल आखिर कहां और क्यों गायब हो गए हैं। इस प्रकरण से सरकार की एकजुटता पर दाग लगते दिखाई दे रहे हैं लेकिन आर्य जुबां खोलने को तैयार ही नहीं है। अहम बात यह है कि अगर ऐसा कोई विवाद हुआ ही नहीं है तो आर्य या फिर सरकार की ओर से मीडिया में आ रही इन खबरों का खंडन करके मामला शांत क्यों नहीं किया जा रहा है। अगर विवाद और अभद्रता की बात सहीं है तो आर्य इस्तीफा देकर गायब क्यों हो गए। उन्हें जनता के सामने सारी बात रखनी चाहिए कि सरकार कैसे चल रही है। मगर ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है। इससे तमाम तरह की चर्चाएं तेज हो रही हैं। चर्चा तेज हो रही है कि मामला अवैध खनन से जुड़ा बताया जा रहा है और इस प्रकरण में आर्य खेमे के कुछ लोग खनन से जुड़े बताये जा रहे हैं जिनकी वजह से विवाद पैसा हुआ है इसी वजह से आर्य मौन साधे हैं। अगर उन्होंने रणजीत रावत पर सामने आकर हमला किया और रणजीत रावत ने भी जुबां खोल दी तो कई चेहरों पर पड़े नकाब उतर जाएंगे। यही वजह है कि आर्य दबाव की सियासत कर रहे हैं। शायद उनकी सोच यह है कि इस्तीफे की धमकी से सरकार पर दबाव बनाकर रणजीत रावत पर काबू किया जा सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आर्य की यह सियासत कितनी कामयाब होती है। बहरहाल, नतीजा चाहें जो भी निकले लेकिन फिलवक्त तो इस प्रकरण से सरकार की छवि पर प्रतिकूल असर ही पड़ रहा है। वहीँ अब यह चर्चाएँ भी तेज हो गयी है कि दोनों खेमों में सुलह की कवायद शुरू हो चुकी हैं.
तो राह हो जाएगी निष्कंटक
माना जा रहा है कि इस विवाद में अगर जीत यशपाल आर्य की होती है तो हरीश सरकार के रहते उनकी राह पूरी तरह से निष्कंटक हो जाएगी। दरअसल, हरीश सरकार में रणजीत रावत खासी ताकतवर भूमिका है। अगर रणजीत को पैर पीछे खींचने पड़े तो इस सरकार में कोई भी दूसरा शख्स आर्य के सामने आने की हिम्मत ही नहीं कर पाएगा।
अब तक जीतते रहे हैं आर्य
काबीना मंत्री आर्य नाराजगी जताकर इससे पहले भी अपनी मर्जी के काम करवाते रहे हैं। कुमाऊं में अवैध खनन की किरकिरी बने एक आईपीएस को हटवाकर ही उन्होंने चैन की सांस ली थी। ऊधमसिंह नगर के एक डीएम को बचाने के लिए और फिलवक्त इसी जिले में तैनात एसएसपी की पोस्टिंग के लिए भी आर्य ने इसी हथियार का उपयोग किया था।
गवर्नस गोल्ड कप सेलिंग रिगाटा की फाइनल रेस का शुभारंभ किया
देहरादून, 2 नवम्बर (निस)। रविवार को उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा0 अज़ीज़ कुरैशी ने गवर्नस गोल्ड कप सेलिंग रिगाटा के अन्तिम दिन की प्रतियोगिता के फाइनल रेस का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रतियोगियों का परिचय प्राप्त कर इसकी शुरूआत की। राज्यपाल ने प्रतियोगिता का पूरे समय तक अवलोकन कर प्रतियोगियों की हौंसला अफजाई की। इस अवसर पर राज्यपाल डा0 अज़ीज़ कुरैशी ने कहा कि आपदा के कारण प्रभावित हुए प्रदेश के पर्यटन को नये आयाम देने तथा यहां केे पर्यटन को विश्व मानचित्र पर स्थापित करने में नैनीताल की झीलों में आयोजित की जाने वाली साहसिक पर्यटन की गतिविधियां मददगार हो सकती हंै। उन्होंने कहा कि हम आपदा में हताहत लोगों को वापस तो नहीं ला सकते, किन्तु अपने समेकित प्रयासों से आपदा प्रभावित क्षेत्रों के जन जीवन को फिर से सामान्य स्तर पर लाने के लिये हिम्मत के साथ हम खड़े हैं। जिन्दा काॅमे अपनी जिन्दादिली व समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बल पर आगे बढ़ती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे आयोजन प्रदेश को फिर से पर्यटन प्रदेश बनाने के लिए नई ऊर्जा व उत्साह प्रदान करने में भी सफल होंगे। प्रतियोगिता के अन्तिम दिन का मुकाबला सेना एवं नेवी की टीमों के मध्य आयोजित हुआ। इस अवसर पर वाइस एडमिरल एच.बिष्ट के साथ ही कमाडोर याट क्लब नैनीताल के बीर श्रीवास्तव, रिटायर्ड वाईस एडमिरल ए.आर.टंडन, डी.एस मझिथा, सीता टंडन, मुकुंद प्रसाद,विशाल खन्ना, आरएल नन्दा, धनुषवीर सिंह, शिवांग अग्रवाल, राजीव मेहता आदि उपस्थित थे।
14 वर्षो में राष्ट्रीय दलों ने प्रत्येक उत्तराखण्डी को 31 हजार रूपये का कर्जदार बनाया: यूकेडी अध्यक्ष
देहरादून, 2 नवम्बर (निस)। उत्तराखण्ड क्रांति दल में रविवार को कई विधानसभाओं से आये लोगों ने सदस्यता ग्रहण कर मजबूती प्रदान करने का संकल्प लिया। उज्जवल रेस्टोरेंट मंे हुये सदस्यता ग्रहण समारोह मंे दल के केन्द्रीय अध्यक्ष त्रिवेन्द्र सिंह पंवार ने दल मंे जु़ड़े लोगों का स्वागत करते हुये कहा कि आज राष्ट्रीय दलों के लिए उत्तराखण्ड लूट की मंडी बन गया है। राष्ट्रीय दलों का उत्तराखण्ड से कोई लेना नहीं है। 14 वर्षो मंे उत्तराखण्ड विकास के बजाय विनाश की ओर धकेला जा रहा है। 14 वर्षो में राष्ट्रीय दलों ने प्रत्येक उत्तराखण्डी को 31 हजार रूपये का कर्जदार बना दिया है। प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है परन्तु सरकार फिजूल खर्ची पर मशगूल है। आज दल मंे जुड़ी हिमानी वैष्णव को देहरादून महानगर महिला इकाई का संयोजक बनाया गया। दल में शामिल होने वालों में गोवर्द्धन प्रसाद ध्यानी, बी0एस0 सजवाण, हरेन्द्र नेगी, सुनील ममंगाई, सुनील बहुगुणा, माया डिमरी, सुमन बहुगुणा, कुसुम ध्यानी, सुरेन्द्र गुसांई, रेखा गुसांई, शिवनाथ मलांकार, नीलम मलांकार, रणवीर कण्डियाल, महिपाल सिंह रावत, हिमानी वैष्णव, भारती कुकरेती, बीना डंगवाल, भागीरथी रावत, गोविन्दी जग्गी, उमा बरमोला, सीमा देवी, संदीप रावत, रविन्द्र गुसांई, संदीप सिंह रावत, रविन्द्र गुसांई, नरेन्द्र बिष्ट, ललित गुप्ता, नीतिन बिष्ट, अजीतेश सिंह, राकेश दास, कंचन लखेड़ा, रेनू रावत सहित सैकड़ों ने उत्तराखण्ड क्रांति दल की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम मंे वीरेन्द्र मोहन उत्तराखण्डी, लताफत हुसैन, शशि भूषण भट्ट, चतुर सिंह नेगी, सुरेन्द्र दत्त पेटवाल, अनूप नेगी, किशन रावत, मनमोहन लखेड़ा, बासुसती, नागेन्द्र रतूड़ी, गीता बिष्ट, अशोक नेगी, आदि उपस्थित रहे।
जनमोर्चा ने मुख्यमन्त्री से मांगा त्यागपत्र,बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए अभी भी नहीं मिला धन
देहरादूऩ,2 नवम्बर,(निस)। उत्तराखण्ड जनमोर्चा ने धारचूला के विधायक और प्रदेश के मुख्यमन्त्री हरीश रावत से बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए धन उपलब्ध करा पाने में नाकाम रहने पर त्याग पत्र मांगा है। जनमोर्चा ने प्रदेश के राज्यपाल को पत्र भेजकर कहा कि मुख्यमन्त्री की विधानसभा में यह हाल है तो राज्य के अन्य इलाकों में क्या स्थिति होगी। इसका अन्दाजा लगाया जा सकता है। जनमोर्चा ने कहा कि मुख्यमन्त्री अगर धारचूला और मुनस्यारी के गांव को बचाने की इस योजना को बजट नहीं दिला पा रहे तो उन्हें विधायक के पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उत्तराखण्ड जनमोर्चा की जिला मुख्यालय में रविवार को हुई बैठक में राज्यपाल को पत्र भेजकर कहा गया कि वह राज्य सरकार को इस बारे में तत्काल निर्देश दे। जनमोर्चा की बैठक की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय संयोजक जगत सिंह मर्तोलिया ने कहा कि 16-17 अक्टूबर को मुनस्यारी और धारचूला में हुई