एक श्रद्धालु युवती से बलात्कार के आरोपी कथावाचक आसाराम बापू को आज भी उच्चतम न्यायालय से राहत नहीं मिली और उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना पड़ सकता है। आसाराम ने अपनी बीमारी का हवाला देकर जोधपुर जेल से जमानत पर रिहा करने का उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया था। उसके बाद न्यायालय ने याचिकार्कता के स्वास्थ्य की जांच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कराने का आदेश दिया था। एम्स के मेडिकल बोर्ड ने आज न्यायालय में अपनी रिपोर्ट साैंपी. जिसमें उसने कहा है कि आसाराम को फिलहाल र्सजरी की कोई जरूरत नहीं है। एम्स के न्यूरो र्सजरी के प्रोफेसर डॉ. शशांक शरद काले की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय बोर्ड ने उनकी जांच की थी और एम्स के ट्रॉमा सेंटर के रेडियोलॉजी विभाग में जांच रिपोर्ट की समीक्षा की गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आसाराम की बीमारी इतनी बड़ी नहीं है कि उनकी र्सजरी की जाए। उन्हें दवा से भी ठीक किया जा सकता है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पढ़ने के बाद शीर्षा अदालत ने याचिकार्कता को फिलहाल जमानत नहीं देने का फैसला लिया। हालांकि उसने आसाराम के वकील को दो सप्ताह का वक्त दिया है. ताकि वह रिपोर्ट की समीक्षा कर सके। अदालत ने आसाराम को रिपोर्ट की समीक्षा के बाद जवाबी हलफनामा भी दायर करने को कहा है। याचिकार्कता ने जोधपुर अस्पताल के चिकित्सकों की उस रिपोर्ट के आधार पर र्सजरी के लिए जमानत मांगी थी जिसमें कहा गया था कि आसाराम ट्राईजेमिनल यूरैल्जिया की बीमारी के शिकार हैं. जिसकी वजह से उनके सिर में भयानक र्दद होता है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने गत अक्टूबर में एम्स के निदेशक को एक मेडिकल बोर्ड गठित करके आसाराम की मेडिकल जांच करने का आदेश दिया था। एक नाबालिग लड़की ने अगस्त 2013 में आसाराम पर आरोप लगाया था कि कथावाचक ने उसके साथ जोधपुर के आश्रम में बलात्कार किया था। इसके बाद आसाराम को सितम्बर 2013 में गिरफतार कर लिया गया था। तभी से वह जोधपुर की जेल में बंद हैं।

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