पूर्व केन्द्रीय मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी :राकांपा: के सांसद तारिक अनवर ने आज कहा कि देश की जनता का ध्यान मुद्दों से हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी :भाजपा: सरकार एक सोची समझी साजिश के तहत धर्मांतरण का नया खेल खेल रही है । श्री अनवर ने दिल्ली रवाना होने से पूर्व यहां संवाददाताों से बातचीत में कहा कि श्री मोदी के सत्ता में आने के छह माह बाद भी लोकसभा चुनाव के दौरान किये गये वादे को सरकार अभी तक पूरा नहीं कर सकी है । आम लोगों का ध्यान चुनावी वादों से हटाने के उद्देश्य से भाजपा और उसके तमाम बड़े नेता देश में धर्मांतरण का नया खेल शुरु कर दिया है जो लोकतंत्र के लिए घातक है । राकांपा सांसद ने कहा कि धर्मांतरण का यह नया खेल भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सोची समझी साजिश है । उन्होंने कहा कि इसी तरह का खेल श्री मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में गुजरात में भी खेला गया था और वहां धर्म के आधार पर लोगों का धुर्वीकरण किया गया था। इसी फार्मूला के आधार पर मोदी के नेतृत्व में केन्द्र की सरकार धर्मांतरण की बात कर रही है ।
श्री अनवर ने कहा कि चुनाव के समय श्री मोदी ने सत्ता में आने पर सौ दिन में कालेधन की वापसी का वायदा किया था और कहा था कि हर गरीबों के खाते में 15श।5 लाख रुपये जमा कराये जायेंगे। कालेधन की वापसी की बात तो दूर केन्द्र सरकार आरोपियों का नाम तक नहीं बता रही है । राकांपा सांसद ने कहा कि इसी तरह बेरोजगार नौजवानों को भी नौकरी देने का वादा किया गया था और उसे भी अबतक पूरा करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं किया गया है । बेरोजगारी को लेकर देश के नौजवानों में खासा बेचैनी है और इससे भी इनका ध्यान हटाने के इरादे से धर्म परिवर्तन की बातें की जा रही है । देश में विकास नहीं हो रहा है और जनता अपने को ठगा सा महसूस कर रही है ।
श्री अनवर ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जहां गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाये जाने की वकालत की है वहीं भाजपा के कुछ नेता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोड्से को राष्ट्रभक्त बता रहे है । उन्होंने कहा कि यह सब एकता और अखंडता वाले भारत के लिए खतरनाक संकेत है । भाजपा के नेता कट्टरपंथी की भाषा का इस्तेमाल कर रहे है । राकांपा सांसद ने आरोप लगाया कि सबका साथ और सबका विकास का नारा देकर सत्ता में आये श्री मोदी के शासनकाल के दौरान साम्प्रदायिक तनाव बढ़ा है । मोदी का यह नारा खोखला साबित हो रहा है । उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समाज को मुख्य धारा से अलग कर दिया गया है और ऐसे में देश में कैसे एकता और सद्भावना का माहौल कायम हो पायेगा

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