त्रिपाटी आयोग की रिपोर्ट रखने हेतु कैबिनेट की आपात बैठक बुलवांए सीएम: धीरेन्द्र प्रताप
देहरादून, 4 नवम्बर(निस)। उत्तराखण्ड सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मन्त्री धीरेन्द्र प्रताप ने उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री हरीश रावत से भाजपा शासन के दौरान हुए घोटालो की जांच की रिपोर्ट हेतु बनाए गए त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट पर फैसला लिए जाने हतु तत्काल राज्य काबीना की आपात बैठक बुलवाए जाने की मांग की है। मंगलवार को यहां जारी एक बयान में धीरेन्द्र प्रताप ने कहा है कि जबसे यह बात सार्वजनिक हुई है कि त्रिपाठी आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौप दी है,उसके बाद से जहां राज्य की एक करोड़ जनता इसकी जांच के निर्णयांे को जानने के लिए अत्यंत उत्सुक है वहीं भाजपा के बड़े नेताओ ने जिस तरह से चुनौती व ब्लैकमेलिग की हद तक पिछले तीन चार दिनांे में त्रिपाठी आयोग की सभांवित संस्तुतियाुे के बारे में बयान जारी किए हैं, उससे यह सन्देह पुख्ता हो रहा है कि भाजपा के राज में जरूर दाल में कुछ काला था तथा अब जब यह रिपोर्ट सार्वजनिक होने ही वाली है तो भाजपा नेताआंे के पसीने छूटने लगे हैं। धीरेन्द्र प्रताप ने कहा है कि न्याय के सिद्धांत के अनुसार न्याय देर से किया जाना अन्याय के ही समान है अतः एक राज्य आन्दोलनकारी के रूप में वे सरकार से मांग करते हैं कि इस रिपोर्ट पर चर्चा हेतु इस पर तत्काल राज्य कैबिनेट की आपात बैठक बुलवाई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होने कहा,उन जैसे राजनैतिक कार्यकर्ता बदले की भावना से कुछ भी किए जाने के विरूद्ध हैं जैसा श्री राबर्ड वाडा के मामले में भाजपा की केन्द्र सरकार का रूख दिखाई देता है, परन्तु चूंकि राजनेताआंे का कोई व्यक्तिगत जीवन नहीं होता, अतः उनके कर्म सार्वजनिक जांच के लिए सदैव सार्वजनिक ही समझे जाते हैं व भाजपा नेताओ को भी पब्लिक जांच के लिए सदैव बेखौफ तैयार रहना चाहिए।
खुशियों की सवारी योजना में पांच नये एम्बुलेंस वाहन शामिल, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने सुरेन्द्र सिंह नेगी ने दिखाई हरी झंडी
देहरादून, 4 नवम्बर(निस)। उत्तराखण्ड राज्य में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अन्र्तगत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से जीवीके ई.एम.आर.आई. द्वारा संचालित खुशियों की सवारी योजना में राज्य सरकार द्वारा के द्वारा पांच नये एम्बुलेंस वाहनों को शामिल किया गया है तथा इनका शुभारम्भ राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने अपने निवास से हरी झंडी दिखाकर किया। विदित हो कि इन एम्बुलेंस वाहनों को एक मीडि़या समूह द्वारा राज्य के स्वास्थ्य विभाग को प्रदान गया था, जो कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा खुशियों की सवारी योजना में शामिल किये गये हैं। इन सभी एम्बुलेंस वाहनों को जिला रुद्रप्रयाग में तैनात किया जायेगा। ज्ञात हो कि खुशियांे की सवारी योजना के माध्यम से राज्य में सरकारी अस्पतालों में प्रसव के उपरान्त जच्चा-बच्वा को सुरक्षित एवं निःशुल्क घर तक पहुॅचानेे की व्यवस्था की जाती है। इसके अतिरिक्त इस सेवा द्वारा राष्ट्रीय स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्र्तगत आवश्यकतानुसार विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया जाता है। उत्तराखण्ड राज्य में इस सेवा का शुभारम्भ 19 सितम्बर, 2011 को किया गया था तथा आरम्भ में इस योजना को किराये के वाहनों द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसके संचालन में अनेक प्रकार की कठिनाईयां हो रही थी। इस बात को ध्यान में रखते हुये उत्तराखण्ड सरकार द्वारा 30 मार्च 2013 को खुशियांे की सवारी योजना में 90 नये एम्बुलेंस वाहनांे को शामिल किया गया। खुशियों की सवारी योजना के संचालन का उत्तरदायित्व राज्य मंे गत छह वर्षों से अधिक की अवधि से 108 आपातकालीन सेवा का संचालन कर रही संस्था जीवीके ई.एम.आर.आई. संस्था को सौंपा गया है। इस अवसर पर पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने खुशियों की सवारी योजना का राज्य में सफलतापूर्वक संचालन करने पर जीवीके ई.एम.आर.आई. एवं स्वास्थ्य विभाग को बधाई दी तथा कहा कि खुशियों की सवारी योजना का लाभ उन महिलाओं (जच्चा-बच्चा) को निश्चित रुप से मिल रहा है, जिनका प्रसव राज्य के सरकारी अस्पतालों में हुआ है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इस सेवा से अधिक लाभान्वित हुई हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्र्तगत भी इस सेवा का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इस अवसर पर महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तराखण्ड, डा. जी. एस. जोशी ने भी खुशियों की सवारी योजना के सफल संचालन हेतु जीवीके ई.एम.आर.आई. की टीम को बधाई दी तथा कहा कि इस योजना के बेड़े में पांच नये एम्बुलेंस वाहनों के शामिल होने से और अधिक लोगों को इस सेवा का लाभ प्राप्त हो सकेगा तथा हमारा सदैव प्रयास रहेगा कि हम राज्य के नागरिकों को अपनी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएंे प्रदान कर सकें। इस अवसर पर जीवीके ई.एम.आर.आई. उत्तराखण्ड के स्टेट हैड मनीष टिंकू ने बताया कि इस सेवा द्वारा अब तक 1 लाख 50 हजार से अधिक लोगों को लाभ पहुॅचाया गया है इसके साथ ही उन्होंने इसक¢ सफल संचालन हेतु अपने सभी सहयोगियों, राज्य की जनता, उत्तराखण्ड सरकार, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन, मीडिया एवं अन्य सभी नागरिकों का हार्दिक धन्यवाद देते हुये कहा कि जीवीके ई.एम.आर.आई. की टीम उत्तराखण्ड राज्य के नागरिकों को सदैव अपनी मेहनत, लगन एवं निःस्वार्थ भावना से सेवाएंे प्रदान करती रहेगी। उन्होनें बताया कि खुशियों की सवारी योजना के माध्यम से जहाॅ आज राज्य में संस्थागत प्रसव को बढाने में सहायता मिली है वहीं स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को भी गम्भीर बीमारी होने पर इलाज हेतु यातायात सुविधा निःशुल्क रूप से प्रदान की जा रही है।
इस समारोह में मऩ्त्री सुन्दरलाल मन्द्रवाल, विधायक, घनसाली, भीमलाल आर्य, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. जी. एस. जोशी, डा. गुसाई, डा. प्रेम लाल,सीएमओ देहरादून डा. अग्रवाल तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। जीवीके ई.एम.आर.आई. की ओर से स्टेट हैड मनीष टिंकू के साथ नीलकंठ जुगरान, अनिल थपलियाल, डा. रिमांत गुप्ता, प्रियंका ध्यानी, सुधीर बिज्लवान, शैलेन्द्र सिहं, सुशील थपलियाल, सुबोध, अमित शर्मा, राजेन्द रावत, मनीष कैन्थ एवं अन्य सभी स्टाॅफ उपस्थित रहा।
पर्यटकों को उत्तराखण्ड आने से रोक रही है भयावह तस्वीरें