मुख्यमन्त्री की समीक्षा बैठक में बाढ सुरक्षा कार्य का मामला उठा था। मुख्यमन्त्री ने तत्काल सिचाईं विभाग के प्रमुख सचिव को फोन कर दो दिन के भीतर बाढ सुरक्षा का बजट रिलीज करने का आदेश दिया था। मुख्यमन्त्री के दौरे के बाद 15 दिन का समय बीत चुका है। अभी तक मुख्यमन्त्री का आदेश धरातल पर नहीं उतरा। मर्तोलिया ने कहा कि जब सरकार के नौकरशाह मुख्मन्त्री के आदेश को रद्दी की टोकरी में ढाल रहे तो इस राज्य का क्या होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के नौकरशाह मुख्यमन्त्री के काबू में नहीं है और मुख्यमन्त्री धारचूला और मुनस्यारी के नदी किनारें बसे गांवों को बचाने के लिये चल रहे बाढ सुरक्षा कार्य के लिये बजट जारी नहीं करा पा रहे है तो मुख्यमन्त्री को अपने पद से त्याग पत्र दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शीतकाल शुरू होते ही नदी का जल स्तर घटने लगा है इस बीच तेजगति से बाढ सुरक्षा का कार्य नहीं हुआ तो फिर आने वाली बरसात में इन गांवों को बचाया जाना सम्भव नहीं होगा। मर्तोलिया ने कहा कि धारचूला, गोठी, निगांल पानी, बलुवाकोट, जौलजीवी, बंगापानी,मदकोट, तेजम, नाचनी, बांसबगड़ सहित नदी किनारें बसे गांवों और शहरों में बाढ सुरक्षा का कार्य बजट नहीं मिलने के कारण ठेकेदारों ने आधे में छोड दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को तत्काल इसका बजट जारी करना चाहिए। इन नेताओं का कहना है कि धारचूला और मुनस्यारी में बाढ़ सुरक्षा कार्य का बजट एक अरब तक पंहुच गया है। नाम मात्र के लिये सरकार ने धारचूला में सिंचाई विभाग का अधिशासी अभियन्ता कार्यालय खोला है लेकिन पिथौरागढ़ और धारचूला का एक ही अधिशासी अभियन्ता तैनात होने के कारण अधिशासी अभियन्ता सप्ताह में मात्र दो दिन ही धारचूला में नजर आते है। इस कारण करोड़ो रूपये की योजना के बावजूद बाढ़ सुरक्षा के कार्य को देखने के लिये धरातल पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से भी गुणवत्ता के साथ ही कार्य प्रगति भी असन्तोषजनक बनी हुई है। बैठक में अनिल धामी, तिलक नबियाल, बिमला दरियाल, राजेन्द्र बिष्ट, मंजू धामी, राकेश बिष्ट, रमेश धामी, प्रकाश परिहार, रतन सिंह नेगी, हेमा बिष्ट, सरोजनी नेगी आदि मौजूद थे।
राष्ट्र विकास के लिए महिलाओं का होना अनिवार्य-इंदिरा
देहरादून,2 नवंबर,(निस)। समाज व देश में बच्चियों की घटती हुई संख्या चिंता का विषय है। परिवार एवं राष्ट्र के विकास के लिए बच्चियों एवं महिलाओं का होना जरूरी है। यह बात वित्त मंत्री डा॰ इन्दिरा हृदयेश ने रविवार को जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बेटी बचाओं कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होनें कहा कि कन्या बचाओं हमारा उद्देश्य होना चाहिए। बच्चियों की परवरिश, उचित शिक्षा एवं उनकों समाज में बराबरी का अधिकार दिया जाना बहुत जरूरी है क्योंकि एक शिक्षित महिला दो परिवारों का उद्धार करती है। उन्होनें बताया कि जनपद नैनीताल में महिलाओं के अनुपात में काफी कमी आ गयी थी किन्तु जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य महकमें के अथक प्रयासों एवं जन सहयोग से बच्चियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस सफलता के लिए उन्होनें जिलाधिकारी अक्षत गुप्ता को बधाई दी है। उन्होने जन साधारण से अपील की है कि वह बेटा-बेटी में अन्तर न करें। बेटियों ने विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन कर देश का मान बढ़ाया है।

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