प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को बिहार में रोकने के नाम पर पुराने जनता परिवार की एकता की पहली परीक्षा इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में तय मानी जा रही है जिसे देखते हुए प्रदेश की राजनीति इन दिनों गरमाती जा रही है । विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन :राजग:जीतेगा या जनता दल यूनाइटेड राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन की जीत होगी . इन दिनों राजनीतिक और गैर राजनीतिक हलको में यही चर्चायें हो रही है ।एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा उत्साहित है तो दूसरी ओर जद यू राजद के होने वाले विलय से इनके कार्यर्कता भी जोश से लबरेज है । दोनों के ही मजबूत पक्ष है । पिछले वर्ष अप्रैल मई में हुये लोकसभा चुनाव में राजग को बिहार में कुल 40 में से 31 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन इसके ठीक तीन माह बाद ही अगस्त में जब विधानसभा की दस सीटों के लिए उप चुनाव हुए तो उसमें राजग साठ प्रतिशत सीटें हार गया. इस उप चुनाव में राजद जद यू और कांग्रेस गठबंधन को छह सीटें मिली।
इस उप चुनाव में जद यू ने राजद और कांग्रेस से गठबंधन कर लिया था जबकि लोकसभा का चुनाव राजद और जद यू ने अलगशअलग लड़ा था। उप चुनाव में एक साथ मिलकर लड़ने से परिणाम चाैंकाने वाला हुआ और इससे उत्साहित होकर जद यू ने राजद के साथ महागठबंधन बनाने का फैसला कर लिया. लोकसभा चुनाव के मतों के प्रतिशत से भी जद यू और राजद का मनोबल बढ़ा था। लोकसभा की जिन सीटों पर राजग को विजय मिली थी उनमें से 19 सीटें ऐसी थी जहां से उनके उम्मीदवार नहीं निकल पाते यदि राजदशजदयू गठबंधन का उम्मीदवार होता 1 इन 19 सीटों पर राजद शजद यू उम्मीदवारों के मतों को जोड़ देने से राजग से अधिक मत थें 1 ताजा राजनीतिक घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि अब जनता परिवार एक होकर ही रहेगा. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ..दहाड़.. रहे है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजय रथ को बिहार के चुनाव में रोक देंगे 1 लेकिन ऐसा नहीं लगता कि भाजपा श्री यादव के इस दहाड़ से डर गयी हो 1 झारखंड में हालिया जीत से उत्साहित होकर भाजपा ताल ठोक रही है और वह सिर्फ बहुमत के लिए 122 सीट ही नहीं पूरे 175 प्लस का लक्ष्य लेकर चल रही है ।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री राम लाल ने प्रदेश कार्य समिति की बैठक में स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी बिहार में नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी 1 पार्टी ने अपना एजेंडा तय कर दिया है ..जहां चुनाव वहां सरकार. पार्टी के बिहार मामलों के प्रभारी भूपेन्द्र यादव ने भी कहा है कि बिहार 2015 की राजनीतिक का मानक तय करेगा. बिहार में कांग्रेस की स्थिति बेहतर नहीं है और चुनाव में उसे क्षेत्रीय दलों से समझौता करना होगा 1 झारखंड विधानसभा का चुनाव इसका ताजा उदाहरण भी है । आज के समय में कांग्रेस के पास बिहार में उतनी ही सीटें है जितनी कभी नये दलों के खातों में रहा करती थी। कांग्रेस के अभी पांच विधायक हैं और इनमें से एक अगस्त माह में हुए विधानसभा के उप चुनाव में राजदशजदयू के गठबंधन के तहत निर्वाचित हुए है । विधानसभा के इस वर्ष होने वाले चुनाव में दो से अधिक प्रभावशाली केन्द्र नहीं नजर आ रहे है । इससे कोई इंकार भी नहीं कर सकता है कि भाजपा देश की सबसे तेजी से उभरती राजनीतिक शक्ति है । तस्वीर बहुत स्पष्ट है । भाजपा सत्ता में आना चाह रही है जबकि विरोधी उसे रोकने की कोशिश कर रहे है । इस वर्ष के अक्टूबरशनवम्बर में होने वाले बिहार विधानसभा के चुनाव में राजदशजद यू ने बाजी मार ली तो इससे गैर भाजपा दलों का मनोबल देश भर में बढ़ जायेगा . लेकिन यदि जनता का फैसला इसके विपरीत हुआ तो भाजपा की आगे की राह भी आसान हो जायेगी.

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