केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल..मैक्सिस करार में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से सौदे को मंजूरी दिये जाने को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम से पूछताछ की है। सीबीआई सूत्रों ने आज बताया कि श्री चिदंबरम से इस मामले में हाल में ही पूछताछ की गई है। सीबीआई ने तत्कालीन वित्त मंत्री से पूछा है कि वित्त मंत्री को केवल 600 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावों को मंजूरी देने का अधिकार होता है जबकि एयरसेल.मैक्सिस सौदा इस सीमा से कहीं अधिक बड़ा था। सूत्रों ने कहा कि संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति .सीसीईए.के समक्ष भ्ोजा जाना चाहिए था क्योंकि 600 करोड़ रुपये से अधिक के विदेशी निवेश के प्रस्तावों को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सीसीईए ही मंजूरी दे सकती थी।
जांच एजेंसी ने सीबीआई की विशेष अदालत को बताया था कि यह मंजूरी कैसे दी गई, अभी इसकी जांच की जा रही है। सीबीआई के वकील के के गोयल ने अदालत से कहा था ..हमने इस पहलू पर अभी जांच पूरी नहीं की है। जांच एजेंसी ने इस मामले में अपने आरोप पत्र में कहा था कि मैक्सिस की मरीशस स्थित अनुषंगी कंपनी मैर्सस ग्लोबल कम्यूनिकेशन र्सविसेज होल्डिंग लि. ने 80 करोड डलर की मंजूरी मांगी थी। इसकी मंजूरी का अधिकार सीसीईए को ही था। इस आरोप पत्र में सीबीआई ने पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन.उनके भाई कलानिधि मारन.मलेशिया के उद्यमी टी आनंद कृष्णन.वहीं के नागरिक आगस्तर राल्फ मार्शन और चार कंपनियों..सन डायरेक्ट टीवी प्रा लि. मैक्सिस कम्यूनिकेशन बेरहाद. साउथ एशिया इंटरटेनमेंट होल्डिंग लि. और एस्ट्रो अल एशिया नेटवर्क पीएलसी को नामजद किया था। सीबीआई ने 11 सितंबर को अदालत में कहा कि 2006 मेंतत्कालीन दूरसंचार मंत्री श्री मरान ने चेन्नई के उद्यमी सी शिवशंकरन को एयरसेल और दो अनुषंगी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी मलेशिया के मैक्सिस समूह को बेचने के लिए दबाव दिया और बाध्य किया था।

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