देहरादून, 4 नवम्बर(निस)। उत्तराखण्ड में पर्यटक आये भी तो कैसे आयें जब भी गुगल में उत्तराखण्ड को सर्च किया जाता है तो सामने आपदा भयावह की तस्वीरें आ जाती है। जबकि देश के किसी भी राज्य के बारें में सर्च किया जाता है तो गूगल इंजन में उन राज्यों के पर्यटक स्थल एवं रमणीय स्थल सामने आते हैं। उत्तराखण्ड में विद्युत उत्पादन एवं टुरिज्म को आदमनी का मुख्य स्रोत माना गया है। प्रदेश में टुरिज्म को बढावा देने के लिए टुरिज्म विभाग और सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। लेकिन प्रदेश में पर्यटकों की सख्या बढे तो बढे कैसे। वर्तमान युग इंटरनेट का युग है और अपने मंद पसंद के स्थलों पर घूमने से पहले यात्री इंटरनेट पर इन स्थानो का सर्च करता है। लेकिन जैसे ही उत्तराखण्ड को गुगल इंजन पर सर्च किया जाता है तो वर्ष 2013 मे केदारनाथ और गौरी कुड़ में आयी भयावह आपदा की तस्वीरें सामने आ जाती है। गूगल इंजन पर तस्वीरों में दिखाई देता है कि किस तरह लोग आपदा में फसें हुए है। कैसे अपने आप को बचाने की गुहार लगा रहे है और अपनो के खोने के गम के चीख पुकार कर रहे है। यहां तस्वीरों में दिखाई देता है कि आपदा में फंसे लोगों की आपदा राहत टीमें किस तरह बचा रही है। तस्वीरों में दिखाई दे रहा कि आपदा में मृतकों को अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इन भयावह दृशयों को देखकर लोग ऐसे ही डर जाते है। ऐसे हालत में कोई भी कैसे उत्तराखण्ड का रूख कर सकता है। प्रदेश सरकार दावा कर रही है कि चारधाम यात्रा के सभी मार्ग ठीक कर दिये गये है और यहां पर चारधाम यात्रा शुरू भी हो गयी है। एक लाख से अधिक श्रृद्धालुओं ने केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन कर लिये है। लेकिन गूगल इंजन तो सरकार के सभी कामों पर पलीता लगा रहा है। गूगल इंजन की तस्वीरों में तो सिर्फ तबाही दिखाई दे रही है। यहां पर कोई निर्माण दिखाई ही नहीं दे रहा है। प्रदेश का पर्यटन विभाग पर्यटकों की सख्या बढाने के लिए लाखों करोड़ो खर्च कर रहा है। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही दिखाई दे रहा है। विदेश से आने वाले पर्यटक जब भी प्रदेश के बारें मे जानकारी लेते होगे तो तबाही ही नज़र आती होगी।
अपराधों को ग्राफ लगातार बढ़ता हुआ
देहरादून, 4 नवम्बर(निस)। प्रदेश में अपराध का ग्राफ जितनी तेजी से बढ रहा है। खुलासे की गति उतनी ही धीमी है। अगर पुलिस विभाग के आंकड़ो पर गौर करें तो पिछले तीन वर्षो से केवल 60 प्रतिशत मामलों के ही खुलासे किये गये हैं। प्रदेश में अब भी कई बड़े मामलों का खुलासा पुलिस नहीं कर पायी है। जिसके कारण यह मामले अन्य जांच एजेंसी का स्थानान्तरित करने पड़े हैं। प्रदेश में लगातार अपराध का ग्राफ बढता जा रहा है लेकिन पुलिस इस मामलों के खुलासे में सुस्त नज़र आ रही है। अगर पुलिस विभाग के पिछले तीन साल के आंकड़ो पर गौर किया जाय तो पुलिस केवल 60 प्रतिशत मामलों का ही खुलासा कर पायी है। पुलिस ने वर्ष 2012 के कुल पंजीकृत 8525 मामलों में से 6672 मामलों को खुलासा किया है। वर्ष 2013 के कुल पंजीकृत 10674 मामलों में से 6947 मामलों को ही खुलासा किया है। जबकि 30 जून 2014 तक पंजीकृत 4288 मामलों में से 3247 मामलों का खुलासा किया है। पुलिस चोरी के मामलों में सबसे कम खुलासे कर पायी है। पुलिस ने वर्ष 2012 में चोरी के 953 मामलों में से केवल 498 मामलों का खुलासा किया है। जबकि 2013 में चोरी के 825 मामलों में से 541 का खुलासा किया है और 2014 में 429 मामलों में से 257 मामलों का खुलासा पुलिस ने किया है। वर्ष 2012 के 455, वर्ष 2013 के 284 और वर्ष 2014 के 172 मामले अब भी लंबित पड़े हुए है। जिनके अपराधी अब भी पुलिस गिरफ्त से दूर हैं। वर्ष 2012 के डकैती के एक, लूट के 18, वाहन लूट के 9, गृहभेदन के 182, वाहन