भारतीय मुक्केबाज सरिता देवी पर बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संस्था.आईबा. ने इस वर्ष हुये इंचियोन एशियाई खेलों में पदक लौटाने और खेल भावना से इतर व्यवहार करने के आरोप में एक वर्ष का बैन लगा दिया। आईबा एशियाड में सरिता के कांस्य पदक लौटाने के मामले में पहले आजीवन बैन लगाने का विचार कर रहा था। लेकिन केंद्र सरकार और बाकि्संग इंडिया के हस्तक्षेप के बाद भारतीय मुक्केबाज पर एक वर्ष का बैन लगाया गया है। इसे सरिता के लिये राहत कहा जा सकता है क्योंकि इससे उनका रियो ओलंपिक 2016 में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हो गया है। सरिता ने इंचियोन खेलों में सेमीफाइनल मुकाबले में पराजित घोषित किये जाने का विरोध किया था और जजों के निर्णय पर सवाल उठाये थे। इसके बाद पदक वितरण समारोह में मणिपुरी मुक्केबाज ने अपना पदक पोडियम पर ही छोड़ दिया था। वैश्विक संस्था ने सरिता के इस व्यवहार को अभद्र और खेल भावना के इतर करार दिया था। हालांकि सरिता ने बाद में इसके लिये माफी मांग ली थी। हाल ही में उन्होंने अपना कांस्य पदक भी स्वीकार कर लिया था।
इस मामले में राष्ट्रीय कोच जीएस संधू को बड़ी राहत देते हुये प्रतिबंध से बहाल कर दिया गया है लेकिन विदेशी कोच बाई फर्नांडीज पर दो वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया है। सरिता विवाद के बाद वैश्विक मुक्केबाजी संस्था ने सरिता के अलावा राष्ट्रीय कोच और दल प्रमुख पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। सरिता पर अपना कांस्य पदक लौटाने के मामले में सख्ती दिखाते हुये आईबा ने महिला मुक्केबाज पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले आईबा के अध्यक्ष सीके वू ने संकेत दिये थे कि एशियाई खेलों में खेल भावना का पालन नहीं करने और अनुशासनहीनता के लिये सरिता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गत बुधवार सरिता को भारतीय ओलंपिक संघ.आईओए. के महासचिव राजीव मेहता ने उनका कांस्य पदक लौटाया। उन्होंने दिल्ली में आईओए के मुख्यालय में मण्िपुरी मुक्केबाज को उनका पदक साैंपा। ज्ञातव्य है कि सरिता के र्समथन में पूर्व क्रिकेट और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर ने भी खेल मंत्री र्सबानंद सोनोवाल से मुलाकात कर सरिता के करियर को बचाने के लिये अपील की थी।
आईबा के फैसले पर सरिता ने कहा..मैं बहुत राहत महसूस कर रही हूं और मुक्केबाजी समुदाय तथा बाकि्संग इंडिया को धन्यवाद देना चाहती हूं जिनकी मदद के कारण ही मैं इतने मुश्किल समय से बाहर निकल पाई। मैं अब और कड़ी मेहनत करूंगी ताकि देश को गौरव दिला सकूं। बाकि्संग इंडिया ने लगभग 35 वषा6 से मुक्केबाजी की सेवा कर रहे संधू और धयाल को आरोपों से बरी किये जाने पर खुशी व्यक्त की। बाकि्संग इंडिया ने ख्ोल मंत्री सोनोवाल और विभिन्न भारतीय खिलाडि़यों की भी सराहना की जिससे विश्व संस्था पर कुछ दबाव बने। क्रिकेट के लीजेंड सचिन तेंदुलकर ने भी सरिता के पक्ष में आवाज बुलंद की थी। उल्लेखनीय है कि सरिता ने इंचियोन खेलों में सेमीफाइनल मुकाबले में पराजित घोषित किये जाने का विरोध किया था और जजों के निर्णय पर सवाल उठाये थे। इसके बाद पदक वितरण समारोह में मणिपुरी मुक्केबाज ने अपना पदक पोडियम पर ही छोड़ दिया था। वैश्विक संस्था ने सरिता के इस व्यवहार को अभद्र और खेल भावना के विपरीत करार दिया था। हालांकि सरिता ने बाद में इसके लिये माफी मांग ली थी। हाल ही में उन्होंने अपना कांस्य पदक भी स्वीकार कर लिया था।गत बुधवार सरिता को भारतीय ओलंपिक संघ.आईओए. के महासचिव राजीव मेहता ने उनका कांस्य पदक लौटाया था। उन्होंने दिल्ली में आईओए के मुख्यालय में मण्िपुरी मुक्केबाज को उनका पदक साैंपा।

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