टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा है कि देश की उलझी कानूनी प्रक्रिया में न्याय मिलना दूर की कौड़ी होता है पर कभी कभार चमत्कार होता है और वंचितों को भी न्याय मिल जाता है। ऐसा ही चमत्कार हुआ है जनपद पंचायत सीधी की ग्राम पंचायत रामगढ़ नंबर-1 में गरीबों और मजदूरों के कल्याण की राशि को हड़पने वाली सरपंच तथा शामिल कर्मचारियों के विरूद्ध लोकायुक्त पुलिस मे आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने के निर्णय से । कागज में कार्य दिखाकर लगभग 18 लाख रूपये की राशि हड़पने वाली सरपंच तथा शामिल कर्मचारियों को भाजपा के सत्ता एवं संगठन के मूर्धन्य नेताओं का बरदहस्त तो प्राप्त ही था लूट मंे उनकी हिस्सेदारी भी रही है पर भ्रष्टाचारियों को सत्ता के मठाधीश भी नहीं बचा पाये। लाखों रूपये की हेराफेरी करने के कारण ई0ओ0डब्ल्यू0 पुलिस भोपाल ने रामगढ़ नंबर- 1 की सरपंच सरस्वती बहेलिया , सचिव बाबूलाल कोल, सहायक यंत्री एस. एस. द्विबेदी, उपयंत्री रामकृष्ण उपाध्याय एवं समिति प्रबंधक लक्ष्मण प्रसाद सोनी को गवन एवं भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुये भारतीय दण्ड संहिता की धारा- 409, 420, 467, 468, 471, 120बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा- 13-1सी, 13-1डी के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कार्यवाही हेतु टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा द्वारा सभी स्तर पर शिकायती पत्र भेजा गया तथा भीषण तपन में दिनांक- 28.05.2012 को मोर्चा संयोजक उमेश तिवारी के अगुआई में कृषि फार्म मनकीसर में धरना किया गया तथा मोर्चा के साथी प्रभात वर्मा द्वारा लोकायुक्त में शिकायत की गई। वर्ष 2012 से सतत संघर्ष के बाद भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण कायम किया गया है।
रामगढ़ नंबर- 1 की सरपंच सरस्वती बहेलिया की भाजपा नेताओं से गहरी पैठ का अंदाजा इससे होता है कि हो रहे पंचायती चुनाव में जिला पंचायत के वार्ड क्रमंाक- 7 सेमरिया से भाजपा ने इन्हें अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। सरस्वती बहेलिया को अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर भाजपा ने अपने चाल, चरित्र और चेहरे की ही नुमाइस की है।
श्री तिवारी ने कहा कि यह भी जानना जरूरी है कि सरपंच भले सरस्वती थी पर सरपंची तथा आकाआंे से सांठगांठ का कार्य उनका देवर हीरामणि वहेलिया ही करता था। जो पटवारी रहते हुए जे0पी0 निगरी प्लाण्ट के पक्ष मेंे सैकड़ों एकड़ भूमि की हेराफेरी की थी तथा करोड़ों रूपये का भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया जिस कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने का भी आदेश दिया गया है। लेकिन टुकड़खोर सिस्टम के चलते अभी तक एफ0आई0आर0 दर्ज नहीं हो सकी है। हीरामणि के खिलाफ अतिवृष्टि सहायता राशि हड़पने के कारण एफ0आई0आर0 दर्ज है तथा बन्दोबस्त के दौरान फर्जी पट्टा देने का भी दोषी पाया गया है। इसके द्वारा भ्रष्टाचार करके करोड़ों की संपत्ति और जमीन अर्जित की गई है जिसे राजसात किया जाना चाहिये।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें