खेल विधेयक 2013 को वापस लेने के बिहार सरकार के फैसले से राज्य के हजारों खिलाडि़यों के चेहरों पर मुस्कान लौट आयी है। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा सोमवार रात ख्ोल विधेयक वापस लेने की घोषणा के साथ ही केरल में इसी माह आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों में बिहार के खिलाडि़यों के हिस्सा लेने का रास्ता खुल गया है । हालांकि भारतीय ओलंपिक संघ ने साफ किया है कि सरकार की ओर से विधेयक वापस लेने की लिखित घोषणा के बाद ही राष्ट्रीय खेलों में बिहार की भागीदारी संभव है । वहीं विधेयक के वापस लेने के फैसले से खिलाडि़यों के चेहरों पर मुस्कान लौट आयी है । खिलाडि़यों ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है । खिलाडि़यों का कहना है कि इससे जहां उन्हें राष्ट्रीय खेलों में खेलने का मौका मिल गया है . वहीं खेल को करियर बनाने का सपना संजोने वाले नये बच्चों को भी आशा की एक रौशनी मिली है । विभिन्न संघों के अधिकारियों ने भी फैसले का स्वागत किया है।
इससे पूर्व भारतीय ओलंपिक संघ ने खेल विधेयक को लेकर बिहार को राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार के रवैये से नाराज विभिन्न खेलों के खिलाडि़यों ने दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में स्थानीय मोईनुल हक स्टेडियम के समीप अनशन शुरू किया था। हालांकि राज्य के कला मंत्री विनय बिहारी द्वारा आश्वासन दिये जाने के बाद खिलाडि़यों ने अपना अनशन यह कहते हुए समाप्त कर दिया था कि यदि पांच जनवरी तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो वे एक बार फिर से अनशन पर बैठ जायेंगे. खिलाडि़यों के आक्रोश को देखते हुए बिहार सरकार की ओर से राज्य के मंत्री दिल्ली जाकर भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारियोंसे मिलकर उन्हें खेल विधेयक 2013 को वापस लेने का आश्वासन दिया था जिसके बाद संघ के अधिकारियों ने भी सकारात्मक संकेत दिये थे. उल्लेखनीय है कि खेल नीति विधेयक 2013 में विरोधाभाष के कारण कई खेल संघों ने इसे वापस लेने की मांग की थी। वहीं कुछ संघों ने इसे खेलों के लिए घातक बताते हुए इसमें संशोधन किये जाने की मांग की थी।

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