चोरी के 636, चोरी के 455, हत्या के 40, बलवा के 21, बलात्कार के 2 और अन्य धाराओं में दर्ज 481 मामले ऐसे है जिनका अब तक खुलासा नहीं हो पाया है। तीन वर्ष का समय बीत जाने पर भी हत्या के 40 मामले अभी भी पुलिस फाईलों में ही बन्द है। इनमें से कई मामले अन्य जांच एजंेसी सीआईडी और सीबीआई को स्थानान्तरित कर दिये गये हैं। वर्ष 2013 के डकैती के 2, लूट के 18, वाहन लूट के 4, गृहभेदन के 114, वाहन चोरी के 476, चोरी के 243, चैन स्नेचिंग के 13, बलवे के 109, महिला अपहरण के 151, अपहरण के 1995, दहेज हत्या के एक, बलात्कार के 2 तथा अन्य धाराओं में दर्ज 595 मामलों का खुलासा पुलिस नहीं कर पायी है। वहीं वर्ष 2014 में जून माह तक लूट के 11, वाहन लूट के 5, गृहभेदन के 73, वाहन चोरी के 268, चोरी के 172, चेन स्नेचिंग के 6, हत्या के 26, बलवे के 15, महिला अपहरण के 41, अपहरण के 70, दहेज हत्या के 2, बलात्कार का एक मामला लंबित है। अपराधों के खुलासों के लेकर पुलिस के कार्य प्रणाली पर लगातार सवालिया निशान लग रहे हैं। तीन साल में हत्या के 104 मामले लम्बित है। पुलिस जब हत्याओं के खुलासे में ही नाकाम साबित हो रही है। तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य अपराधों में खुलासे को लेकर पुलिस कितनी सर्तक होगी।
क्रिस्टल कारर्पोरेशन से लौटायी जा सकती है निवेशकों को रकम
देहरादून, 4 नवम्बर(निस)। उत्तराखण्ड की चर्चित गैर सरकारी संस्था क्रिस्टल कारपोरेशन फिर से चर्चाओं मे आ गयी है विगत दिन 23 सितम्बर को दिल्ली हाई कोर्ट की और से अधिवक्ता एस बी चक को शासकीय प्रशासक नियुक्त कर पंाच इंजीनियरो के साथ उत्तराखण्ड पहुचकर क्षे़़त्र के तहसीलदारो व पटवारीयो को साथ लेकर कंपनी की परिसंपत्तियो की नैनीताल, भीमताल, हल्द्वानी, बेरीनाग, देहरादून, श्रीनगर, गढ़वाल, सहित जहा जहा क्रिस्टल की संपत्तिया मौजूद है वहा वहा पहुच कर जानकारी ली गई ऐसा होने से निवेशको को अपनी फंसी हुई रकम मिलने की आशा एक बार फिर जग गई है आज उत्तराखण्ड मे जगह जगह पर इसी बात को लेकर चर्चाए है तथा यह भी चर्चा है कि जिन लोगो ने कंपनी से ़ऋण लेकर दबा रखा है व जिन्होने परिसंपत्तियो पर अवैध कब्जा कर रखा है उनकी बैचेनी बढ गई है उल्लेखनीय है कि 1988-89 मे बरेली निवासी पी के सक्सेना राजीव जौहरी एल के पाठक ने क्रिस्टल के्रडिट इंडिया नाम से इस कंपनी की स्थापना की थी इस कंपनी ने जब उत्तराखण्ड मे व्यवसाय शुरु कियाा तो डा0 महेश पाठक को इसका क्षेत्रीय अधिकारी बनाया गया इस बीच बरेली के निदेशको ने भारी पैसा वसूल कर इस कंपनी को बंद करने का मन बना दिया था लेकिन डा0 महेश पाठक ने ऐसा नही होने दिया उन्होने इसकी कमान अपने हाथ मे लेकर इसे बंद होने से बचा लिया कंपनी के सर्वेसर्वा बनने के बाद उन्होने क्रिस्टल को बहुत उचाई तक पहुचा दिया अब यह क्रिस्टल के्रडिट कारपोरेशन के नाम से जाना जाने लगा लोगोे को इसके प्रति विश्वास भी हो गया कुछ ही वर्षो मे फाइनेंस के कारोबार के साथ क्रिस्टल कारपोरेशन पर्यटन, होटल, पिं्रटिग, मैग्नेसाइट, शिक्षा, तकनिकी शिक्षा, से लेकर टाउनशिप तक के कारोबार मे उतर गयी उत्तराखण्ड से बाहर देश मे ही नही फिजी तक मे कारपोरेशन ने अपनी शाखाए खोल दी फिजी के एक सिनेटर सहित संेवानिवृत्त आई ए एस प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रो की हस्तिया इसके निदेशक मण्डल मे शामिल हो गये अपनी एक दशक की यात्रा मे कारपोरेशन ने लोगो से करोडो रुपया जमा करवाया इस पैसे को अलग अलग कारोबार मे निवेश करना शुरु किया इस बीच क्रिस्टल कारपोरेशन ने कई औद्यौगिक और शैक्षिक संस्थानो कि स्थापना की इसके लिए करोडो रुपये कि अचल संपत्तियो सहित मेहरा गाव भीमताल हल्द्वानी देहरादून गैरसैण दिल्ली हरियाणा बनारस गोरखपुर सहित क्रिस्टल ने कई स्थानो मे जमीने खरीदी गई व इस दौरान 5 करोड से अधिक धन .़ऋण के रुप मे वितरित किया गया कारपोरेशन ने यहा के विकास की तमाम संभावनाओ पर कार्य किया पर्वतीय क्षेत्र मे यहा कि परिस्थितियो के अनुरुप रोजगार सृजन की जो पहल कारपोरेशन ने की यदि उसे उत्तराखण्ड सरकार गंभीरता से लेती तो शायद इसे बचाया जा सकता था लेंिकन ऐसा नही हो पाया आज जहा लोगो का कराडो रुपया फंसा है वही क्रिस्टल की करोडो की संपत्ति बर्बाद हो रही है इसे बिडंबना कहे या कुप्रबंधन इतना ही नही एक समय था जब क्रिस्टल कंपनी मे नौकरी पाने के लिए बडे बडे सरकारी अधिकारियो व मंत्री व नेताओ की सिफारिस आया करती थी व कई आवार्ड कंेद्र सरकार द्वारा महंेश पाठक को दिए गए है जानकारी के अनूसार कंपनी द्वारा अधिकतर पुलिस अधिकारी व नेताओ को ़ऋण दिया हैे कंपनी के डगमगाते वक्त इन लोगो ने फायदा उठा कर कंपनी को पैसा वापस देना बंद कर दिया और कंपनी के खिलाफ माहौल बना कर जगह जगह थाने मे रिपार्ट दर्ज की गई व कंपनी के आफिसो मे जाकर कर्मचारियो के साथ मारपीट व तोडफांेड की गई ये लोग समझ चुकंे थे कि यदि कंपनी बंद हो जायेगी तो इन लोगो को ऋण का पैसा वापस नही देना होगा वही कई पूर्व कंपनी कर्मचारियो का कहना है कि जब हम पुलिस अधिकारियो के पास ऋण वसूली के लिए जाते तो उल्टा बं द कर देनंे की धमकी देकर भगा दिया जाता था कई कर्मचारियांे का तो पुलिस प्रशासन ,द्वारा जमकर उत्पीडन किया गया कंपनी को बंद कराने मे मुख्य भूमिका ऋण धारको का माना जाता है साथ ही यदि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा कंपनी को सहयोग किया होेता तो आज उक्त कंपनी उत्तराखण्ड की प्रमुख वित्तीय संस्था होती हजारो लोगो को रेाजगार मिला होता आज उत्तराखण्ड सरकार बाहर से उद्यांेगपतियो को बुलाकर उन्हंे तरह तरह की सुविधाए प्रदान कर रही है लेकिन घर की कंपनी क्रिस्टल कारपोरेशन आखो के सामने मर रही है उसे सहयोग देने के बजाए उसे बरबाद होने दिया जा रहा है जबकि कंपनी के पास उत्तराखण्ड दिल्ली बनारस हरियाणा मे करोडो की संपत्ति मौजूद है यदि आज उत्तराखण्ड सरकार व कोर्ट सही संे उक्त संपत्तियो की बिक्री कराने मे सहयोग करे तो जनता का रुपया आसानी से मिल सकता।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि बंजर नहीं रखी जानी चाहिए: मुख्यमंत्री
देहरादून 4 नवम्बर(निस)। चार दिवसीय कृषि उद्यान एवं पर्यटन विकास मेला गैरसैंण का उद्घाटन करते हुए सूबे के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने घोषणाओं की झड़ी लगाते हुए जनपद के सभी मेलों को सांस्कृतिक श्रृखंला एवं पर्यटन से जोड़ते हुए रिवाल्वींग फंड की स्थापना कर 25 लाख रूपये देने की घोषणा की। साथ ही गैरसैंण से भराडीसैंण तक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किये जाने की बात कही। उन्होंने गैरसैण को पर्वतीय राज्य के विकास के माॅडल के रूप विकसित करने के लिए अनेक सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को इंटर काॅलेज गैरसैण के मैदान में आयोजित मेले के उद्घाटन अवसर पर एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि बंजर नहीं रखी जानी चाहिए। इसके लिए कृषकों को एक सार पद्वति से खेती करने का सुझाव दिया तथा काश्तकारी की भूमि पर अनाज के अलावा फलदार वृक्षों का रोपण कर उसका उपयोग समूचित उपयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई काश्तकार अपनी बंजर भूमि पर किसी भी प्रकार की खेती न कर सकता हो तो वह उस चारा-पत्ती के पौध का रोपण कर तीन साल बाद सरकार से प्रति पौध 300 रूपये बोनस के रूप मे दिए जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस पर सूबे के 60 वर्ष से अधिक आयु वाले महिलाओं को आंगनवाडी के माध्यम से मध्याह्न भोजन दिए जाने के लिए जिलाधिकारी को 9 नवंबर से पूर्व एक गांव को चयनित कर इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो काश्तकार लगातार 60 वर्ष की आयु के ऊपर तक खेती करने पर उसे पेंशन से नवाजा जाएगा। उन्होंने किसानों को स्वैच्छिक चकबंदी की ओर बढ़ने का आह्वान किया। इस मौके पर उन्होंने ग्रामीणों से दुग्ध पालन, मत्स्य, फल उत्पादन, पुष्प उत्पादन पर बल देने का आह्वान किया। और इसके विपणन की व्यवस्था सरकार अपने जिम्मे लेती है। उन्होंने गांवों में पानी के संबद्र्वन के लिए चाल, खाल बनाने वालांे को प्रोत्साहित करने की बात भी कही। गांवों में चाल, खाल बनाने वाले का उसका नपत के बाद भुगतान किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं को पोष्टिक आहार के रूप में काले भट, आयोडिन युक्त नमक व मंडवा दिए जाने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने सूबे मंे बेहतरीन शिक्षा के लिए सभी विद्यालयों मंे इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक शिक्षकों की तैनाती करने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने शिक्षको का आह्वान किया कि बेहतर शिक्षा देने पर बेहतरीन सुविधा उपलब्ध करवायी जाएगी। साथ सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चिकित्सकांे की तैनाती का भी भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि यदि चिकित्सकों की समूूचित व्यवस्था न होने की दशा में पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। त्र के विकास के लिए घोषणा करते हुए उन्होंने अनेक मोटर मार्गों के विस्तारीकरण, बालिका इंटर कालेज के अतिरिक्त 6 कक्षों की स्वीकृति, आईटीआई भवन, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय भवन, कंडारी खोड में एएनएम सेंटर, गैरसैण में पुलिस थाना, भरारीसैण मंे विधान भवन, विधायक आवास के अलावा सचिवालय भवन निर्माण, मेहलचोॅरी झुला पुल की स्वीकृति के साथ ही थराली को नगर पंचायत का दर्जा दिये जाने आदि की घोषणा भी की। मेले के उद्घाटन के अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों, महिला एवं युवक मंगल दलों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं झांकिया प्रस्तुत की गई साथ ही मेले में विभिन्न विभागांे द्वारा विकास से संबंधित स्टाल भी लगाये गये हैं। मेले में मुख्य आर्कषण पहाड़ी व्यंजन रहा। इस मौके पर विधान सभा उपाध्यक्ष व विधायक कर्णप्रयाग अनुसुया प्रसाद मैखुरी, जिला पंचायत अध्यक्ष मुन्नी शाह, ब्लाक प्रमुख सुमति बिष्ट, स्वतंत्रता संग्राम सैनानी पदम सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख सुरेंद्र सिंह नेगी, जानकी रावत, जिलाधिकारी चमोली एसए मुरूगेशन, पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मीणा, मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार, जिला विकास अधिकारी मोहम्मद असलम, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजीत गैरोला सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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