धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन के लिये देश दुनिया में विख्यात गीताप्रेस में वेतन विसंगति को लेकर कर्मचारीयों के आक्रोश के बीच आज अनिश्चितकाल के लिये तालाबंदी कर दी गयी। वेतन विसंगतियों को लेकर एक अरसे से कर्मचारीयों में पनप रहा आक्रोश पिछली तीन दिसम्बर को फूट पड़ा था जब कर्मचारीयों ने प्रबंधन के खिलाफ पहली बार आवाज बुलंद की थी। इस बीच कर्मचारी अपने मूल दायित्व को निभाते हुये कुछ अंतराल पर हडताल पर जाते रहे थे। तालाबंदी के पीछे प्रबंधन का तर्क है कि कल बगावती कर्मचारीयों के साथ बाहरी अराजक तत्वों ने उनके कक्ष में घुसकर अभद्रता की थी इसलिये मजबूरन प्रेस में तालाबंदी का निर्णय लेना पड़ा। कोतवाली क्षेत्र के भीडभाड़ वाले रेती रोड में स्थित कार्यालय में आज सुबह ड्यूटी के लिये पहुंचे कर्मचारी गेट पर ताला देखकर आगबबूला हो गये। कुछ ही देर मे वहां कर्मचारीयों का हुजूम जमा हो गया और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गयी।
कर्मचारी जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी आवास की ओर बढ़े। कर्मचारीयों के उग्र तेवरों को भांपकर पुलिस प्रशासन ने जरूरी इंतजाम कर रखे थे। अधिकारियों ने कर्मचारीयों को समझाने की कोशिश की और प्रबंधन से तालाबंदी खुलवाने का आश्वासन दिया तब जाकर कर्मचारी शांत हुये। वर्ष 1923 में गीताप्रेस की स्थापना श्री जयदयाल गोयनका ने की थी और तबसे यह प्रतिष्ठान एक दिन के लिये भी कभी बंद नहीं हुआ। श्रीमद्भागवत समेत हिन्दू धर्मग्रंथों के लिये विख्यात गीताप्रेस में हिन्दी और संस्कृत समेत 15 भाषाों में धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन होता है। संस्थान में मौजूदा समय में 189 र्कमचारी कार्यरत हैं। हाल ही में प्रबंधन ने र्कमचारियों के वेतन में 19 से 14 प्रतिशत तक की वृद्धि की थी मगर र्कमचारी वेतन में 10 प्रतिशत और की बढोत्तरी की मांग पर अड़े हुये हैं हालांकि प्रबंधन तीन प्रतिशत और वृद्धि के लिये तैयार है।

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