भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि केन्द्र सरकार बिहार के बरौनी स्थित खाद कारखाना को फिर से चालू करने के लिए शीघ्र ही मंत्रिपरिषद में प्रस्ताव लायेगी. श्री मोदी ने दिल्ली में केन्द्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री अनन्त कुमार से मिलने के बाद श्री मोदी ने यहां बयान जारी कर कहा कि केन्द्रीय मंत्री ने उन्हें बताया कि बरौनी खाद कारखाना को पुनस्र्थापित करने के लिए मंत्रालय तत्परता से कार्रवाई कर रहा है । बरौनी उर्वरक कारखाना को चालू कराने के लिए केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में करीब साढ़े पांच हजार करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव शीघ्र ही पेश किया जाएगा. पूर्व उप मुख्यमंत्री के अनुसार केन्द्र सरकार गोरखपुर और सिंदरी खाद कारखाना को चालू कराने के लिए भी प्रयासरत है । केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि बरौनी खाद कारखाना को चालू कर केन्द्र सरकार बिहार के किसानों को बड़ी राहत देने के लिए संकल्पित है । उन्होंने आश्वस्त किया है कि बिहार में यूरिया खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी और निर्धारित कोटे की आपूर्ति समय पर की जाएगी.
श्री मोदी ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री से बातचीत के दौरान मंत्राल के अधिकारियों ने बताया कि असली परेशानी बिहार में यूरिया लेकर आने वाले रेलवे के रैक को समय से खाली नहीं करना है। रैक को खाली करने में 9 घंटे की जगह 15 से 25 घंटे का समय लग रहे है। दूसरी ओर प्रदेश में उपलब्ध यूरिया के वितरण की व्यवस्था भी काफी लचर है। खाद की कालाबाजारी को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से छापेमारी और अन्य निरोधत्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है। भाजपा नेता के अनुसार मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि सीमाई इलाकों से नेपाल में बड़े पैमाने पर यूरिया की तस्करी होने की शिकायतें भी मिल रही है। ऐसे में सरकार को स्थानीय विधायकों के साथ जिलों में बैठक कर खाद की कालाबाजारी और तस्करी पर रोक लगाने की कारगर पहल करनी चाहिए। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे में यूरिया के कारोबार को निजी हाथों में छोड़ दिया गया है। दो साल पूर्व पैक्सों को खाद के कारोबार के लिए ढ़ाईशढ़ाई लाख रूपये की पूंजी दी गई थी लेकिन अब उन्हें कोई पूंजी नहीं दी जा रही है। पूंजी के अभाव में पैक्स खाद का कारोबार नहीं कर पा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार को मध्यप्रदेश और अन्य राज्य सरकारों की तरह बिहार में भी एक लाख मीटि्रक टन यूरिया का बफर स्टॉक रखना चाहिए ताकि जरू रत के समय किसानों को खाद की किल्लत नहीं हो।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें