मुद्रास्फीति की नरमी एवं आर्थिक वृद्धि के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक ने आज अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती करके 7.75 प्रतिशत कर दी। रिजर्व बैंक ने रेपो दरों में कटौती करने का निर्णय प्रस्तावित मौद्रिक नीतिगत समीक्षा से करीब एक पखवाड़े पहले ही कर दिया। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा तीन फरवरी को प्रस्तावित थी।
रिजर्व बैंक ने आज जारी बयान में कहा, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत नीतिगत रेपो दर 8.0 प्रतिशत में 25 आधार अंक की कटौती करके 7.75 प्रतिशत करने का निर्णय किया गया है। यह तत्काल रूप से प्रभावी हो गयी है। रिजर्व बैंक जनवरी 2014 से अपनी नीतिगत ब्याज दरें आठ प्रतिशत पर स्थिर रखे हुये था।
आरबीआई ने हालांकि नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) को चार प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। बैंकों द्वारा केंद्रीय बैंक में अनिवार्य तौर पर रखी जाने वाली नकदी का अनुपात सीआरआर कहलाता है। रेपो दर में कटौती के बाद रिवर्स रेपो को समयोजित कर 6.75 प्रतिशत कर दिया गया है और एमएसएफ तथा बैंक दर 8.75 प्रतिशत कर दिया गया है।
आरबीआई ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जुलाई 2014 से लगातार घट रहा है और यह आशंका से कम स्तर पर है। साथ ही सरकार ने अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के अनुपालन के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। आरबीआई ने कहा इन घटनाक्रमों ने मौद्रिक नीति की पहलों में बदलाव की गुंजाइश बनाई।
केंद्रीय बैंक ने दिसंबर में अपनी पांचवीं द्वैमासिक मौद्रिक नीति में कहा था यदि मुद्रास्फीति की मौजूदा गति बरकरार रहती है और मुद्रास्फीतिक अनुमानों में बदलाव जारी रहते हैं और राजकोषीय घटनाक्रम उत्साहजनक रहते हैं तो अगले साल की शुरुआत में मौद्रिक नीति की पहलों में बदलाव हो सकता है जिसमें नीतिगत समीक्षा चक्र से बाहर के परिवर्तन भी शामिल हैं।
बयान में कहा गया कि आरबीआई के शीर्ष अधिकारियों ने सार्वजनिक बातचीत में मध्यम अवधि मुद्रास्फीतिक लक्ष्य प्राप्त करने के साथ ही मौद्रिक नीति में नरमी की प्रक्रिया शुरू करने के प्रति प्रतिबद्धता जताई थी। मुद्रास्फीति की स्थिति के संबंध में बयान में कहा गया मुद्रास्फीति जनवरी 2015 के लिए तय आठ प्रतिशत के लक्ष्य से काफी नीचे आ गई है। मौजूदा नीतिगत व्यवस्था में जनवरी 2016 तक मुद्रास्फीति के छह प्रतिशत से नीचे आने की उम्मीद है।
बयान में कहा गया फल-सब्जी और अनाज की कीमत में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय जिंस विशेष तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से मुद्रास्फीति उम्मीद से कमतर स्तर पर आ गई। बयान के मुताबिक भू-राजनैतिक क्षटकों के अलावा कच्चे तेल की कीमत इस साल कम रहने की उम्मीद है।
रिजर्व बैंक ने दिसंबर में कहा था कि मौद्रिक पहलों में बदलाव के बाद इसके बाद की पहले इसके अनुरूप होंगी। आरबीआई के बयान में कहा गया आने वाले दिनों में दरों में कटौती के लिए मुद्रास्फीतिक कम करने वाले दबाव बरकरार रहने की पुष्टि करने वाले आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाला सतत राजकोषीय पुनर्गठन और आपूर्ति बाधाओं को दूर करने की पहल तथा बिजली, भूमि, खनिज एवं बुनियादी ढांचा जैसे प्रमुख अवयवों की सुनिश्चित उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि आगामी तिमाहियों में संभावित उत्पादन में बढ़ोतरी वृद्धि में अनुमानित तेजी से अधिक हो। आरबीआई ने कहा कि वह नकदी की स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए रोजाना परिवर्तनीय दर वाले रेपो और रिवर्स रेपो को बरकरार रखेगा।
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